
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस नीति को आगे बढ़ाते हुए बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत 23 लोगों को व्यक्तिगत आतंकवादी (Individual Terrorist) घोषित कर दिया है। इस संबंध में गृह मंत्रालय ने 4 जुलाई 2026 को आधिकारिक गजट अधिसूचना (Gazette Notification) जारी की। सूची में शामिल अधिकांश लोग पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े बताए गए हैं। सरकार का कहना है कि ये सभी व्यक्ति लंबे समय से भारत विरोधी आतंकवादी गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं और कई बड़े आतंकी हमलों, साजिशों तथा आतंकियों के नेटवर्क को संचालित करने में इनकी भूमिका सामने आई है।

गृह मंत्रालय के अनुसार, इन व्यक्तियों के खिलाफ विभिन्न केंद्रीय और राज्य जांच एजेंसियों के पास पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। जांच में सामने आया है कि ये लोग आतंकियों की भर्ती, प्रशिक्षण, फंडिंग, हथियारों और गोला-बारूद की आपूर्ति, सीमा पार से घुसपैठ कराने और भारत में आतंकी हमलों की योजना तैयार करने जैसी गतिविधियों में शामिल रहे हैं। सरकार का मानना है कि इन लोगों को व्यक्तिगत आतंकवादी घोषित करने से आतंकवाद के नेटवर्क पर कानूनी और आर्थिक दोनों स्तर पर प्रभावी कार्रवाई की जा सकेगी।
UAPA के तहत क्या होती है कार्रवाई?
गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA भारत का प्रमुख आतंकवाद निरोधक कानून है। वर्ष 2019 में इस कानून में संशोधन के बाद केंद्र सरकार को किसी संगठन के साथ-साथ किसी व्यक्ति को भी सीधे आतंकवादी घोषित करने का अधिकार मिला। इससे पहले केवल संगठनों को आतंकवादी घोषित किया जा सकता था।
किसी व्यक्ति को UAPA के तहत आतंकवादी घोषित किए जाने के बाद उसके खिलाफ जांच एजेंसियों को व्यापक कानूनी अधिकार मिल जाते हैं। उसकी संपत्तियों को जब्त करने, वित्तीय लेन-देन पर निगरानी रखने, बैंक खातों पर कार्रवाई करने और उससे जुड़े नेटवर्क के खिलाफ सख्त कदम उठाने का रास्ता आसान हो जाता है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ऐसे व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए भारत का पक्ष मजबूत होता है।
किन गतिविधियों में शामिल होने का आरोप?
गृह मंत्रालय की अधिसूचना के मुताबिक सूची में शामिल लोगों पर कई गंभीर आरोप हैं। इनमें भारत में आतंकवादी हमलों की साजिश रचना, सीमा पार से आतंकियों की घुसपैठ कराना, आतंकियों को प्रशिक्षण देना, युवाओं की भर्ती करना, आतंकी संगठनों के लिए धन जुटाना, हथियार और विस्फोटक उपलब्ध कराना तथा विभिन्न आतंकी मॉड्यूल का संचालन करना शामिल है।
सरकार का कहना है कि इन लोगों ने सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों का इस्तेमाल कर युवाओं को कट्टरपंथ की ओर आकर्षित करने और आतंकी संगठनों से जोड़ने का भी प्रयास किया। जांच एजेंसियों के अनुसार, कई आरोपी पाकिस्तान में बैठकर भारत विरोधी गतिविधियों का संचालन कर रहे थे और सीमा पार मौजूद आतंकी लॉन्च पैड से घुसपैठ की साजिशों में शामिल थे।
कई बड़े आतंकी मामलों में सामने आए नाम
गृह मंत्रालय के अनुसार, सूची में शामिल कई आतंकियों के नाम जम्मू-कश्मीर में हुए बड़े आतंकी हमलों और साजिशों की जांच के दौरान सामने आए थे। इनमें सुनजवां सैन्य शिविर हमला, नागरोटा हमला सहित कई अन्य आतंकवादी मामलों का उल्लेख किया गया है। जांच एजेंसियों का दावा है कि इन हमलों की योजना बनाने, आतंकियों को सहायता उपलब्ध कराने या हमलों को अंजाम तक पहुंचाने में इनकी भूमिका रही है।
