Struggle Days : ‘अकाउंट में थे सिर्फ 84 रुपये’, गौरव गेरा ने बयां किए संघर्ष के दिन

मुंबई: अभिनेता गौरव गेरा इन दिनों अपनी चर्चित फिल्म ‘धुरंधर’ और ‘धुरंधर: द रिवेंज’ की सफलता का आनंद ले रहे हैं। फिल्मों को दर्शकों से मिली शानदार प्रतिक्रिया के बाद गौरव लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। हालांकि, सफलता के इस मुकाम तक पहुंचने का उनका सफर बिल्कुल भी आसान नहीं रहा। हाल ही में एक बातचीत के दौरान अभिनेता ने अपने संघर्ष भरे दिनों, आर्थिक तंगी और करियर के शुरुआती फैसलों को याद करते हुए कई दिलचस्प खुलासे किए।

गौरव गेरा ने बताया कि उनका परिवार फिल्म इंडस्ट्री से किसी भी तरह से जुड़ा नहीं था। ऐसे माहौल में अभिनय को करियर के रूप में चुनना उनके लिए आसान फैसला नहीं था। उन्होंने कहा कि बचपन से ही उनकी रुचि कला और रचनात्मक गतिविधियों में थी। स्कूल के दिनों में वे फंक्शन, फैंसी ड्रेस प्रतियोगिताओं और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे। हालांकि, परिवार और स्कूल में पढ़ाई को अधिक महत्व दिया जाता था।

अभिनेता ने बताया कि उन्हें कला और ड्रॉइंग जैसे विषयों में हमेशा बेहतरीन अंक मिलते थे, लेकिन वे पढ़ाई में भी अच्छे छात्र रहे। इसके बावजूद उन्हें महसूस होता था कि जिस क्षेत्र में उनकी वास्तविक रुचि और प्रतिभा है, वे उस दिशा में आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। इसी सोच के साथ उन्होंने अपने करियर की शुरुआत फैशन डिजाइनिंग से की।

गौरव ने बताया कि उन्होंने पहले कॉलेज ऑफ आर्ट्स में प्रवेश लेने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने पर्ल एकेडमी ऑफ फैशन में दाखिला लिया। कुछ समय पढ़ाई करने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि यह वह क्षेत्र नहीं है जिसमें वे अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। उन्होंने अपने पिता से साफ शब्दों में कह दिया कि महंगे कोर्स पर और पैसा खर्च करने का कोई मतलब नहीं है क्योंकि उनका मन वहां नहीं लग रहा।

गौरव के अनुसार, उनके पिता ने उन्हें जल्दबाजी में कोई फैसला लेने के बजाय कुछ समय नौकरी करने की सलाह दी। अभिनेता ने बताया कि उन्होंने करीब छह महीने तक नौकरी की और इसके बाद थिएटर का रुख किया। यहीं से उनके अभिनय करियर की असली शुरुआत हुई।

गौरव गेरा ने अपने माता-पिता के समर्थन को अपनी सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि उनके पिता आईआईटी-बीएचयू से इंजीनियर रहे हैं और उनके भाई भी सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, लेकिन परिवार ने कभी उन पर किसी विशेष पेशे को अपनाने का दबाव नहीं डाला। अभिनेता का कहना है कि यही स्वतंत्रता उन्हें अपने सपनों का पीछा करने का साहस देती रही।

मुंबई में संघर्ष के दिनों को याद करते हुए गौरव भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि एक समय ऐसा भी था जब उनके बैंक खाते में सिर्फ 84 रुपये बचे थे। आर्थिक हालात इतने कठिन थे कि वे एचडीएफसी बैंक के सामने से गुजरते हुए मजाक-मजाक में बैंक को प्रणाम करते और कहते थे कि उनका ख्याल रखा जाए। यह उनके संघर्ष और उम्मीदों का प्रतीक बन गया था।

अभिनेता ने यह भी बताया कि उनके पिता अपनी सीमित आय के बावजूद हर संभव मदद करने की कोशिश करते थे। उन्हें आज भी पिता के वे पत्र संभालकर रखने की आदत है, जिनमें लिखा होता था कि वे 2,000 रुपये भेज रहे हैं और फिलहाल इससे ज्यादा भेज पाना संभव नहीं है। गौरव के अनुसार, आर्थिक चुनौतियां जरूर थीं, लेकिन उन्होंने कभी खुद को अभावग्रस्त या असहाय महसूस नहीं होने दिया।

उन्होंने कहा कि उन दिनों पैसों की कमी जरूर थी, लेकिन कठिनाइयों से घबराने के बजाय वे परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढाल लेते थे। अगर ऑटो के पैसे नहीं होते थे तो पैदल चल लेते थे। उनका मानना था कि जीवन में हमेशा देने वाला बनना चाहिए, लेने वाला नहीं।

‘धुरंधर’ की सफलता के बाद मिली प्रशंसा और लोकप्रियता पर भी गौरव ने खुलकर बात की। जब उनसे पूछा गया कि क्या इतनी सफलता और तारीफ के बाद उनके अंदर अहंकार आया है, तो उन्होंने साफ कहा कि अब ऐसा नहीं होता। उनके मुताबिक, यदि यह सफलता उन्हें 10 साल पहले मिली होती तो शायद उनका नजरिया अलग होता, लेकिन वर्षों के संघर्ष और उतार-चढ़ाव ने उन्हें काफी कुछ सिखाया है।

 

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गौरव ने कहा कि आज वे सफलता को सिर्फ अपने काम की सराहना के रूप में देखते हैं। उनका मानना है कि मनोरंजन जगत में सफलता और असफलता दोनों अस्थायी हैं। एक दिन कोई व्यक्ति शीर्ष पर होता है और दूसरे दिन परिस्थितियां बदल सकती हैं। यही वजह है कि अब वे सफलता को विनम्रता के साथ स्वीकार करते हैं और अपने संघर्ष के दिनों को कभी नहीं भूल

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