उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ स्थित राजा महेंद्र प्रताप यूनिवर्सिटी एक बार फिर विवादों में घिर गई है। इस बार मामला परीक्षा केंद्र आवंटन में कथित घोटाले का है, जिसने छात्रों और महाविद्यालय संचालकों के बीच भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। आरोप है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने नियमों की अनदेखी कर मनमाने ढंग से परीक्षा केंद्र बांटे हैं और इसमें पारदर्शिता की कमी साफ नजर आ रही है।
सबसे बड़ा आरोप यह है कि योगी आदित्यनाथ के स्पष्ट निर्देशों की भी अनदेखी की गई है। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री ने परीक्षा केंद्र 20 किलोमीटर के दायरे में रखने के आदेश दिए थे, ताकि छात्रों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। लेकिन इसके बावजूद कई सेंटर 40 से 50 किलोमीटर दूर तक आवंटित कर दिए गए, जिससे छात्र-छात्राओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
विवाद का दूसरा बड़ा पहलू अतरौली क्षेत्र से जुड़ा है, जहां एक ऐसे कॉलेज को परीक्षा केंद्र बनाया गया है, जिस पर पहले नकल कराने के आरोप लग चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस कॉलेज को करीब 1400 अतिरिक्त छात्र आवंटित कर दिए गए हैं। इतना ही नहीं, ऐसे कई अन्य संदिग्ध संस्थानों को भी एक से अधिक सेंटर दिए जाने की बात सामने आ रही है, जिससे यूनिवर्सिटी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
वहीं दूसरी ओर, कई ऐसे कॉलेज जिनका रिकॉर्ड पूरी तरह साफ-सुथरा रहा है और जो वर्षों से निष्पक्ष परीक्षा कराते आए हैं, उन्हें इस बार केंद्र से वंचित कर दिया गया। इससे ईमानदार संस्थानों के संचालकों में नाराजगी है और वे इसे अन्यायपूर्ण निर्णय बता रहे हैं।
छात्रों की समस्याएं भी कम नहीं हैं। दूर-दराज के केंद्र मिलने और अंतिम समय में बदलाव किए जाने से छात्र-छात्राएं परेशान हैं। आरोप है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा सही और समय पर जानकारी नहीं दी जा रही, जिससे भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
सूत्रों के हवाले से यह भी चर्चा है कि करीब 14 परीक्षा केंद्र ऐसे हैं जिन्हें नियमों को दरकिनार कर ‘उपहार’ के तौर पर दिया गया है। कैंपस में ‘मिठाई खिलाओ, सेंटर पाओ’ जैसी चर्चाएं भी जोर पकड़ रही हैं, जो पूरे मामले को और संदिग्ध बनाती हैं।
इस पूरे प्रकरण ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—आखिर नकल के आरोप झेल चुके संस्थानों को दोबारा केंद्र क्यों दिए गए? मुख्यमंत्री के निर्देशों की अनदेखी किसके इशारे पर की गई? और ईमानदार कॉलेजों को दरकिनार कर किन्हें फायदा पहुंचाया जा रहा है?
छात्र संगठनों और महाविद्यालय संचालकों ने इस कथित ‘सेंटर घोटाले’ की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई, तो आंदोलन तेज किया जाएगा।
फिलहाल, इस पूरे मामले पर यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से कोई ठोस जवाब सामने नहीं आया है, लेकिन बढ़ते विवाद के बीच सभी की नजरें अब प्रशासनिक कार्रवाई और संभावित जांच पर टिकी हैं।
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