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Hormuz Security : होर्मुज जलडमरूमध्य में फ्रांस ने जहाजों की सुरक्षा हेतु युद्धपोत किए तैनात

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फ्रांस का बड़ा कदम, जहाजों की सुरक्षा के लिए भेजे माइनहंटर और युद्धपोत

नई दिल्ली: मिडिल-ईस्ट में हालिया तनाव और वैश्विक समुद्री व्यापार को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच फ्रांस ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सुरक्षा बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने घोषणा की है कि उनकी सरकार ने इस अहम समुद्री मार्ग पर माइन हटाने वाले युद्धपोत (माइनहंटर), फ्रिगेट और समुद्री गश्ती विमान तैनात किए हैं। इसका उद्देश्य जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना और समुद्री मार्ग को किसी भी संभावित खतरे से बचाना है।

2 माइनहंटर, 2 फ्रिगेट और गश्ती विमान की तैनाती

राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि फ्रांस ने क्षेत्र में अपने Mine Countermeasures Assets की तैनाती कर दी है। इसमें दो माइनहंटर, दो फ्रिगेट और एक समुद्री गश्ती विमान शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये सभी संसाधन सहयोगी देशों के साथ मिलकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सुरक्षित नौवहन बहाल करने और अंतरराष्ट्रीय जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए तैयार हैं।

वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अहम है होर्मुज

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है। इसी रास्ते से दुनिया के बड़े हिस्से तक कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई होती है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या अवरोध वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर सीधा असर डाल सकता है।

अमेरिका-ईरान समझौते का किया स्वागत

मैक्रों ने अपने बयान में अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून को हुए समझौते (MoU) का भी स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह समझौता क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में एक सकारात्मक कदम है और इससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नौवहन की स्वतंत्रता को मजबूती मिलेगी। उन्होंने बताया कि बदलते सुरक्षा हालात और ओमान के सुल्तान के साथ बातचीत के बाद फ्रांस ने अपनी सैन्य तैनाती में आवश्यक बदलाव किए हैं।

चार्ल्स डी गॉल लौटेगा, लेकिन सुरक्षा अभियान जारी रहेगा

फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने बताया कि एयरक्राफ्ट कैरियर चार्ल्स डी गॉल अब अपने होम पोर्ट टूलॉन लौटेगा। हालांकि, माइन काउंटरमेजर संसाधन और उनकी सुरक्षा में तैनात युद्धपोत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ही मौजूद रहेंगे। उन्होंने कहा कि फ्रांस अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर समुद्री सुरक्षा अभियान जारी रखेगा और जरूरत के अनुसार अतिरिक्त कदम भी उठाएगा।

ब्रिटेन और फ्रांस का संयुक्त बयान

फ्रांस और ब्रिटेन ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा है और इसकी सुरक्षा बेहद जरूरी है। दोनों देशों ने यह भी बताया कि ओमान ने अपने समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर सहयोग पर सहमति जताई है।

जरूरत पड़ने पर बनेगा बहुराष्ट्रीय सैन्य मिशन

संयुक्त बयान में फ्रांस और ब्रिटेन ने कहा कि यदि क्षेत्रीय परिस्थितियां मांग करती हैं तो वे एक Multinational Military Mission तैनात करने के लिए भी तैयार हैं। दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय कानून, समुद्री नौवहन की स्वतंत्रता, क्षेत्रीय स्थिरता और सभी देशों की संप्रभुता के सम्मान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

क्यों अहम है यह फैसला?

विशेषज्ञों का मानना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फ्रांस की यह तैनाती केवल सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों को सुरक्षित रखने की व्यापक रणनीति का हिस्सा भी है। आने वाले दिनों में क्षेत्र की स्थिति के अनुसार फ्रांस और उसके सहयोगी देश अपनी सैन्य मौजूदगी में बदलाव कर सकते हैं।

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