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Asaram Seeks Bail Relief : आसाराम ने जेल वापसी टालने के लिए हाईकोर्ट में फिर लगाई जमानत की गुहार

जोधपुर: यौन उत्पीड़न मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे स्वयंभू संत आसाराम के लिए आज का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। राजस्थान हाईकोर्ट से मिली छह महीने की अंतरिम जमानत की अवधि समाप्त होने के बाद अब उनकी ओर से जमानत अवधि बढ़ाने की मांग की गई है। यदि अदालत आज राहत नहीं देती है, तो आसाराम को वापस जोधपुर सेंट्रल जेल में सरेंडर करना पड़ सकता है। इस मामले पर राजस्थान हाईकोर्ट में आज सुनवाई प्रस्तावित है, जिस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

आसाराम फिलहाल चिकित्सा आधार पर जेल से बाहर हैं। राजस्थान हाईकोर्ट ने 29 अक्टूबर 2025 को उनकी उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और इलाज की जरूरत को देखते हुए उन्हें छह महीने की अंतरिम जमानत दी थी। यह अवधि 29 अप्रैल 2026 को समाप्त हो रही है। ऐसे में उनके वकीलों ने अदालत में नया आवेदन दाखिल कर राहत अवधि बढ़ाने की मांग की है।बीमारी और इलाज का हवाला देकर मांगी राहत

आसाराम की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया है कि उनकी उम्र 86 वर्ष हो चुकी है और वे कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। उनके वकीलों ने अदालत को बताया कि उनका इलाज अभी जारी है और स्वास्थ्य पूरी तरह स्थिर नहीं हुआ है। ऐसे में उन्हें तुरंत जेल भेजना उचित नहीं होगा।

याचिका में विशेष रूप से यह भी उल्लेख किया गया है कि आसाराम प्रोस्टेट कैंसर समेत उम्रजनित कई स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित हैं। नियमित जांच, चिकित्सकीय निगरानी और उपचार की आवश्यकता को देखते हुए अंतरिम जमानत अवधि को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

उनके पक्ष का तर्क है कि अदालत पहले भी चिकित्सा आधार पर राहत दे चुकी है, इसलिए इलाज पूरा होने तक कुछ और समय दिया जाना न्यायसंगत होगा।

हाईकोर्ट में आज होगी सुनवाई

आसाराम की जमानत बढ़ाने संबंधी इस आवेदन पर आज राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ में सुनवाई होनी है। अदालत यह तय करेगी कि उन्हें और समय दिया जाए या फिर अंतरिम जमानत समाप्त मानते हुए वापस जेल भेजा जाए।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुनवाई कई कारणों से महत्वपूर्ण है। पहला, अदालत को चिकित्सा दस्तावेजों और मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति का मूल्यांकन करना होगा। दूसरा, यह देखना होगा कि अंतरिम जमानत का दुरुपयोग तो नहीं हुआ। तीसरा, दोषसिद्ध व्यक्ति को दी गई राहत को बढ़ाने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं या नहीं।

यदि अदालत संतुष्ट नहीं होती है, तो आसाराम को नियमानुसार जोधपुर सेंट्रल जेल में सरेंडर करना पड़ सकता है।

कैसे मिली थी छह महीने की अंतरिम जमानत?

पिछले वर्ष 29 अक्टूबर 2025 को राजस्थान हाईकोर्ट की बेंच ने आसाराम को बड़ी राहत देते हुए छह महीने की अंतरिम जमानत मंजूर की थी। उस समय अदालत ने उनकी उन्नत आयु और गंभीर बीमारी को ध्यान में रखते हुए यह आदेश दिया था।

बताया गया था कि वरिष्ठ अधिवक्ता की ओर से अदालत में यह दलील दी गई थी कि आसाराम को विशेष चिकित्सा सुविधा की आवश्यकता है, जो जेल के भीतर सीमित रूप में उपलब्ध है। इसी आधार पर अदालत ने उन्हें सीमित अवधि के लिए राहत दी थी ताकि वे उचित इलाज करा सकें।

