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Team India : विदेशी पिचों पर टीम इंडिया को बदलनी होगी सोच, बोले असिस्टेंट कोच

इंग्लैंड में लगातार हार के बाद टीम इंडिया पर उठे सवाल, असिस्टेंट कोच बोले- विदेशी पिचों पर अंडरअचीवर्स का टैग हटाना होगा

नई दिल्ली: इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद भारतीय टीम की तैयारियों और विदेशी परिस्थितियों में खेल को लेकर सवाल उठने लगे हैं। पांच मैचों की सीरीज में पिछड़ने के बाद टीम इंडिया के असिस्टेंट कोच रेयान टेन डोएशे ने माना कि विदेशी पिचों पर बेहतर प्रदर्शन करना टीम के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

‘विदेशी हालात के अनुसार खुद को ढालना होगा’

चौथे टी20 मुकाबले के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में रेयान टेन डोएशे ने कहा कि टीम को सिर्फ यह कहने से काम नहीं चलेगा कि खिलाड़ियों को परिस्थितियों के अनुसार ढलना चाहिए, बल्कि इसके लिए सही प्रक्रिया अपनानी होगी। उन्होंने स्वीकार किया कि भारतीय टीम घरेलू मैदानों पर शानदार प्रदर्शन करती है, लेकिन विदेशी पिचों पर बल्लेबाजों को रन बनाने में कठिनाई होती है।

‘अंडरअचीवर्स’ का टैग हटाने की जरूरत

असिस्टेंट कोच ने कहा कि भारतीय टीम को विदेशी परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन कर खुद पर लगे ‘अंडरअचीवर्स’ के टैग को हटाना होगा। उनके मुताबिक, खिलाड़ियों को मानसिक रूप से भी मजबूत बनने की जरूरत है ताकि चुनौतीपूर्ण हालात में बेहतर प्रदर्शन किया जा सके।

टी20 वर्ल्ड कप को लेकर भी दिया बड़ा संदेश

रेयान टेन डोएशे ने कहा कि टीम को अभी से दो साल बाद ऑस्ट्रेलिया में होने वाले टी20 वर्ल्ड कप की तैयारी करनी होगी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भारत सिर्फ घरेलू पिचों पर बड़े स्कोर बनाने वाली टीम बनना चाहता है या फिर ऐसी टीम जो मैनचेस्टर, साउथम्प्टन और मेलबर्न जैसी कठिन विदेशी परिस्थितियों में भी जीत दर्ज कर सके।

तैयारी के लिए नहीं मिला पर्याप्त समय

असिस्टेंट कोच ने माना कि खिलाड़ियों को सीरीज की तैयारी के लिए कम से कम 10 से 15 दिन का समय मिलना चाहिए था, लेकिन व्यस्त अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के कारण ऐसा संभव नहीं हो सका। उन्होंने कप्तान श्रेयस अय्यर की बल्लेबाजी की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें कप्तानी में पूरी तरह सहज होने के लिए थोड़ा समय देना होगा।

बुमराह और हार्दिक की वापसी से बढ़ेंगी उम्मीदें

रेयान टेन डोएशे ने उम्मीद जताई कि जसप्रीत बुमराह और हार्दिक पांड्या की वापसी के बाद टीम इंडिया का संतुलन बेहतर होगा और विदेशी दौरों पर प्रदर्शन में भी सुधार देखने को मिलेगा।

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