



जानकारी के मुताबिक कानपुर नगर में नजूल विभाग की बेशकीमती सरकारी जमीनों पर कब्जा कराने और उन्हें फर्जी दस्तावेजों के जरिए बेचने का खेल लंबे समय से चल रहा था। मामले की जांच के दौरान कई बड़े नाम भी सामने आए थे। पुलिस और प्रशासन की संयुक्त जांच में यह खुलासा हुआ कि कुछ लोगों ने सरकारी अभिलेखों में हेरफेर कर फर्जी कागजात तैयार किए और नजूल की जमीनों को निजी संपत्ति बताकर बेचने का प्रयास किया।
जांच एजेंसियों के मुताबिक आरोपी रेव दीपक इस पूरे नेटवर्क का अहम सदस्य था। वह जमीनों से जुड़े फर्जी दस्तावेज तैयार कराने, खरीदारों से संपर्क कराने और सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर कराने का काम करता था। पुलिस को उसकी लंबे समय से तलाश थी।
मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने इस गिरोह से जुड़े कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था, लेकिन रेव दीपक लगातार पुलिस को चकमा देकर फरार चल रहा था। उसकी गिरफ्तारी के लिए कई टीमें बनाई गई थीं। आरोपी की गिरफ्तारी न होने पर पुलिस कमिश्नरेट ने उस पर 25 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया था।
बताया जा रहा है कि गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था और मोबाइल फोन का इस्तेमाल भी बेहद सीमित कर दिया था। वह पहचान छिपाने के लिए नाम बदलकर रह रहा था।
क्राइम ब्रांच और सर्विलांस टीम को सूचना मिली थी कि आरोपी पंजाब के अमृतसर में छिपा हुआ है। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर तंत्र की मदद से उसकी लोकेशन ट्रेस की। कानपुर पुलिस ने पंजाब पुलिस के सहयोग से अमृतसर में दबिश दी और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
सूत्रों के मुताबिक आरोपी अमृतसर में एक गुरुद्वारे के पास किराए के मकान में रह रहा था। वह किसी से ज्यादा संपर्क नहीं रखता था और गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार सतर्क रहता था।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तारी के बाद आरोपी से पूछताछ की जा रही है। शुरुआती पूछताछ में उसने कई अन्य लोगों के नाम बताए हैं, जिनकी भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस को आशंका है कि इस गिरोह में कुछ सरकारी कर्मचारी और विभागीय अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं।
डीसीपी क्राइम ने बताया कि रेव दीपक नजूल घोटाले की महत्वपूर्ण कड़ी है और उसकी गिरफ्तारी से पूरे नेटवर्क का खुलासा होने की उम्मीद है। पुलिस अब इस मामले में जुड़े अन्य फरार आरोपियों की तलाश में जुट गई है।
पुलिस और प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि आखिर सरकारी रिकॉर्ड में फर्जीवाड़ा कैसे हुआ और किन कर्मचारियों की मिलीभगत से यह पूरा खेल संचालित किया गया। जांच एजेंसियां पुराने दस्तावेजों, रजिस्ट्री रिकॉर्ड और जमीनों के स्वामित्व से जुड़े कागजातों की भी जांच कर रही हैं।
इस कार्रवाई के बाद शहर में जमीन माफियाओं और फर्जी दस्तावेजों के जरिए सरकारी जमीन हड़पने वाले गिरोहों में हड़कंप मच गया है।