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US Warship : 96 मिसाइल लॉन्च सेल वाला अमेरिकी युद्धपोत अलास्का पहुंचा, रूस के पास बढ़ी हलचल

रूस के करीब पहुंचा अमेरिका का घातक युद्धपोत, 96 मिसाइलों से लैस USS Ted Stevens अलास्का पहुंचा

नई दिल्ली: रूस और अमेरिका के बीच आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच अमेरिकी नौसेना का अत्याधुनिक युद्धपोत यूएसएस टेड स्टीवंस (DDG-128) अलास्का पहुंच गया है। यह जहाज ऐसे समय में व्हिटियर पहुंचा है, जब अमेरिका और रूस दोनों ही आर्कटिक इलाके में अपनी सैन्य मौजूदगी और रणनीतिक गतिविधियां बढ़ा रहे हैं। जहाज की मौजूदगी ने इस क्षेत्र को लेकर सामरिक हलचल और बढ़ा दी है। हालांकि, इसे सीधे रूस के खिलाफ किसी विशेष सैन्य अभियान से जोड़ना फिलहाल सही नहीं होगा।

96 वर्टिकल लॉन्च सेल से लैस है युद्धपोत

यूएसएस टेड स्टीवंस आर्ले बर्क-क्लास गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर है। इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी मिसाइल क्षमता और अत्याधुनिक सेंसर सिस्टम हैं। जहाज में कुल 96 एमके-41 वर्टिकल लॉन्च सेल मौजूद हैं। इन सेल के जरिए अलग-अलग प्रकार की मिसाइलें दागी जा सकती हैं। इनमें क्रूज मिसाइलों के साथ-साथ वायु रक्षा और अन्य मिसाइल प्रणालियां शामिल हो सकती हैं।

हालांकि, किसी खास समय पर जहाज में कौन-कौन सी मिसाइलें तैनात हैं, इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती। इसलिए केवल 96 लॉन्च सेल होने के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि जहाज में इस समय 96 मिसाइलें ही मौजूद हैं।

SPY-6 रडार बनाता है इसे और खतरनाक

इस युद्धपोत पर अमेरिकी नौसेना का AN/SPY-6(V)1 एयर एंड मिसाइल डिफेंस रडार लगाया गया है। यह रडार हवा में मौजूद संभावित खतरों और मिसाइलों की पहचान तथा निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इसके अलावा जहाज में एजिस बेसलाइन-10 कॉम्बैट सिस्टम भी मौजूद है। यह सिस्टम रडार और दूसरे सेंसर से मिलने वाली सूचनाओं को एकीकृत करके युद्धपोत के आसपास मौजूद खतरों का आकलन करने में मदद करता है। यही वजह है कि यूएसएस टेड स्टीवंस को आधुनिक अमेरिकी नौसेना के महत्वपूर्ण मिसाइल डिफेंस प्लेटफॉर्म में गिना जा रहा है।

रूस के लिए क्यों अहम है अलास्का?

अलास्का की भौगोलिक स्थिति इस पूरे घटनाक्रम को खास बनाती है। अमेरिका के अलास्का और रूस के बीच बेरिंग स्ट्रेट स्थित है। इसके दूसरी तरफ रूस का चुकची प्रायद्वीप और रूस का सुदूर पूर्वी क्षेत्र आता है।

यही वजह है कि अलास्का के आसपास अमेरिकी नौसैनिक गतिविधियों को रूस के फार ईस्ट और आर्कटिक क्षेत्र के संदर्भ में रणनीतिक महत्व दिया जाता है। हालांकि, इसका यह अर्थ नहीं है कि यूएसएस टेड स्टीवंस रूस के सभी सैन्य ठिकानों को सीधे निशाना बनाने की स्थिति में अलास्का पहुंचा है। रूस के उत्तरी बेड़े से जुड़े प्रमुख सैन्य इलाके कोला प्रायद्वीप में हैं, जो बेरिंग स्ट्रेट से काफी दूर हैं।

3 अक्टूबर को होगी आधिकारिक कमीशनिंग

यूएसएस टेड स्टीवंस 27 सितंबर 2026 को अलास्का के व्हिटियर पहुंचा। अमेरिकी नौसेना के कार्यक्रम के मुताबिक इसकी आधिकारिक कमीशनिंग 3 अक्टूबर को व्हिटियर में होगी। इसके बाद इसका निर्धारित होमपोर्ट नॉरफोक, वर्जीनिया होगा।

इसका मतलब है कि फिलहाल अलास्का में जहाज की मौजूदगी को स्थायी तैनाती नहीं माना जा सकता। इसके बावजूद आर्कटिक क्षेत्र में अमेरिका और रूस के बीच बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच इस अत्याधुनिक विध्वंसक का यहां पहुंचना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आर्कटिक में बढ़ रही रणनीतिक प्रतिस्पर्धा

आर्कटिक अब सिर्फ बर्फीला और दुर्गम इलाका नहीं रह गया है। बदलते रणनीतिक समीकरणों के कारण यह क्षेत्र अमेरिका और रूस दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण बनता जा रहा है। समुद्री मार्गों, सैन्य निगरानी और रणनीतिक स्थिति के कारण यहां दोनों देशों की गतिविधियां लगातार ध्यान खींच रही हैं।

ऐसे माहौल में 96 लॉन्च सेल, आधुनिक रडार और अत्याधुनिक युद्ध प्रबंधन प्रणाली से लैस यूएसएस टेड स्टीवंस का अलास्का पहुंचना अमेरिका की बढ़ती नौसैनिक क्षमता और आर्कटिक पर उसके रणनीतिक फोकस का संकेत जरूर देता है। लेकिन फिलहाल इसे रूस के खिलाफ किसी तत्काल हमले या विशेष ऑपरेशन की तैयारी बताना जल्दबाजी होगी।

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