हाटा (कुशीनगर)। उत्तर प्रदेश में आवारा पशुओं की समस्या एक बार फिर एक किसान की जान ले बैठी। हाटा कोतवाली क्षेत्र के ग्राम भिस्वा बाजार में खेत में काम कर रहे दो किसानों पर करीब 20 आवारा पशुओं के उग्र झुंड ने हमला कर दिया। इस दर्दनाक घटना में 45 वर्षीय किसान मल्लू प्रजापति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 62 वर्षीय किसान मिट्ठू यादव गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद पूरे गांव में मातम और गुस्से का माहौल है। ग्रामीणों ने प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाते हुए ठोस कार्रवाई की मांग की है।

फसल बचाने की कोशिश में गई जान
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मल्लू प्रजापति और मिट्ठू यादव अपने खेत में काम कर रहे थे। इस दौरान अचानक बड़ी संख्या में आवारा पशु खेत में घुस आए और फसल को नुकसान पहुंचाने लगे। दोनों किसान फसल बचाने के लिए पशुओं को खदेड़ने लगे, लेकिन तभी पशुओं का झुंड उग्र हो गया। करीब 20 पशुओं ने मिलकर दोनों किसानों पर हमला कर दिया।
ग्रामीणों ने बताया कि पशुओं ने सींग और खुरों से बुरी तरह हमला किया, जिससे दोनों किसान जमीन पर गिर पड़े। मल्लू प्रजापति को गंभीर चोटें आईं और उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि मिट्ठू यादव की हालत नाजुक बनी हुई है।
ग्रामीणों ने बचाई जान, लेकिन देर हो चुकी थी
हमले की सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और किसी तरह पशुओं को भगाया। इसके बाद दोनों घायलों को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) हाटा ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने मल्लू प्रजापति को मृत घोषित कर दिया, जबकि मिट्ठू यादव का प्राथमिक उपचार कर हालत गंभीर होने पर निगरानी में रखा गया।
पुलिस ने संभाला मोर्चा
घटना की जानकारी मिलते ही हाटा कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और ग्रामीणों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।
प्रशासन मौके पर, परिजनों को मिला आश्वासन
घटना की गंभीरता को देखते हुए मौके पर जया सिंह, तहसीलदार हाटा, अस्पताल पहुंचीं। उन्होंने मृतक के परिजनों से मुलाकात कर ढांढस बंधाया और शासन स्तर से हरसंभव सहायता दिलाने का भरोसा दिया। तहसीलदार ने कहा कि यह घटना बेहद दुखद है और इसकी पूरी जांच कराई जाएगी।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट तलब करते हुए यह भी स्पष्ट किया कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में आवारा पशु गांव और खेतों तक कैसे पहुंच गए।
बीडीओ पर लापरवाही के आरोप
घटना के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। ग्रामीणों ने विकास खंड कार्यालय और विशेष रूप से बीडीओ पर गंभीर आरोप लगाए। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार आवारा पशुओं की समस्या को लेकर शिकायत की गई, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। न तो गौशालाओं की व्यवस्था दुरुस्त की गई और न ही पशुओं को पकड़ने के लिए कोई ठोस अभियान चलाया गया।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सरकार की मंशा के विपरीत, जमीनी स्तर पर अधिकारी लापरवाही बरत रहे हैं, जिसका खामियाजा किसानों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है।
तहसीलदार ने मांगा स्पष्टीकरण
तहसीलदार जया सिंह ने घटना को गंभीर मानते हुए बीडीओ से स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने पूछा है कि क्षेत्र में आवारा पशुओं की रोकथाम के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए और इतनी बड़ी संख्या में पशु एक साथ कैसे खेतों तक पहुंच गए। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस मामले में संबंधित कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जा सकती है।
गांव में मातम और आक्रोश
मल्लू प्रजापति की मौत से गांव में शोक की लहर है। मृतक के घर में कोहराम मचा हुआ है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों का कहना है कि मल्लू प्रजापति मेहनती किसान थे और परिवार की आजीविका का एकमात्र सहारा थे। अब उनके परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
प्रदेश में बढ़ती आवारा पशुओं की समस्या
यह घटना कोई पहली नहीं है। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में आवारा पशुओं के हमले और फसल नुकसान की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। किसान अपनी फसल बचाने के लिए रात-दिन खेतों की रखवाली करने को मजबूर हैं। कई जगहों पर किसानों पर हमले में गंभीर चोटें और मौत तक की घटनाएं हो चुकी हैं।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि
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आवारा पशुओं को पकड़ने के लिए तत्काल अभियान चलाया जाए
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गौशालाओं की व्यवस्था दुरुस्त की जाए
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मृतक किसान के परिवार को पर्याप्त मुआवजा और सरकारी सहायता दी जाए
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दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसी घटनाएं दोबारा हो सकती हैं।
सवालों के घेरे में प्रशासन
इस घटना ने एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। सरकार जहां किसानों की आय दोगुनी करने और उनकी सुरक्षा की बात कर रही है, वहीं जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आ रही है। आवारा पशुओं की समस्या पर ठोस नीति और प्रभावी क्रियान्वयन की जरूरत है, ताकि भविष्य में किसी और किसान को अपनी जान न गंवानी पड़े।
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