Trump’s Warning : हिजबुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई पर इजरायल से नाराज दिखे ट्रंप, दिया बड़ा बयान

वॉशिंगटन/पेरिस: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल की सैन्य कार्रवाई को लेकर खुलकर नाराजगी जताई है। ट्रंप ने कहा कि इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच जारी संघर्ष जरूरत से ज्यादा लंबा खिंच गया है, जिससे बड़ी संख्या में लोगों की जान जा रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस पूरे मामले को संभालने की जिम्मेदारी सीरिया को दी जानी चाहिए, क्योंकि उनके अनुसार सीरिया इस चुनौती से अधिक प्रभावी ढंग से निपट सकता है।

फ्रांस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने इजरायल की रणनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि किसी एक लक्ष्य को निशाना बनाने के लिए बार-बार पूरी इमारतों को ध्वस्त करना उचित नहीं है, खासकर तब जब उन इमारतों में बड़ी संख्या में आम नागरिक रहते हों।

इजरायल की सैन्य रणनीति पर उठाए सवाल

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हिजबुल्लाह के खिलाफ चल रही लड़ाई में आम नागरिकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि आतंकवादी संगठन के कुछ सदस्यों को निशाना बनाने के लिए पूरे रिहायशी इलाकों को तबाह करना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता।

ट्रंप के मुताबिक, जब किसी विशेष व्यक्ति या समूह की तलाश हो तो उसके लिए पूरे अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स या रिहायशी भवनों को नष्ट करने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसी इमारतों में रहने वाले सभी लोग हिजबुल्लाह से जुड़े नहीं होते और निर्दोष नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

अमेरिकी राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है जब लेबनान में इजरायल की सैन्य गतिविधियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो गई है। कई मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने भी नागरिक क्षेत्रों में हो रहे हमलों पर चिंता व्यक्त की है।

ईरान के साथ संभावित समझौते पर पड़ रहा असर

ट्रंप ने यह भी दावा किया कि हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल की मौजूदा रणनीति का असर अमेरिका और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक प्रक्रिया पर भी पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में बढ़ती हिंसा से उस बड़े समझौते को नुकसान पहुंच सकता है, जिस पर लंबे समय से बातचीत चल रही है।

ट्रंप ने कहा कि वह इस बात से खुश नहीं हैं कि इजरायल ने लेबनान और हिजबुल्लाह के मुद्दे को जिस तरह संभाला है, उससे तनाव कम होने के बजाय और बढ़ा है। उनके अनुसार यदि इस संघर्ष को जल्दी समाप्त कर दिया जाता तो क्षेत्रीय स्थिरता स्थापित करने के प्रयासों को अधिक मजबूती मिल सकती थी।

उन्होंने कहा कि जब कोई संघर्ष लंबे समय तक चलता रहता है तो उसका असर केवल युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उससे जुड़ी कूटनीतिक और आर्थिक प्रक्रियाएं भी प्रभावित होती हैं। यही कारण है कि मौजूदा हालात ईरान के साथ संभावित समझौते के लिए भी चुनौती बन सकते हैं।

बेरूत हमले से नाराज दिखे ट्रंप

रिपोर्टों के अनुसार ट्रंप विशेष रूप से लेबनान की राजधानी बेरूत में हुए हालिया इजरायली हमले से नाराज नजर आए। यह हमला ऐसे समय हुआ जब अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम शांति समझौते की घोषणा होने वाली थी।

ट्रंप का मानना है कि इस तरह की सैन्य कार्रवाइयां तनाव कम करने के बजाय उसे और बढ़ाने का काम करती हैं। उन्होंने संकेत दिया कि यदि क्षेत्र में शांति स्थापित करनी है तो सभी पक्षों को संयम और संतुलन के साथ कदम उठाने होंगे।

विश्लेषकों का भी मानना है कि मध्य पूर्व में चल रहे संघर्षों का असर वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजारों पर पड़ता है। ऐसे में किसी भी बड़े सैन्य अभियान का प्रभाव केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता।

सीरिया को जिम्मेदारी सौंपने की वकालत

डोनाल्ड ट्रंप ने इस मुद्दे पर एक अलग सुझाव देते हुए कहा कि सीरिया को हिजबुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। उनके अनुसार सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा इस चुनौती को अधिक प्रभावी तरीके से संभाल सकते हैं।

ट्रंप ने कहा कि उन्होंने इजरायल को सलाह दी है कि वह सीरिया को इस दिशा में आगे बढ़ने का अवसर दे। उनका मानना है कि यदि इजरायल नागरिक हताहतों को रोके बिना इस अभियान को आगे नहीं बढ़ा सकता, तो सीरिया बेहतर परिणाम दे सकता है।

उन्होंने सीरियाई राष्ट्रपति की प्रशंसा करते हुए कहा कि अहमद अल-शरा ने कई महत्वपूर्ण मामलों में सहयोग किया है और वे अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभा रहे हैं। ट्रंप के अनुसार सीरिया के नेतृत्व में यह अभियान अधिक नियंत्रित और लक्षित तरीके से संचालित किया जा सकता है।

मध्य पूर्व की राजनीति में बढ़ सकता है नया मोड़

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य पूर्व पहले से ही कई जटिल चुनौतियों का सामना कर रहा है। इजरायल-हिजबुल्लाह संघर्ष, ईरान से जुड़े विवाद और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को लेकर लगातार तनाव बना हुआ है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका की ओर से इस तरह के बयान जारी रहते हैं तो इससे इजरायल और अमेरिका के संबंधों पर भी चर्चा तेज हो सकती है। हालांकि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी मजबूत मानी जाती है, लेकिन ट्रंप की टिप्पणियों ने यह संकेत दिया है कि हिजबुल्लाह के खिलाफ अभियान को लेकर मतभेद उभर सकते हैं।

फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इजरायल, लेबनान, सीरिया और अमेरिका आने वाले दिनों में किस तरह की रणनीति अपनाते हैं। वहीं, ट्रंप के बयान ने मध्य पूर्व की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है, जिसमें सैन्य कार्रवाई और कूटनीतिक समाधान के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है।

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