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Kailash Mansarovar : नेपाल बाढ़ में फंसे तीर्थयात्री ने सुनाई खौफनाक आपबीती, 100 मीटर दूर था सैलाब

नेपाल में सैलाब का खौफ: 100 मीटर दूर था बाढ़ का पानी, भारत लौटे तीर्थयात्री ने सुनाई पूरी आपबीती

नेपाल में आई भीषण बाढ़ और प्राकृतिक आपदा के बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए भारतीय तीर्थयात्रियों का एक समूह सुरक्षित भारत लौट आया है। नेपाल में बाढ़ के कारण कई इलाकों में हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं और बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों के संपर्क में नहीं आने की जानकारी सामने आई है। इस बीच रेस्क्यू किए गए तीर्थयात्रियों ने अपनी डरावनी आपबीती साझा की है।

भारत लौटे 21 तीर्थयात्रियों के समूह से विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मुलाकात की। ये सभी तीर्थयात्री कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान नेपाल में फंस गए थे। नेपाली सेना ने कठिन परिस्थितियों के बीच उन्हें सुरक्षित स्थान से बाहर निकाला और बाद में भारतीय दूतावास की मदद से उन्हें काठमांडू लाया गया। इसके बाद उनके भारत लौटने की व्यवस्था की गई।

‘बाढ़ का पानी सिर्फ 100 मीटर दूर था’

आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम के रहने वाले एक तीर्थयात्री ने उस भयावह स्थिति को याद करते हुए बताया कि जिस जगह वे मौजूद थे, वहां बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ रहा था। उन्होंने कहा कि सैलाब उनसे महज करीब 100 मीटर की दूरी तक पहुंच गया था।

तीर्थयात्री के मुताबिक, उस समय हालात बेहद गंभीर थे और उन्हें अपनी जान की चिंता सताने लगी थी। उन्होंने कहा कि मुश्किल वक्त में उन्हें लगा कि भगवान ने उनकी मदद की और इसी वजह से वह सुरक्षित बाहर निकल पाए।

उन्होंने आंध्र प्रदेश के मंत्री नारा लोकेश, अपने क्षेत्र के विधायक और मुख्यमंत्री समेत उन सभी लोगों का आभार जताया, जिन्होंने संकट के दौरान उनका हाल जाना और मदद की।

250 भारतीयों के लापता होने का दावा

रेस्क्यू किए गए तीर्थयात्री ने दावा किया कि नेपाल में करीब 250 भारतीय लापता हैं। हालांकि, विदेश मंत्री एस. जयशंकर की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, सरकार की प्राथमिकता उन 315 से अधिक भारतीय नागरिकों से संपर्क स्थापित करना है, जिनसे बाढ़ प्रभावित इलाकों में अभी तक संपर्क नहीं हो सका है।

विदेश मंत्री ने बताया कि अलग-अलग स्थानों से अब तक करीब 85 भारतीय नागरिकों को बचाया जा चुका है। सरकार और भारतीय मिशन लगातार नेपाल में मौजूद भारतीय नागरिकों की स्थिति का पता लगाने और उन्हें सुरक्षित निकालने की कोशिश कर रहे हैं।

नेपाली सेना ने चलाया रेस्क्यू अभियान

एस. जयशंकर ने बताया कि कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए 21 भारतीय तीर्थयात्रियों को नेपाली सेना ने बेहद मुश्किल जगह से रेस्क्यू किया। इसके बाद उन्हें काठमांडू पहुंचाया गया, जहां भारतीय दूतावास ने उनके भारत लौटने की व्यवस्था की।

विदेश मंत्री ने तीर्थयात्रियों से मुलाकात के बाद कहा कि उनका मकसद सुरक्षित लौटे लोगों से मिलना, उनके अनुभव जानना और उनके सकुशल वापस आने पर खुशी जाहिर करना था। उन्होंने यह भी बताया कि तीर्थयात्रियों ने अपनी जान बचाने के लिए किए गए प्रयासों को लेकर नेपाली सेना का विशेष तौर पर आभार जताया।

अभी खत्म नहीं हुआ रेस्क्यू मिशन

विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने का अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है। सरकार का पूरा ध्यान नेपाल में मौजूद उन भारतीयों तक पहुंचने पर है, जिनसे अभी संपर्क नहीं हो पाया है।

नेपाल में बाढ़ के बाद कई स्थानों पर राहत और बचाव कार्य जारी है। भारतीय दूतावास भी नेपाली प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय कर प्रभावित भारतीय नागरिकों की जानकारी जुटाने और जरूरत पड़ने पर उनके सुरक्षित निकासी की कोशिश कर रहा है।

इस बीच भारत लौटे तीर्थयात्री की आपबीती ने नेपाल में आई बाढ़ की भयावहता को सामने ला दिया है। उनके मुताबिक, सैलाब जिस तेजी से उनकी ओर बढ़ रहा था, उस दौरान हर पल डर के साये में गुजर रहा था। उनके लिए सुरक्षित भारत लौटना किसी बड़ी राहत से कम नहीं है।

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