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Flood Crisis : मानसून विदा फिर भी यूपी बिहार में बाढ़ का कहर, नदियां उफनीं, हजारों परिवार प्रभावित

मानसून की विदाई के बाद भी यूपी-बिहार में बाढ़ का कहर, नदियां उफान पर और हजारों परिवार प्रभावित

उत्तर प्रदेश और बिहार में मानसून की विदाई हो चुकी है, लेकिन बाढ़ का संकट अभी खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। बारिश थमने के बावजूद नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। कई जगहों पर बांध और तटबंधों से छोड़े गए पानी ने हालात और गंभीर कर दिए हैं। उत्तर प्रदेश में जहां कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, वहीं बिहार के कई जिलों में गंडक नदी ने भारी तबाही मचा रखी है। गांवों में पानी घुसने से हजारों परिवारों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है।

यूपी में बारिश बंद, फिर भी बाढ़ का खतरा बरकरार

उत्तर प्रदेश में मानसून अपने निर्धारित समय से करीब दो दिन पहले 3 अक्टूबर को विदा हो गया। पिछले दो-तीन दिनों से प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में बारिश नहीं हुई है, लेकिन नदियों में बढ़ता जलस्तर प्रशासन और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा रहा है। बांधों से छोड़े गए पानी के कारण प्रदेश की करीब 10 नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।

लखनऊ, गोंडा, बाराबंकी, लखीमपुर खीरी और कानपुर समेत करीब 11 जिले बाढ़ की चपेट में बताए जा रहे हैं। राजधानी लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से नदी के आसपास के निचले इलाकों में पानी भर गया है।

फैजुल्लागंज में नावों से पहुंच रहे लोग

लखनऊ के फैजुल्लागंज इलाके में बाढ़ की स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। कई इलाकों में सड़कें पानी में डूब चुकी हैं और लोगों को आने-जाने के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान के लिए करीब 30 नावें लगाई हैं। प्रभावित लोगों तक भोजन, पानी और अन्य जरूरी सामान पहुंचाने का काम भी जारी है।

बाढ़ का पानी कई घरों के निचले हिस्से तक पहुंच गया है। बड़ी संख्या में परिवारों को ग्राउंड फ्लोर खाली कर ऊपरी मंजिलों पर जाना पड़ा है। कई परिवार सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर चुके हैं। स्थानीय स्तर पर हजारों घरों और बड़ी आबादी के प्रभावित होने की बात सामने आ रही है।

शारदा नदी के कटान से बढ़ी दहशत

लखीमपुर खीरी में शारदा नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ कटान भी तेज हो गया है। नदी किनारे बसे इलाकों में जमीन लगातार कट रही है और कई पेड़ तथा मकान नदी में समा चुके हैं। गांवों में रहने वाले लोगों के बीच डर का माहौल है।

कानपुर में भी गंगा का जलस्तर चेतावनी के स्तर तक पहुंच गया है। नदी का पानी प्रमुख घाटों तक पहुंचने के बाद आसपास के इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी गई है।

सामान्य से ज्यादा बारिश बनी बड़ी वजह

इस साल उत्तर प्रदेश में मानसून ने करीब 12 दिन की देरी से 30 जून को दस्तक दी थी। हालांकि मानसून 3 अक्टूबर को सामान्य समय से पहले लौट गया, लेकिन पूरे सीजन में प्रदेश में सामान्य से करीब 8 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा पहाड़ी और ऊपरी क्षेत्रों में हुई बारिश तथा बांधों से छोड़े गए पानी का असर अब निचले इलाकों में दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि बारिश बंद होने के बाद भी नदियों का जलस्तर तुरंत नीचे नहीं आया है।

बिहार में गंडक नदी ने मचाई तबाही

उत्तर प्रदेश की तरह बिहार में भी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। राज्य के मुजफ्फरपुर, सारण, पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज और दरभंगा समेत छह जिले प्रभावित हैं। गंडक नदी के उफान और कुछ जगहों पर तटबंध टूटने के कारण करीब 255 गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है।

करीब चार लाख लोगों के प्रभावित होने की जानकारी है, जबकि लगभग 44 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। कई इलाकों में सड़कें जलमग्न होने के कारण नावों के जरिए राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है।

सारण के मकेर, परसा, पानापुर और अमनौर में बाढ़ के पानी में डूबने से 12 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि 20 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं। उनकी तलाश के लिए एनडीआरएफ और स्थानीय बचाव दल अभियान चला रहे हैं। गोपालगंज के शीतलपुर में तटबंध टूटने के बाद ग्रामीण इलाकों में पानी फैलने से संकट और गहरा गया है।

कुल मिलाकर मानसून की विदाई के बावजूद यूपी और बिहार में बाढ़ का संकट इसलिए बना हुआ है क्योंकि नदियों में पहले से मौजूद अतिरिक्त पानी, बांधों से छोड़ा गया पानी और लगातार बढ़ता जलस्तर निचले इलाकों में तबाही मचा रहा है। प्रशासन की ओर से राहत और बचाव अभियान जारी है, लेकिन कई इलाकों में लोगों की मुश्किलें अभी भी बनी हुई हैं।

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