
तिरुपति: तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) ने जून 2026 में प्रसाद वितरण का नया रिकॉर्ड बनाया है। मंदिर प्रशासन के मुताबिक, जून महीने में 1.26 करोड़ लड्डुओं की बिक्री हुई, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। पिछले साल जून की तुलना में यह बिक्री 7.5 लाख अधिक रही और इसमें 6.37 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

टीटीडी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि तिरुमाला में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए लड्डू उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई। इसके चलते पूरे महीने किसी भी श्रद्धालु को प्रसाद की कमी का सामना नहीं करना पड़ा और वितरण प्रक्रिया निर्बाध रूप से जारी रही।
दो साल में 23.5% बढ़ी लड्डुओं की बिक्री
मंदिर प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार, जून 2024 की तुलना में इस वर्ष 24 लाख से अधिक अतिरिक्त लड्डुओं की बिक्री हुई है। यानी दो वर्षों में कुल बिक्री में 23.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
इस साल अप्रैल में टीटीडी ने 1.10 करोड़ से अधिक लड्डू बेचे थे, जबकि मई में यह आंकड़ा 1.20 करोड़ के पार पहुंच गया। जून में बिक्री ने नया रिकॉर्ड बनाते हुए 1.26 करोड़ का स्तर छू लिया।
बढ़ती भीड़ के अनुसार की जा रही बेहतर योजना
टीटीडी का कहना है कि तिरुमाला में हर महीने श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है। इसे देखते हुए प्रसाद के उत्पादन, भंडारण और वितरण की बेहतर योजना बनाई जा रही है, ताकि प्रत्येक भक्त को समय पर और बिना किसी असुविधा के लड्डू प्रसाद उपलब्ध कराया जा सके।
प्रसाद की गुणवत्ता सुधारने के लिए CSIR-CFTRI से समझौता
प्रसाद की गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम ने वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद-केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिक अनुसंधान संस्थान (CSIR-CFTRI), मैसूरु के साथ समझौता किया है।
इस साझेदारी का उद्देश्य प्रसाद और मंदिर में तैयार होने वाली सभी खाद्य सामग्री को वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप तैयार करना है, ताकि सुरक्षा, गुणवत्ता और पोषण के उच्चतम मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।
इन क्षेत्रों में होगा सुधार
समझौते के तहत दोनों संस्थान मिलकर कई महत्वपूर्ण पहल करेंगे। इनमें प्रमुख रूप से—
- खरीद, निर्माण और वितरण के लिए सख्त गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली विकसित करना।
- खाद्य सामग्री के भंडारण और परीक्षण प्रक्रियाओं का आधुनिकीकरण।
- वैज्ञानिक तकनीकों के जरिए संदूषण के जोखिम को कम करना।
- प्रसाद की पैकेजिंग और शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए अनुसंधान आधारित समाधान तैयार करना।
- पारंपरिक स्वाद, गुणवत्ता और धार्मिक महत्व को बनाए रखते हुए आधुनिक खाद्य सुरक्षा मानकों को लागू करना।
श्रद्धालुओं को मिलेगा बेहतर और सुरक्षित प्रसाद
टीटीडी का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं तक सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और पारंपरिक स्वाद वाला प्रसाद पहुंचाना भी है। आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक निगरानी की मदद से मंदिर प्रशासन भविष्य में भी बढ़ती श्रद्धालु संख्या के अनुरूप प्रसाद व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में काम करता रहेगा।




