
फिल्म में निखिल विजय का किरदार कहानी की हास्य-ऊर्जा को काफी बढ़ाता है। विशाल और उनके बीच की दोस्ती फिल्म के सबसे स्वाभाविक और मनोरंजक हिस्सों में शामिल है। दोनों की बातचीत कई साधारण दृश्यों को भी मजेकुछ फिल्में जिंदगी के बड़े सवालों के जवाब देने नहीं आतीं। वे बस कुछ घंटे आपके साथ बिताती हैं, आपकी उलझनों पर मुस्कुराती हैं और दोस्ती, प्यार व जिंदगी के उन छोटे पलों की याद दिलाती हैं, जिनसे लगभग हर युवा कभी न कभी गुजरता है। ‘प्रेम कीटाणु’ भी ऐसी ही एक हल्की-फुल्की फिल्म है। यह प्रेम कहानी जरूर है, लेकिन इसके केंद्र में सिर्फ रोमांस नहीं, बल्कि करियर, परिवार, दोस्ती और भविष्य को लेकर असमंजस भी है।
कहानी में क्या है?
फिल्म की कहानी विशाल ठाकुर के इर्द-गिर्द घूमती है। पढ़ाई पूरी करने के बाद विशाल जिंदगी के उस मोड़ पर खड़ा है जहां डिग्री तो हाथ में है, लेकिन भविष्य की दिशा साफ नहीं है। नौकरी की तलाश, परिवार की उम्मीदें, आत्मनिर्भर बनने की चाह और विदेश जाकर आगे पढ़ने का सपना उसकी जिंदगी को लगातार उलझाए रखते हैं।
इसी दौरान उसकी जिंदगी में सुहानी की एंट्री होती है। दोस्ती धीरे-धीरे आकर्षण और फिर प्यार में बदलती है। लेकिन यह रिश्ता किसी पारंपरिक फिल्मी प्रेम कहानी की तरह आसान नहीं है। दोनों की अपनी प्राथमिकताएं, सपने और रिश्ते को लेकर अलग-अलग उम्मीदें हैं।
फिल्म की शुरुआत इन भावनाओं को काफी सहजता से पकड़ती है। विशाल का संघर्ष और दोस्तों के साथ उसके मजेदार पल कहानी को युवा दर्शकों के करीब लाते हैं। हालांकि दूसरे हिस्से में कहानी थोड़ी कमजोर पड़ती है और रोमांटिक घटनाक्रम कुछ जगह अनुमानित महसूस होने लगता है।
वीर पहाड़िया ने छोड़ी छाप
वीर पहाड़िया ने विशाल के किरदार में सहज अभिनय किया है। विशाल कोई आदर्श नायक नहीं है। वह गलतियां करता है, असुरक्षित महसूस करता है और कई बार खुद अपनी भावनाओं को समझ नहीं पाता। वीर ने किरदार की इन कमजोरियों को बिना जरूरत से ज्यादा नाटकीय बनाए पर्दे पर उतारा है।
आफिया सैयद के लिए यह फिल्म खास है और वह सुहानी के किरदार में ताजगी लेकर आती हैं। उनका अभिनय नियंत्रित और सहज है। सुहानी को केवल नायक की प्रेमिका तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि उसके अपने विचार और भविष्य को लेकर उम्मीदें भी हैं। वीर और आफिया की केमिस्ट्री फिल्म के रोमांटिक हिस्से को मजबूत बनाती है।
निखिल विजय औ
दार बना देती है।
अपरशक्ति खुराना भी अपने परिचित हास्य अंदाज में प्रभाव छोड़ते हैं। उनका किरदार कहानी में हल्कापन बनाए रखता है। राकेश बेदी भी अपने हिस्से में सहज और विश्वसनीय नजर आते हैं।
निर्देशन और संवाद
निर्देशक अपूर्व सिंह कार्की ने फिल्म का टोन हल्का और युवा रखा है। इसका हास्य ज्यादातर परिस्थितियों और किरदारों की बातचीत से निकलता है। यही वजह है कि कई मजेदार दृश्य बनावटी नहीं लगते।
फिल्म के संवादों में भी दोस्ती वाली सहजता दिखाई देती है। कई जगह ऐसा लगता है जैसे दो दोस्त फिल्मी संवाद नहीं, बल्कि अपनी रोजमर्रा की जिंदगी की बातें कर रहे हों। यही फिल्म की प्रमुख खूबियों में से एक है।
हालांकि निर्देशन की कमजोरी दूसरे हिस्से में सामने आती है। विशाल के करियर और परिवार से जुड़े संघर्षों में काफी संभावनाएं थीं, लेकिन फिल्म उन्हें ज्यादा गहराई तक नहीं ले जाती। इससे किरदार की भावनात्मक यात्रा उतनी प्रभावशाली नहीं बन पाती जितनी हो सकती थी।
तकनीकी पक्ष
फिल्म की सिनेमाई प्रस्तुति कहानी के युवा माहौल के अनुकूल है। संगीत और बैकग्राउंड स्कोर रोमांस तथा हास्य वाले दृश्यों को अच्छी तरह सहारा देते हैं। प्रस्तुति में अनावश्यक भारीपन नहीं है।
हालांकि करीब दो घंटे 18 मिनट की अवधि को देखते हुए संपादन थोड़ा और चुस्त हो सकता था। विशेष रूप से दूसरे भाग में कुछ दृश्यों को छोटा किया जाता तो फिल्म की गति बेहतर बनी रहती।
क्या कमजोर करता है फिल्म को?
फिल्म की सबसे बड़ी कमी इसकी अनुमानित कहानी है। शुरुआत में कहानी जिस सहजता से आगे बढ़ती है, बाद में वही प्रवाह थोड़ा कमजोर हो जाता है। करियर, परिवार, आत्मनिर्भरता और रिश्तों जैसे मुद्दे कहानी में मौजूद हैं, लेकिन फिल्म उन्हें पूरी गहराई से तलाश नहीं पाती।
इसके बावजूद फिल्म पूरी तरह निराश नहीं करती। इसकी गर्मजोशी, दोस्ती, हास्य और कलाकारों की सहज केमिस्ट्री इसे देखने लायक बनाए रखते हैं।
अंतिम फैसला
‘प्रेम कीटाणु’ एक ऐसी युवा प्रेम कहानी है जिसमें प्यार के साथ करियर, दोस्ती और भविष्य की चिंता भी मौजूद है। यह कोई ऐसी फिल्म नहीं है जो प्रेम की परिभाषा बदलने का दावा करती हो, बल्कि यह उस उम्र को पकड़ने की कोशिश करती है जब जिंदगी का अगला कदम खुद साफ नहीं होता।
वीर पहाड़िया और आफिया सैयद की केमिस्ट्री, निखिल विजय का हास्य और फिल्म का हल्का माहौल इसके मजबूत पक्ष हैं। वहीं कमजोर दूसरा भाग और सीमित भावनात्मक गहराई इसकी सबसे बड़ी कमियां हैं।

कुल मिलाकर, ‘प्रेम कीटाणु’ एक प्यारी, सहज और मनोरंजक फिल्म है, जो आपको कई जगह मुस्कुराने का मौका देती है। अगर आप दोस्ती और रोमांस से भरपूर हल्की-फुल्की युवा कहानी देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए एक सुखद अनुभव हो सकती है।




