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Thailand Kidnapping : दुबई से रची साजिश, थाईलैंड में तीन भारतीयों का अपहरण, पांच आरोपी गिरफ्तार, पुलिस ने बचाया

दुबई में बैठे पाकिस्तानी की साजिश, थाईलैंड में 5 भारतीयों ने 3 भारतीय पर्यटकों का किया अपहरण; पुलिस ने ऐसे बचाई जान

थाईलैंड में भारतीय नागरिकों के अपहरण और फिरौती से जुड़ा एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां पांच भारतीय नागरिकों को अपने ही देश के तीन भारतीय पर्यटकों का अपहरण कर उनसे करोड़ों रुपये की फिरौती मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस पूरी साजिश के पीछे दुबई में बैठा एक पाकिस्तानी नागरिक था, जिसने कथित तौर पर आरोपियों को अपहरण की योजना बनाने और उसे अंजाम देने के निर्देश दिए थे। थाई पुलिस ने समय रहते कार्रवाई करते हुए तीनों पीड़ितों को सुरक्षित छुड़ा लिया और पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

बैंकॉक के होटल से गिरफ्तार हुए पांचों आरोपी

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, थाईलैंड पुलिस ने मंगलवार को बैंकॉक के क्लोंग तान इलाके के एक होटल में छापेमारी कर पांच भारतीय नागरिकों को गिरफ्तार किया। पुलिस का कहना है कि आरोपी विदेश भागने की तैयारी में थे, लेकिन इससे पहले ही उन्हें हिरासत में ले लिया गया।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अवतार सिंह (38), जगजीत सिंह (38), रामबालक कुमार (24), सुखबीर सिंह (37) और कुलरा सिंह (27) के रूप में हुई है। पूछताछ के दौरान सभी आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने एक पाकिस्तानी नागरिक के कहने पर इस वारदात को अंजाम दिया।

दुबई में बैठे पाकिस्तानी ने रची थी पूरी साजिश

जांच में सामने आया है कि आरोपियों की मुलाकात करीब एक महीने पहले एक चैट एप्लिकेशन के जरिए उस पाकिस्तानी नागरिक से हुई थी। पुलिस का मानना है कि वह व्यक्ति दुबई में रह रहा है और वहीं से पूरे ऑपरेशन को संचालित कर रहा था।

आरोपियों के मुताबिक, उन्हें तीन भारतीय पर्यटकों का अपहरण कर उनके परिवारों से फिरौती वसूलने का निर्देश दिया गया था। इसके बदले उन्हें बड़ी रकम, कीमती सामान और थाईलैंड से बाहर निकलने के लिए हवाई टिकट देने का वादा किया गया था।

क्रिप्टोकरेंसी में मांगी गई फिरौती

पुलिस जांच के अनुसार, अपहरणकर्ताओं ने तीनों पीड़ितों के परिवारों से प्रत्येक व्यक्ति के लिए लगभग 40 लाख रुपये की फिरौती मांगी। आरोपियों को निर्देश दिया गया था कि फिरौती की पूरी रकम क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से ली जाए, ताकि लेनदेन का आसानी से पता न लगाया जा सके।

जांच एजेंसियां अब इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या इस गिरोह का संबंध किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क से है।

भारतीय दूतावास की सूचना के बाद शुरू हुई कार्रवाई

इस मामले का खुलासा तब हुआ जब पीड़ितों के परिवारों ने अपने परिजनों के लापता होने और फिरौती की मांग की जानकारी भारतीय दूतावास को दी। इसके बाद 21 जुलाई को थाईलैंड स्थित भारतीय दूतावास ने चोनबुरी इमिग्रेशन पुलिस और पटाया सिटी पुलिस को मामले की जानकारी दी।

पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद तुरंत जांच शुरू की और तकनीकी साक्ष्यों, खुफिया जानकारी तथा सीसीटीवी फुटेज की मदद से आरोपियों की गतिविधियों पर नजर रखी।

पटाया में छापेमारी कर तीनों भारतीयों को कराया मुक्त

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि अपहृत भारतीयों को पटाया स्थित एक दो मंजिला मकान में बंधक बनाकर रखा गया है। इसके बाद पुलिस ने विशेष अभियान चलाकर वहां छापा मारा और 23 वर्षीय मोहित, 24 वर्षीय आशीष और 20 वर्षीय हिमांशु को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। तीनों पीड़ितों की मेडिकल जांच कराई गई और उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।

अंतरराष्ट्रीय गिरोह के एंगल से हो रही जांच

थाई पुलिस अब इस पूरे मामले की कई पहलुओं से जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि इस वारदात के पीछे एक संगठित अंतरराष्ट्रीय गिरोह हो सकता है, जो विदेशी नागरिकों का अपहरण कर क्रिप्टोकरेंसी के जरिए फिरौती वसूलने की साजिश रचता है। दुबई में बैठे कथित पाकिस्तानी साजिशकर्ता की पहचान और उसकी गिरफ्तारी के लिए भी जांच तेज कर दी गई है।

पहले भी थाईलैंड में पकड़ा जा चुका है भारत का वांटेड अपराधी

गौरतलब है कि इससे पहले भी थाईलैंड में भारतीय एजेंसियों के सहयोग से कई वांटेड अपराधियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। हाल ही में NIA के वांटेड गैंगस्टर साहिल चौहान को भी थाईलैंड से गिरफ्तार कर भारत प्रत्यर्पित किया गया था। उस पर विदेश में बैठकर सुपारी किलिंग और संगठित अपराध से जुड़े गंभीर आरोप हैं।

इस ताजा मामले ने एक बार फिर यह दिखाया है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय आपराधिक नेटवर्क अब डिजिटल प्लेटफॉर्म और क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल कर संगठित अपराध को अंजाम देने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, भारतीय दूतावास और थाई पुलिस की त्वरित कार्रवाई से तीन भारतीय नागरिकों की जान बच गई और एक बड़ी आपराधिक साजिश का पर्दाफाश हो गया।

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