
उत्तर कोरिया ने एक बार फिर दुनिया को अपनी बढ़ती सैन्य ताकत का संकेत देते हुए नए हथियार परीक्षणों का दावा किया है। सरकारी मीडिया KCNA के मुताबिक, देश ने परमाणु क्षमता वाली क्रूज़ मिसाइल, बैलिस्टिक मिसाइल और अत्याधुनिक रॉकेट आर्टिलरी सिस्टम का सफल परीक्षण किया। इन परीक्षणों की खास बात यह रही कि उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता Kim Jong Un ने खुद इनकी निगरानी की और सेना को तेजी से आधुनिक बनाने का संदेश दिया। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव बढ़ा दिया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता गहरा दी है।

उत्तर कोरिया का दावा है कि हालिया परीक्षण केवल शक्ति प्रदर्शन नहीं थे, बल्कि उसका उद्देश्य युद्ध के समय परमाणु हमले की क्षमता को और अधिक प्रभावी बनाना है। KCNA के अनुसार, परीक्षणों में ऐसी बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया जिनमें नए प्रकार के वॉरहेड लगाए गए थे। इन वॉरहेड्स को विशेष रूप से परमाणु हमलों के लिए डिजाइन किया गया है। इसके अलावा परमाणु क्षमता वाली क्रूज़ मिसाइलों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीक से लैस किया गया, जिससे उनकी सटीकता और लक्ष्य भेदन क्षमता पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत बताई जा रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर कोरिया ने 240 मिमी रॉकेट आर्टिलरी सिस्टम का भी परीक्षण किया, जिसमें ‘अत्यधिक सटीक’ नेविगेशन तकनीक लगाई गई है। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक युद्ध के दौरान दुश्मन के ठिकानों पर बेहद सटीक हमले करने में मदद कर सकती है। उत्तर कोरिया लगातार अपनी लंबी दूरी की मारक क्षमता और परमाणु हथियार कार्यक्रम को मजबूत करने में जुटा है। यही कारण है कि उसने अब मिसाइल तकनीक के साथ AI और आधुनिक गाइडेंस सिस्टम को भी जोड़ना शुरू कर दिया है।
KCNA की रिपोर्ट में कहा गया कि Kim Jong Un इन परीक्षणों से बेहद संतुष्ट दिखाई दिए। खासकर उन्होंने परमाणु क्षमता वाली क्रूज़ मिसाइलों के प्रदर्शन की प्रशंसा की। बताया जा रहा है कि इन मिसाइलों को दक्षिण कोरिया की सीमा के पास तैनात लंबी दूरी की आर्टिलरी यूनिट्स के साथ इस्तेमाल करने की योजना बनाई जा रही है। किम ने सेना के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया कि आर्टिलरी बलों का आधुनिकीकरण तेज किया जाए ताकि भविष्य में “कोई भी उनकी बराबरी न कर सके।”
विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर कोरिया का यह बयान केवल सैन्य रणनीति का हिस्सा नहीं बल्कि एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश भी है। प्योंगयांग यह दिखाना चाहता है कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और आर्थिक दबावों के बावजूद उसका हथियार कार्यक्रम लगातार आगे बढ़ रहा है। पिछले कुछ वर्षों में उत्तर कोरिया ने कई प्रकार की बैलिस्टिक मिसाइलों, हाइपरसोनिक हथियारों और पानी के भीतर से दागी जाने वाली मिसाइलों का परीक्षण किया है। अब AI आधारित क्रूज़ मिसाइलों का दावा उसकी सैन्य महत्वाकांक्षाओं को और बड़ा बना देता है।
दूसरी ओर, दक्षिण कोरिया की सेना ने भी पुष्टि की कि उत्तर कोरिया ने पश्चिमी समुद्री क्षेत्र की ओर कई प्रोजेक्टाइल दागे थे। दक्षिण कोरिया के जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अनुसार, इनमें कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल भी शामिल थी जो लगभग 80 किलोमीटर तक गई। हालांकि दक्षिण कोरिया ने अभी तक उत्तर कोरिया द्वारा बताए गए सभी हथियारों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की है। फिर भी सियोल में सुरक्षा एजेंसियां इन घटनाओं को गंभीर खतरे के रूप में देख रही हैं।
कोरियाई प्रायद्वीप में बढ़ते तनाव की सबसे बड़ी वजह उत्तर कोरिया का लगातार आक्रामक सैन्य रुख माना जा रहा है। वर्ष 2019 में अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच परमाणु निरस्त्रीकरण को लेकर बातचीत विफल हो गई थी। उस समय अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति Donald Trump और Kim Jong Un के बीच कई दौर की ऐतिहासिक बैठकें हुई थीं। उम्मीद जताई जा रही थी कि दोनों देशों के संबंध बेहतर होंगे और परमाणु कार्यक्रम पर कोई समझौता निकल सकता है। लेकिन बातचीत टूटने के बाद उत्तर कोरिया ने अपने हथियार कार्यक्रम को और तेज कर दिया।
इसके बाद उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया को अपना “सबसे बड़ा दुश्मन” घोषित कर दिया। दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव और ज्यादा बढ़ गया। सीमा पर सैन्य गतिविधियां बढ़ाई गईं और कई समझौतों को खत्म कर दिया गया। हाल ही में हुई एक सैन्य बैठक में किम जोंग उन ने सीमा सुरक्षा को “अभेद्य किले” में बदलने की बात कही थी। उन्होंने सैनिकों की संख्या और सैन्य संसाधनों को बढ़ाने पर भी जोर दिया।
विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर कोरिया अब केवल क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौती नहीं रह गया है, बल्कि वह वैश्विक भू-राजनीति का अहम खिलाड़ी बनता जा रहा है। खासतौर पर रूस और चीन के साथ उसके संबंधों में तेजी से नजदीकी बढ़ी है। यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस और उत्तर कोरिया के बीच सैन्य सहयोग की खबरें लगातार सामने आई हैं। पश्चिमी देशों का आरोप है कि उत्तर कोरिया रूस को हथियार और गोला-बारूद उपलब्ध करा रहा है। बदले में रूस से उसे सैन्य तकनीक और आर्थिक सहयोग मिलने की संभावना जताई जाती है।
चीन भी उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा आर्थिक और राजनीतिक सहयोगी बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद चीन ने कई मौकों पर प्योंगयांग को कूटनीतिक समर्थन दिया है। यही वजह है कि उत्तर कोरिया वैश्विक दबावों के बावजूद खुद को पूरी तरह अलग-थलग महसूस नहीं करता।
अमेरिका अब भी उत्तर कोरिया के साथ बातचीत का रास्ता खुला रखने की बात करता है। Donald Trump कई बार सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि वे किम जोंग उन के साथ फिर से बातचीत शुरू करना चाहते हैं। लेकिन उत्तर कोरिया फिलहाल ऐसे किसी प्रस्ताव में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा। प्योंगयांग का कहना है कि जब तक अमेरिका परमाणु निरस्त्रीकरण की शर्तें नहीं हटाता, तब तक किसी भी वार्ता का कोई मतलब नहीं है।
इन हालिया हथियार परीक्षणों ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि उत्तर कोरिया अपनी सैन्य ताकत को लगातार आधुनिक बना रहा है। AI आधारित मिसाइल तकनीक, परमाणु क्षमता वाले हथियार और उन्नत रॉकेट सिस्टम इस बात का संकेत हैं कि आने वाले समय में कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव और बढ़ सकता है। ऐसे में दुनिया की नजर अब अमेरिका, दक्षिण कोरिया, चीन और रूस की अगली रणनीति पर टिकी हुई है।




