टॉप न्यूज़देश

Jobs Skill : बदलते रोजगार बाजार में डिग्री के साथ कौशल जरूरी, युवाओं के लिए बढ़ रहे नए करियर अवसर

डिग्री के साथ स्किल जरूरी, बदलते जॉब मार्केट में युवाओं के लिए नई चुनौती

नई दिल्ली। बदलते तकनीकी दौर में सिर्फ डिग्री हासिल करना अब नौकरी की गारंटी नहीं माना जा रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन और डिजिटल तकनीक के तेजी से विस्तार ने रोजगार बाजार की जरूरतों को पूरी तरह बदल दिया है। कंपनियां अब शैक्षणिक योग्यता के साथ-साथ उम्मीदवार की व्यावहारिक दक्षता, तकनीकी ज्ञान, समस्या सुलझाने की क्षमता और संवाद कौशल को भी महत्व दे रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में युवाओं को संबोधित करते हुए डिग्री के साथ स्किल विकसित करने और समय के साथ खुद को अपग्रेड करते रहने पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले नौकरी की तैयारी में डिग्री को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता था, लेकिन आज के दौर में कौशल भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उनका कहना है कि कॉलेज की पढ़ाई पूरी होने का मतलब सीखने की प्रक्रिया का अंत नहीं है। युवाओं को बदलती तकनीक और उद्योग की मांग के अनुसार लगातार नई चीजें सीखनी होंगी।

भारत में कौशल प्रशिक्षण अभी बड़ी चुनौती

भारत में युवाओं की रोजगार क्षमता में सुधार हुआ है, लेकिन औपचारिक कौशल प्रशिक्षण के मामले में देश अभी कई विकसित देशों से पीछे है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भारत में कार्यबल का करीब 5 प्रतिशत हिस्सा ही औपचारिक कौशल प्रशिक्षण प्राप्त करता है। इसके मुकाबले दक्षिण कोरिया में यह आंकड़ा 96 प्रतिशत, जापान में 80 प्रतिशत, जर्मनी में 75 प्रतिशत, ब्रिटेन में 68 प्रतिशत और अमेरिका में 52 प्रतिशत के आसपास है।

विशेषज्ञों के मुताबिक भारत में शिक्षा और रोजगार के बीच का अंतर भी बड़ी चुनौती है। कॉलेजों में पढ़ाया जाने वाला पाठ्यक्रम कई बार उद्योगों की मौजूदा जरूरतों से मेल नहीं खाता। परिणामस्वरूप डिग्री हासिल करने के बाद भी बड़ी संख्या में युवाओं को नौकरी के लिए अतिरिक्त प्रशिक्षण लेना पड़ता है।

अप्रेंटिसशिप और व्यावहारिक शिक्षा की जरूरत

विकसित देशों में छात्रों को पढ़ाई के साथ व्यावहारिक अनुभव देने पर जोर दिया जाता है। जर्मनी का डुअल वोकेशनल एजुकेशन एंड ट्रेनिंग मॉडल इसका प्रमुख उदाहरण है, जहां विद्यार्थियों को कक्षा की पढ़ाई के साथ कंपनियों में काम करने का अवसर मिलता है। इससे छात्र पढ़ाई पूरी करने से पहले ही उद्योग की कार्यप्रणाली समझ लेते हैं।

भारत में भी अप्रेंटिसशिप और व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने की कोशिश हो रही है, लेकिन इसका दायरा अभी सीमित है। देश में बड़ी संख्या में रोजगार असंगठित क्षेत्र में है, जहां लोग काम के दौरान कौशल तो हासिल करते हैं, लेकिन उस कौशल का औपचारिक प्रमाणन नहीं हो पाता।

सामाजिक सोच में बदलाव जरूरी

भारत में आईटीआई, डिप्लोमा और वोकेशनल कोर्स को अक्सर पारंपरिक डिग्री की तुलना में कम महत्व दिया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस सोच में बदलाव जरूरी है। आने वाले समय में वही युवा ज्यादा अवसर हासिल कर पाएंगे, जो डिग्री के साथ तकनीकी और व्यावहारिक कौशल भी विकसित करेंगे।

ऐसे में युवाओं के लिए संदेश साफ है—डिग्री जरूरी है, लेकिन बदलते रोजगार बाजार में स्किल ही नौकरी और करियर की असली ताकत बनती जा रही है।

Related Articles

Back to top button