
दुनिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता के बीच नीदरलैंड ने अपने सोने के भंडार को लेकर बड़ा फैसला किया है। नीदरलैंड के केंद्रीय बैंक ने अमेरिका और कनाडा में रखे अपने करीब 86 टन सोने को वहां से हटाकर ब्रिटेन की राजधानी लंदन में स्थानांतरित कर दिया है। इस कदम के बाद यूरोप में सोने के भंडार की सुरक्षा और उसकी उपलब्धता को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।
नीदरलैंड के केंद्रीय बैंक के अनुसार, इस फैसले का मुख्य कारण किसी देश विशेष पर भरोसा कम होना नहीं, बल्कि संकट की स्थिति में सोने को तेजी से उपलब्ध कराने की जरूरत है। बैंक का मानना है कि लंदन दुनिया के सबसे बड़े सोना व्यापार केंद्रों में से एक है और यहां रखे सोने को जरूरत पड़ने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपेक्षाकृत आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है।
लंदन में बढ़ा नीदरलैंड के सोने का भंडार
86 टन सोना ब्रिटेन पहुंचने के बाद लंदन में नीदरलैंड के कुल सोने के भंडार का हिस्सा बढ़कर करीब 32 प्रतिशत से अधिक हो गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, नीदरलैंड के कुल 612.4 टन सोने में से अब लगभग 195 टन सोना लंदन में रखा गया है।
नीदरलैंड के लिए सोना लंबे समय से विदेशी मुद्रा भंडार का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। केंद्रीय बैंक का कहना है कि सोने को अलग-अलग स्थानों पर रखना जोखिम को संतुलित करने में मदद करता है। इसके साथ ही लंदन में मौजूद सोना जरूरत पड़ने पर अधिक तेजी से इस्तेमाल किया जा सकता है।
अमेरिका से सोना हटाने की चर्चा क्यों?
नीदरलैंड के इस कदम को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा अमेरिका को लेकर हो रही है। मौजूदा समय में अमेरिका की आर्थिक और व्यापारिक नीतियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देशों में बहस चल रही है। ऐसे में कुछ लोग इस फैसले को अमेरिकी व्यवस्था पर भरोसे से जोड़कर देख रहे हैं।
हालांकि, नीदरलैंड के केंद्रीय बैंक ने इसे अमेरिका के खिलाफ किसी राजनीतिक कदम के तौर पर पेश नहीं किया है। बैंक की ओर से जोर सुरक्षा, भंडारण व्यवस्था और संकट के समय सोने की उपलब्धता पर दिया गया है।
सोने को लेकर बढ़ रही रणनीतिक सोच
दुनिया में युद्ध, व्यापारिक तनाव, प्रतिबंध और आर्थिक अस्थिरता बढ़ने के साथ कई केंद्रीय बैंक अपने सोने के भंडार की समीक्षा कर रहे हैं। सोने को किसी एक देश की मुद्रा या सरकार से सीधे जुड़ा नहीं माना जाता, इसलिए आर्थिक संकट के समय इसे सुरक्षित परिसंपत्ति के तौर पर देखा जाता है।
नीदरलैंड का ताजा फैसला भी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अमेरिका और कनाडा से करीब 86 टन सोना हटाकर ब्रिटेन पहुंचाना यह दिखाता है कि केंद्रीय बैंक अब केवल सोने की मात्रा ही नहीं, बल्कि उसकी लोकेशन और संकट के समय उपलब्धता को भी बेहद महत्वपूर्ण मान रहे हैं।

फिलहाल नीदरलैंड ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि इस कदम का उद्देश्य अमेरिका पर भरोसा कम करना है। इसलिए इसे सीधे तौर पर ‘ट्रंप पर अविश्वास’ कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन सोने के भंडार को लेकर लिया गया यह फैसला वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में बदलती रणनीतिक प्राथमिकताओं का संकेत जरूर देता है।




