Kanpur में आयोजित यूपी B.Ed संयुक्त प्रवेश परीक्षा के दौरान शनिवार को एक गंभीर हादसा हो गया, जिसने परीक्षा केंद्रों के आसपास की बुनियादी सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना H.N. Mishra P.G. College के पास स्थित परीक्षा केंद्र के बाहर उस समय हुई जब बड़ी संख्या में अभ्यर्थी और उनके परिजन दस्तावेजों की फोटोकॉपी कराने के लिए सड़क किनारे मौजूद दुकानों के बाहर खड़े थे।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अचानक एक पुराना और कमजोर हो चुका कंक्रीट स्लैब, जो सीवेज नाले को ढकने के लिए बनाया गया था, तेज आवाज के साथ धंस गया। देखते ही देखते उस पर खड़े लगभग 20 से अधिक लोग सीधे गंदे नाले में गिर गए। अचानक हुई इस घटना से मौके पर अफरा-तफरी मच गई और चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मदद के लिए दौड़ पड़े।
हादसे का पूरा घटनाक्रम
सुबह के समय परीक्षा केंद्रों के बाहर अभ्यर्थियों की भारी भीड़ मौजूद थी। परीक्षा में शामिल होने के लिए छात्रों के साथ उनके माता-पिता और अभिभावक भी पहुंचे थे। कई लोग परीक्षा से पहले अंतिम समय में दस्तावेजों की फोटोकॉपी, फोटो और अन्य औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए पास की दुकानों के बाहर खड़े थे।
इसी दौरान, सड़क किनारे बना पुराना सीवेज कवर स्लैब, जो पहले से ही जर्जर स्थिति में बताया जा रहा है, अचानक टूट गया। स्लैब के नीचे मौजूद गहरा नाला खुल गया और उस पर खड़े लोग सीधे उसमें गिर पड़े। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कुछ लोग पूरी तरह पानी और गंदगी में डूब गए, जबकि कुछ लोग आधे-अधूरे फंसे रह गए जिन्हें आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत बाहर निकाला।

घायलों की स्थिति और राहत कार्य
इस हादसे में कम से कम 4 अभ्यर्थियों को गंभीर चोटें आई हैं, जबकि कई अन्य लोगों को हल्की चोटें और संक्रमण जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा है। गिरने के दौरान कई लोगों के मोबाइल फोन, बैग, एडमिट कार्ड और जरूरी परीक्षा दस्तावेज भी पानी में भीगकर खराब हो गए, जिससे उनकी परीक्षा प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
स्थानीय लोगों और दुकानदारों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया और पुलिस व प्रशासन को सूचना दी। कुछ ही समय में राहत दल मौके पर पहुंचा और घायलों को नाले से बाहर निकालकर नजदीकी अस्पतालों में भेजा गया। डॉक्टरों के अनुसार, घायलों की हालत फिलहाल स्थिर है, लेकिन कुछ को संक्रमण और चोटों के कारण निगरानी में रखा गया है।
परीक्षा केंद्रों के बाहर अव्यवस्था पर सवाल
यह घटना एक बार फिर परीक्षा केंद्रों के आसपास की अव्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों की कमी को उजागर करती है। बड़ी परीक्षाओं के दौरान हजारों अभ्यर्थी एक साथ विभिन्न केंद्रों पर पहुंचते हैं, जिससे भीड़ और दबाव काफी बढ़ जाता है। ऐसे में अगर बुनियादी ढांचे की स्थिति कमजोर हो तो दुर्घटनाओं की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नाले पर बना यह स्लैब काफी समय से जर्जर हालत में था और कई बार इसकी मरम्मत की मांग की गई थी, लेकिन संबंधित विभागों द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। परिणामस्वरूप, परीक्षा जैसे महत्वपूर्ण दिन पर यह हादसा हो गया।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
घटना के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि स्लैब पुराना था और उस पर क्षमता से अधिक भार पड़ने के कारण वह टूट गया। अधिकारियों ने संबंधित विभाग को जांच के आदेश दे दिए हैं और जिम्मेदारी तय करने की बात कही है।
इसके अलावा, परीक्षा केंद्र प्रबंधन से भी रिपोर्ट मांगी गई है कि आखिर सुरक्षा मानकों के बावजूद ऐसी स्थिति कैसे बनी रही। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि घायलों के इलाज का पूरा खर्च सरकार द्वारा वहन किया जाएगा और जिन छात्रों के दस्तावेज नष्ट हुए हैं, उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार किया जाएगा।
छात्रों और अभिभावकों की परेशानी
हादसे के बाद कई अभ्यर्थी मानसिक तनाव में दिखे। कुछ छात्रों के एडमिट कार्ड और पहचान पत्र नष्ट हो जाने के कारण उन्हें परीक्षा देने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। अभिभावकों ने आरोप लगाया कि परीक्षा केंद्रों के आसपास न तो पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था थी और न ही भीड़ नियंत्रण के उचित इंतजाम।
एक अभ्यर्थी के पिता ने बताया कि वे सिर्फ फोटोकॉपी कराने के लिए वहां खड़े थे, लेकिन अचानक स्लैब टूटने से सब कुछ पानी में चला गया। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह प्रशासनिक लापरवाही का मामला है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठते सवाल
इस घटना ने शहर में चल रही बड़ी परीक्षाओं के दौरान सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा केंद्रों के आसपास केवल भीड़ नियंत्रण ही नहीं, बल्कि आसपास के बुनियादी ढांचे की भी नियमित जांच होनी चाहिए। जर्जर नालों, टूटे फुटपाथों और कमजोर स्लैब जैसी समस्याएं अक्सर नजरअंदाज कर दी जाती हैं, जो ऐसे हादसों का कारण बनती हैं।
भविष्य के लिए सबक
यह हादसा प्रशासन और संबंधित विभागों के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि किसी भी सार्वजनिक स्थान, खासकर जहां बड़े पैमाने पर भीड़ इकट्ठा होती है, वहां बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। नियमित निरीक्षण, मरम्मत और जोखिम मूल्यांकन की व्यवस्था न होने से इस तरह की घटनाएं दोबारा भी हो सकती हैं।
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