हालांकि, इससे पहले अक्टूबर 2025 की शुरुआत में तकनीकी कारणों से उन्हें तत्काल राहत नहीं मिल सकी थी और उन्हें निजी अस्पताल से वापस जोधपुर सेंट्रल जेल लौटना पड़ा था। बाद में विस्तृत सुनवाई के बाद अदालत ने उन्हें अंतरिम जमानत दी।

मुख्य केस में फैसला सुरक्षित

आसाराम से जुड़े मुख्य मामले में राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हो चुकी है। अब अदालत का अंतिम फैसला आना बाकी है। यही कारण है कि अंतरिम जमानत का मुद्दा और भी संवेदनशील हो गया है।

जब किसी दोषसिद्ध व्यक्ति की अपील लंबित होती है और अंतिम निर्णय सुरक्षित होता है, तब अदालतें कुछ विशेष परिस्थितियों में अस्थायी राहत देती हैं। लेकिन यह राहत स्वतः स्थायी नहीं होती। हर बार अदालत को तथ्यों, मेडिकल रिकॉर्ड और परिस्थितियों के आधार पर नया निर्णय लेना पड़ता है।

इस मामले में भी अदालत को यही देखना है कि क्या वर्तमान हालात ऐसे हैं कि अंतरिम जमानत को आगे बढ़ाया जाए।

अगर राहत नहीं मिली तो क्या होगा?

यदि राजस्थान हाईकोर्ट आज जमानत अवधि बढ़ाने से इनकार कर देता है, तो आसाराम को निर्धारित प्रक्रिया के तहत वापस जोधपुर सेंट्रल जेल में आत्मसमर्पण करना होगा। अदालत आमतौर पर ऐसे मामलों में तुरंत सरेंडर का निर्देश दे सकती है या सीमित समय देकर जेल प्रशासन के समक्ष पेश होने को कह सकती है।

कानूनी रूप से, अंतरिम जमानत की अवधि समाप्त होने के बाद आरोपी या दोषसिद्ध व्यक्ति को अदालत के अगले आदेश का पालन करना अनिवार्य होता है। यदि राहत नहीं बढ़ती है, तो जेल वापसी तय मानी जाती है।

समर्थकों और विरोधियों की नजर

आसाराम से जुड़े मामलों में हर सुनवाई के दौरान समर्थकों और विरोधियों दोनों की नजर रहती है। समर्थक जहां स्वास्थ्य आधार पर राहत की मांग को उचित बताते हैं, वहीं विरोधी पक्ष कानून के समान अनुपालन और सजा के पालन की बात उठाते हैं।

यही वजह है कि अदालत का हर आदेश चर्चा का विषय बनता है। इस बार भी फैसला केवल एक व्यक्ति की जमानत तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि यह इस बात का संकेत भी होगा कि अदालत चिकित्सा आधार पर दी गई राहत को किस दृष्टि से देखती है।

आज का दिन क्यों अहम?

आज की सुनवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह केवल अंतरिम जमानत की अवधि बढ़ाने का मामला नहीं है, बल्कि अदालत को उम्र, बीमारी, सजा, लंबित अपील और न्यायिक संतुलन जैसे कई पहलुओं पर विचार करना होगा।

यदि राहत मिलती है, तो आसाराम कुछ और समय तक जेल से बाहर रहकर इलाज जारी रख सकेंगे। यदि राहत नहीं मिलती, तो उन्हें फिर से जोधपुर सेंट्रल जेल लौटना होगा।

सबकी नजर फैसले पर

फिलहाल सभी की निगाहें राजस्थान हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत का फैसला यह तय करेगा कि आसाराम को इलाज के लिए और मोहलत मिलती है या उनकी अंतरिम जमानत समाप्त मानते हुए उन्हें जेल लौटना पड़ेगा।

कानूनी, सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से यह मामला लंबे समय से चर्चाओं में रहा है। ऐसे में आज का आदेश आने वाले समय में भी काफी अहम माना जाएगा।

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