
नई दिल्ली: संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है। सत्र से पहले राजधानी दिल्ली में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। एक ओर केंद्र सरकार अपने महत्वपूर्ण विधेयकों को संसद से पारित कराने की रणनीति तैयार कर रही है, वहीं विपक्ष बेरोजगारी, महंगाई, NEET पेपर लीक और अन्य जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में जुटा है। इसी बीच उन विधेयकों की संभावित सूची भी सामने आई है, जिन्हें मोदी सरकार इस सत्र के दौरान संसद में पेश कर सकती है।

सरकार की प्राथमिकता नए कानूनों के साथ-साथ पहले से लंबित विधेयकों को आगे बढ़ाने की भी होगी। इसके लिए सत्ता पक्ष लगातार बैठकों का दौर चला रहा है, जबकि विपक्ष भी साझा रणनीति बनाने में लगा है।
मॉनसून सत्र से पहले तेज हुई राजनीतिक हलचल
सत्र शुरू होने से पहले केंद्र सरकार और विपक्ष दोनों सक्रिय हो गए हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आवास पर मंत्रियों के समूह (Group of Ministers) की अहम बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक में संसद के दौरान सरकार की रणनीति, विधेयकों की प्राथमिकता और विपक्ष के संभावित सवालों का जवाब देने की तैयारी पर चर्चा होगी।
दूसरी ओर कांग्रेस समेत विपक्षी दल भी लगातार बैठकें कर रहे हैं। 19 जुलाई को विपक्षी दलों की संयुक्त बैठक बुलाई गई है, जिसमें संसद के भीतर सरकार को घेरने की रणनीति पर चर्चा होगी।
मॉनसून सत्र में पेश हो सकते हैं ये पांच नए विधेयक
सूत्रों और ANI की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार इस बार लोकसभा में पांच नए विधेयक पेश करने पर विचार कर रही है।
1. इनकम टैक्स (संशोधन) बिल, 2026
यह विधेयक पहले जारी किए गए एक अध्यादेश का स्थान लेने के लिए लाया जा सकता है। इसका उद्देश्य आयकर कानून में किए गए संशोधनों को विधायी मंजूरी देना है।
2. सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन बिल, 2026
सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव इस विधेयक के जरिए संसद में लाया जा सकता है। यह भी एक अध्यादेश की जगह लेने के लिए पेश किया जाएगा।
3. जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) बिल, 2026
इस विधेयक का उद्देश्य जन्म और मृत्यु पंजीकरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, डिजिटल और प्रभावी बनाना है, जिससे सरकारी रिकॉर्ड और नागरिक सेवाओं में सुधार हो सके।
4. राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) बिल, 2026
इस विधेयक के जरिए राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान जैसे राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान से जुड़े मौजूदा कानूनों में संशोधन किए जाने की संभावना है।
5. सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) विकास संशोधन बिल, 2026
सरकार MSME सेक्टर को मजबूत बनाने और छोटे उद्योगों को नई सुविधाएं देने के उद्देश्य से इस संशोधन विधेयक को भी संसद में पेश कर सकती है।
दो पुराने लंबित विधेयकों पर भी हो सकता है विचार
सरकार केवल नए विधेयकों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पहले से लंबित कुछ महत्वपूर्ण बिलों को भी आगे बढ़ा सकती है।
विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन बिल, 2026
यह विधेयक 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था। इसके जरिए विदेशी फंडिंग से जुड़े प्रावधानों में संशोधन किए जाने का प्रस्ताव है।
विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल, 2025
यह बिल 15 दिसंबर 2025 को लोकसभा में पेश किया गया था और फिलहाल संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास विचाराधीन है। मॉनसून सत्र में इस पर आगे की कार्रवाई हो सकती है।
वन नेशन-वन इलेक्शन और परिसीमन पर भी बनी हुई है चर्चा
सरकार द्वारा जारी संभावित विधेयकों की सूची में परिसीमन (Delimitation) और वन नेशन-वन इलेक्शन से संबंधित किसी विधेयक का उल्लेख नहीं है। इसके बावजूद राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा इन्हीं दो मुद्दों को लेकर हो रही है।
विपक्ष का मानना है कि सरकार इन दोनों विषयों पर आगे बढ़ सकती है। कांग्रेस पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि यदि परिसीमन विधेयक संसद में आता है तो वह उसका विरोध करेगी।
विपक्ष किन मुद्दों पर सरकार को घेरेगा?
मॉनसून सत्र के दौरान विपक्ष कई राष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार को कटघरे में खड़ा करने की तैयारी कर रहा है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
- बेरोजगारी
- महंगाई
- NEET पेपर लीक
- किसानों के मुद्दे
- आर्थिक स्थिति
- कानून-व्यवस्था और अन्य जनहित के विषय
संभावना है कि इन मुद्दों को लेकर संसद के दोनों सदनों में तीखी बहस देखने को मिले।
सरकार की रणनीति क्या होगी?
सरकार का फोकस अपने प्रमुख विधेयकों को संसद से पारित कराने पर रहेगा। इसके लिए सहयोगी दलों के साथ समन्वय, विपक्ष के सवालों का जवाब और सदन के सुचारु संचालन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
संसदीय कार्य मंत्रालय और मंत्रियों के समूह की बैठकों में इसी रणनीति को अंतिम रूप दिया जा रहा है ताकि महत्वपूर्ण विधेयकों को बिना किसी बड़ी बाधा के आगे बढ़ाया जा सके।
मॉनसून सत्र पर देश की नजर
20 जुलाई से शुरू होने वाला संसद का मॉनसून सत्र राजनीतिक और विधायी दोनों दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ओर सरकार कई अहम कानूनों को आगे बढ़ाने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष भी जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरने के लिए पूरी तरह तैयार है। ऐसे में यह सत्र केवल विधेयकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कई बड़े राजनीतिक मुद्दों पर भी जोरदार बहस और टकराव देखने को मिल सकता है।




