MNREGA Scam
प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने सत्ता संभालते ही यह स्पष्ट कर दिया था कि विकास कार्यों में भ्रष्टाचार किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार ने कई मामलों में सख्त कार्रवाई कर यह संदेश भी दिया कि चाहे अधिकारी हो या जनप्रतिनिधि, दोषी पाए जाने पर अंजाम तय है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आज भी निचले स्तर पर जिम्मेदार लोग नए-नए तरीकों से भ्रष्टाचार को अंजाम देने से बाज नहीं आ रहे हैं।
MNREGA Scam
ताजा मामला जनपद सिद्धार्थनगर से सामने आया है, जहां विकासखंड खेसरहा की ग्राम पंचायत भलुहा में मनरेगा योजना के तहत किए गए विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम प्रधान एवं संबंधित विकासखंड कर्मियों ने बिना कार्य कराए ही लाखों रुपये का भुगतान करा लिया, जबकि मौके पर वास्तविक स्थिति कुछ और ही बयां कर रही है।
ग्रामीणों के अनुसार, ग्राम पंचायत भलुहा में हाल ही में मनरेगा योजना से चकरोड निर्माण दिखाया गया। लेकिन जब मौके पर जाकर देखा गया तो स्थिति चौंकाने वाली मिली। जिस चकरोड को नया निर्माण बताया गया, वहां आज भी फसलें लहलहा रही हैं। न तो कहीं नई मिट्टी डाली गई है, न ही बाहर से मिट्टी कैरेज कर लाई गई। आरोप है कि पुराने चकरोड को केवल ट्रैक्टर से जुतवाकर उसे नया निर्माण दिखा दिया गया और एमबी (मेजरमेंट बुक) भरकर पूरा भुगतान निकाल लिया गया।
इतना ही नहीं, ग्राम पंचायत में पहले से मौजूद एक पुरानी नाली को मरम्मत के नाम पर दिखाकर भी लाखों रुपये का गबन किए जाने का आरोप है। नाली की स्थिति जस की तस बनी हुई है, लेकिन कागजों में मरम्मत कार्य पूर्ण दर्शा दिया गया।
इस पूरे मामले को लेकर जागरूक ग्रामीणों ने ब्लॉक स्तर से लेकर जिला प्रशासन तक शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन आरोप है कि कार्रवाई करने के बजाय शिकायतकर्ताओं को ही गुमराह किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित अधिकारियों द्वारा मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है और दोषियों पर कार्रवाई के बजाय उन्हें संरक्षण दिया जा रहा है।
रवि यादव ने आरोप लगाया कि ग्राम प्रधान और अधिकारियों ने मिलकर बिना काम कराए ही भुगतान करा लिया। जब ग्रामीणों ने शिकायत की तो उन्हें टालमटोल कर गुमराह किया जा रहा है।
जिलाधिकारी ने मामले की जांच कराने और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
अब बड़ा सवाल यह है कि भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की बात करने वाली सरकार के दावे जमीनी स्तर पर कितने प्रभावी हैं। अगर समय रहते इस मामले में निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो यह न केवल सरकारी योजनाओं की साख पर सवाल खड़े करेगा, बल्कि ईमानदार ग्रामीणों का भरोसा भी टूटेगा।
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