
औरैया जिले के दिबियापुर क्षेत्र स्थित फफूंद रेलवे स्टेशन की बदहाल स्थिति अब पूरी तरह उजागर हो चुकी है। यह स्टेशन, जो आसपास के दर्जनों गांवों और कस्बों के लिए आवागमन का प्रमुख केंद्र है, आज मूलभूत सुविधाओं के अभाव में यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि यहां ट्रेन ठहराव की जानकारी देने वाला बोर्ड तक सही हालत में नहीं है, जिससे यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

कागज़ों के भरोसे चल रही व्यवस्था
फफूंद रेलवे स्टेशन पर ट्रेन ठहराव की जानकारी देने के लिए किसी स्थायी और मजबूत बोर्ड की व्यवस्था नहीं है। इसके बजाय, स्टेशन प्रशासन ने कागज़ के टुकड़ों पर ट्रेनों के नंबर और नाम लिखकर उन्हें बोर्ड पर चिपका दिया है। ये कागज़ कभी हवा में उड़ जाते हैं, तो कभी बारिश या धूल के कारण फट जाते हैं। परिणामस्वरूप, यात्रियों को यह समझना मुश्किल हो जाता है कि कौन-सी ट्रेन यहां रुकती है और कौन-सी नहीं।
यात्रियों के अनुसार, कई बार वे स्टेशन पर घंटों इंतजार करते रहते हैं, लेकिन सही जानकारी के अभाव में उनकी ट्रेन छूट जाती है। यह स्थिति खासतौर पर उन यात्रियों के लिए अधिक गंभीर हो जाती है, जो पहली बार इस स्टेशन पर आते हैं या जिन्हें स्थानीय जानकारी नहीं होती।
सूचना व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त
फफूंद रेलवे स्टेशन पर न तो कोई आधुनिक डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड मौजूद है और न ही स्पष्ट और व्यवस्थित सूचना प्रणाली। स्टेशन पर लगे पुराने बोर्ड भी जर्जर अवस्था में हैं और उन पर लिखी जानकारी पढ़ पाना मुश्किल है। ऐसे में यात्रियों को इधर-उधर भटककर जानकारी जुटानी पड़ती है।
बुजुर्ग, महिलाएं और दिव्यांग यात्री इस अव्यवस्था से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। कई यात्रियों ने बताया कि उन्हें ट्रेन के बारे में जानकारी पाने के लिए स्टेशन पर मौजूद कर्मचारियों या अन्य यात्रियों पर निर्भर रहना पड़ता है, जो हर समय संभव नहीं होता।
पहले से कम ट्रेन ठहराव, ऊपर से अव्यवस्था
स्थानीय लोगों का कहना है कि फफूंद रेलवे स्टेशन पर पहले ही ट्रेनों के ठहराव की संख्या बेहद कम है। जो कुछ ट्रेनें यहां रुकती भी हैं, उनकी जानकारी तक स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं है। इससे यात्रियों की परेशानियां और बढ़ जाती हैं।
यह स्टेशन दिबियापुर, औरैया और आसपास के कई गांवों के लिए जीवनरेखा के समान है। रोज़ाना सैकड़ों लोग यहां से नौकरी, शिक्षा, व्यापार और अन्य कार्यों के लिए यात्रा करते हैं। इसके बावजूद रेलवे प्रशासन द्वारा इस स्टेशन की अनदेखी करना गंभीर चिंता का विषय है।
जनप्रतिनिधियों की पहल भी बेअसर
स्थानीय सांसद गीता शाक्य ने भी इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर फफूंद रेलवे स्टेशन पर छह ट्रेनों के ठहराव की मांग की थी। हालांकि, अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
इससे स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि जब जनप्रतिनिधियों की मांगों को भी नजरअंदाज किया जा रहा है, तो आम जनता की समस्याओं का समाधान कैसे होगा।
यात्रियों में आक्रोश, रेलवे पर उठ रहे सवाल
रेलवे प्रशासन की इस लापरवाही को लेकर यात्रियों और स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश है। उनका कहना है कि जब एक साधारण सूचना बोर्ड तक सही ढंग से नहीं लगाया जा सकता, तो अन्य सुविधाओं की उम्मीद करना बेकार है।
कई यात्रियों ने यह भी कहा कि इस तरह की अव्यवस्था न केवल असुविधाजनक है, बल्कि यह यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकती है। गलत जानकारी के कारण यात्री जल्दबाजी में ट्रेन पकड़ने की कोशिश करते हैं, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है।
तत्काल सुधार की मांग
स्थानीय नागरिकों और यात्रियों ने रेलवे प्रशासन से मांग की है कि फफूंद रेलवे स्टेशन पर जल्द से जल्द एक पक्का, बड़ा और स्पष्ट सूचना बोर्ड लगाया जाए। इसके साथ ही, डिजिटल डिस्प्ले की भी व्यवस्था की जाए, ताकि यात्रियों को सटीक और समय पर जानकारी मिल सके।
इसके अलावा, स्टेशन पर रुकने वाली ट्रेनों की संख्या बढ़ाने की भी मांग की जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि इस स्टेशन को बेहतर सुविधाएं दी जाएं, तो यह क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।