हालांकि प्रत्येक आरोपी की भूमिका अलग-अलग मामलों में अलग रही है, लेकिन सभी पर भारत की सुरक्षा और संप्रभुता के खिलाफ गतिविधियों में शामिल होने के आरोप हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और अन्य सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से इन मामलों की जांच कर रही थीं।
पाकिस्तान आधारित आतंकी नेटवर्क पर निशाना
सरकार का कहना है कि घोषित किए गए अधिकांश आतंकवादी पाकिस्तान में सक्रिय हैं या वहां से संचालित आतंकी संगठनों से जुड़े हुए हैं। भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान पर आतंकवाद को संरक्षण देने का आरोप लगाता रहा है। केंद्र सरकार का मानना है कि सीमा पार से संचालित आतंकवादी नेटवर्क भारत में हिंसा फैलाने की लगातार कोशिश करते रहे हैं।
गृह मंत्रालय ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई केवल सीमा तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके वित्तीय और संगठनात्मक ढांचे को भी कमजोर करना आवश्यक है। इसी रणनीति के तहत ऐसे व्यक्तियों की पहचान कर उन्हें UAPA के तहत आतंकवादी घोषित किया जा रहा है।
जांच एजेंसियों को मिलेगी कानूनी मजबूती
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी व्यक्ति को आतंकवादी घोषित करने से जांच एजेंसियों को उसके खिलाफ कार्रवाई करने में कानूनी मजबूती मिलती है। इससे उसकी संपत्तियों, आर्थिक स्रोतों और सहयोगियों पर भी प्रभावी कार्रवाई की जा सकती है। यदि कोई व्यक्ति ऐसे घोषित आतंकवादी की आर्थिक, तकनीकी या अन्य प्रकार से मदद करता है तो उसके खिलाफ भी कानून के तहत कार्रवाई संभव हो जाती है।
इसके अलावा भारत अन्य देशों के साथ कानूनी सहयोग और प्रत्यर्पण संबंधी मामलों में भी इस अधिसूचना का उपयोग कर सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ सहयोग को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति
केंद्र सरकार लगातार यह दोहराती रही है कि आतंकवाद के प्रति उसकी नीति पूरी तरह जीरो टॉलरेंस की है। पिछले कुछ वर्षों में कई आतंकी संगठनों और उनके सदस्यों के खिलाफ UAPA के तहत कार्रवाई की गई है। सरकार का कहना है कि आतंकवाद के वित्तपोषण, भर्ती नेटवर्क और सीमा पार से संचालित मॉड्यूल को खत्म करने के लिए सुरक्षा एजेंसियां लगातार अभियान चला रही हैं।
गृह मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि देश की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ काम करने वाले किसी भी व्यक्ति या संगठन के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। सरकार का उद्देश्य आतंकवाद के पूरे तंत्र को कमजोर करना और भविष्य में होने वाले हमलों को रोकना है।
गृह मंत्रालय ने जारी की पूरी सूची
गृह मंत्रालय की ओर से जारी गजट अधिसूचना में कुल 23 लोगों के नाम शामिल किए गए हैं। सरकार के अनुसार, ये सभी किसी न किसी रूप में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों से जुड़े रहे हैं। इन पर आतंकियों की भर्ती, प्रशिक्षण, फंडिंग, हथियारों की आपूर्ति, सीमा पार घुसपैठ, आतंकी हमलों की योजना तैयार करने और भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि आतंकवाद के खिलाफ उसकी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी और राष्ट्रीय सुरक्षा को चुनौती देने वाले हर व्यक्ति और संगठन के खिलाफ कानून के तहत कठोर कदम उठाए जाएंगे। गृह मंत्रालय की इस ताजा कार्रवाई को आतंकवाद के खिलाफ भारत के व्यापक अभियान का एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।




