
नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा तृणमूल कांग्रेस (TMC) के तीन बैंक खाते फ्रीज किए जाने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। पार्टी ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें खातों को फ्रीज करने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया गया था। इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 3 अगस्त को सुनवाई होने की संभावना है। मामले की सुनवाई जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ कर सकती है।

ED की कार्रवाई को TMC ने बताया मनमाना
तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि प्रवर्तन निदेशालय ने बिना किसी ठोस और पर्याप्त सबूत के उसके बैंक खातों को फ्रीज कर दिया। पार्टी का कहना है कि जांच एजेंसी ने कानून का गलत इस्तेमाल करते हुए राजनीतिक दल के नियमित वित्तीय संचालन को प्रभावित किया है। TMC ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि खातों पर लगी रोक हटाई जाए ताकि पार्टी का सामान्य कामकाज प्रभावित न हो।
133.84 करोड़ रुपये के लेनदेन पर ED की जांच
प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, TMC के एक HDFC बैंक खाते से लगभग 133.84 करोड़ रुपये की राशि केयरवेल एविएशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को ट्रांसफर की गई थी। एजेंसी का दावा है कि यह लेनदेन कथित मनी लॉन्ड्रिंग और धन के गलत इस्तेमाल से जुड़ा हो सकता है। इसी आधार पर ED ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत जांच शुरू की और संबंधित बैंक खातों पर कार्रवाई की।
विधायक की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
पूरे मामले की शुरुआत 18 जून 2026 को पश्चिम बंगाल के विधायक बिस्वनाथ दास की शिकायत से हुई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की। इसके बाद 23 जून को ED ने PMLA के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान एजेंसी ने 7 जुलाई को कुल छह बैंक खातों को फ्रीज किया, जिनमें TMC के तीन HDFC बैंक खाते भी शामिल हैं।
TMC ने सुप्रीम कोर्ट में क्या दलील दी?
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में TMC ने कहा है कि ED ने खातों को फ्रीज करने से पहले पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं किए। पार्टी का कहना है कि एजेंसी ने केवल आशंकाओं के आधार पर कार्रवाई की, जिससे उसके संगठनात्मक और प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं। TMC ने यह भी दलील दी कि राजनीतिक दल के खातों को फ्रीज करना लोकतांत्रिक गतिविधियों को प्रभावित करता है और ऐसी कार्रवाई कानूनी कसौटी पर परखी जानी चाहिए।
पहले भी मिली थी सीमित राहत
TMC ने अपनी याचिका में यह भी उल्लेख किया है कि 9 जुलाई को कलकत्ता हाईकोर्ट की एक अन्य पीठ ने पार्टी को सीमित राहत दी थी। उस आदेश के तहत विशेष अधिकारी की निगरानी में रोजमर्रा के खर्च और आवश्यक भुगतान के लिए खातों के संचालन की अनुमति दी गई थी। पार्टी का कहना है कि इससे यह स्पष्ट होता है कि खातों का पूर्ण रूप से फ्रीज रहना आवश्यक नहीं था।
हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत देने से किया था इनकार
हालांकि, 20 जुलाई 2026 को कलकत्ता हाईकोर्ट ने खातों को फ्रीज करने पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि इस शुरुआती चरण में यह तय नहीं किया जा सकता कि संबंधित फंड ट्रांसफर पूरी तरह वैध था या नहीं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि TMC अपनी सभी आपत्तियां PMLA के निर्णायक प्राधिकरण (Adjudicating Authority) और आगे की न्यायिक कार्यवाही के दौरान उठा सकती है।
ED की कार्रवाई को हाईकोर्ट ने पहली नजर में माना उचित
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि ED ने रिकॉर्ड पर ऐसे पर्याप्त कारण दर्ज किए हैं, जिनसे प्रथम दृष्टया यह माना जा सकता है कि बड़ी राशि विभिन्न संस्थाओं को भेजी गई थी। अदालत के अनुसार, उपलब्ध सामग्री के आधार पर एजेंसी द्वारा बैंक खातों को फ्रीज करने की कार्रवाई पहली नजर में उचित प्रतीत होती है। इसलिए इस स्तर पर जांच में हस्तक्षेप करना उचित नहीं होगा।
3 अगस्त की सुनवाई पर टिकीं निगाहें
अब इस पूरे मामले पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई बेहद अहम मानी जा रही है। अदालत यह तय करेगी कि ED द्वारा बैंक खातों को फ्रीज करने की कार्रवाई कानून के अनुरूप थी या नहीं और क्या TMC को अंतरिम राहत मिल सकती है। इस फैसले का असर न केवल इस मामले पर बल्कि भविष्य में राजनीतिक दलों के बैंक खातों पर जांच एजेंसियों की कार्रवाई से जुड़े मामलों पर भी पड़ सकता है।




