बाइडन इस्राइल पहुंचकर हिजबुल्ला और ईरान को यह साफ संदेश देंगे कि हमास के साथ संघर्ष में इस्राइल अकेला नहीं है। अगर हिजबुल्ला और ईरान किसी तरह का दुस्साहस करेंगे, तो अमेरिका उनके खिलाफ मोर्चा खोल सकता है। इसके अलावा बंधकों की रिहाई को भी बाइडन के पहुंचने से बल मिलेगा।
इस्राइल और फलस्तीनी आतंकी संगठन हमास के बीच चल रहे संघर्ष पर सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल संजय कुलकर्णी ने बड़ा दिया है। उनका कहना है कि गाजा में कई कमांडरों के मारे जाने के बाद हमास बैकफुट पर है और बंधकों को मेहमान बताकर छोड़ने की बात कर रहा है। रक्षा विशेषज्ञ कुलकर्णी ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन का इस्राइली दौरा हमास के ताबूत में आखिरी कील साबित होगा, क्योंकि वे खुलकर हमास का समूल नाश को जरूरी बता चुके हैं और इसके लिए इस्राइल को जो भी चाहिए मुहैया कराएंगे।
हमास के साथ संघर्ष में इस्राइल अकेला नहीं
उन्होंने कहा कि बाइडन इस्राइल पहुंचकर हिजबुल्ला और ईरान को यह साफ संदेश देंगे कि हमास के साथ संघर्ष में इस्राइल अकेला नहीं है। अगर हिजबुल्ला और ईरान किसी तरह का दुस्साहस करेंगे, तो अमेरिका उनके खिलाफ मोर्चा खोल सकता है। इसके अलावा बंधकों की रिहाई को भी बाइडन के पहुंचने से बल मिलेगा। बंधकों के रिहा होने के बाद हमास के पास बचाव के लिए कुछ भी नहीं रह जाएगा। ऐसे में हमास की रणनीति यही रहेगी कि फिलहाल हथियार डाल दिए जाएं और भविष्य में फिर से अपनी शक्ति जुटाए।
संक्षिप्त युद्धविराम संभव
बता दें, सोमवार को मिस्र द्वारा एक समझौते के तहत मानवीय सहायता की बात कही थी, लेकिन इस्राइली सेना ने युद्धविराम की किसी भी संभावना से इन्कार कर दिया था। हालांकि अब माना जा रहा है कि सक्षिप्त मानवीय युद्धविराम संभव है। इस दौरान राफा सीमा पर मदद पहुंचाई जाएगी।
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