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Electricity Safety : कुशीनगर में बिजली लाइन से खतरा, शिकायतों के बाद भी विभाग मौन

कुशीनगर: बिजली के तारों के बीच जिंदगी जीने को मजबूर ग्रामीण, शिकायतों के बाद भी नहीं जागा विभाग; ट्रांसफार्मर ब्लास्ट में बच्चे की मौत के बाद भी खतरा बरकरार

कुशीनगर। जनपद के रामकोला ब्लॉक अंतर्गत टेकुआटार गांव के भवानी टोला में बिजली की असुरक्षित व्यवस्था ग्रामीणों के लिए गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। गांव में कथित तौर पर बांस के सहारे 440 वोल्ट की विद्युत लाइन दौड़ाई जा रही है, जबकि उसके ठीक ऊपर से 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन गुजर रही है। बिजली के तारों की इस खतरनाक स्थिति के बीच ग्रामीणों को हर दिन डर के साये में जीवन गुजारना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद विद्युत विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

बांस के सहारे बिजली आपूर्ति, कभी भी हो सकता है हादसा

भवानी टोला में विद्युत व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, जहां बिजली के तारों को मजबूत और मानक के अनुरूप खंभों के सहारे लगाया जाना चाहिए, वहां बांस के सहारे विद्युत लाइन खींचकर आपूर्ति की जा रही है। यह व्यवस्था कितनी सुरक्षित है, इसे लेकर स्थानीय लोगों में लगातार चिंता बनी हुई है।

सबसे गंभीर स्थिति यह है कि 440 वोल्ट की विद्युत लाइन के ऊपर से 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन गुजर रही है। ऐसे में तारों के बीच पर्याप्त सुरक्षित दूरी और निर्धारित सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर सवाल उठना लाजिमी है। तेज हवा, बारिश या तारों के ढीले होने जैसी परिस्थितियों में खतरा और बढ़ सकता है। हालांकि, वास्तविक जोखिम का आकलन विद्युत विभाग के तकनीकी निरीक्षण के बाद ही किया जा सकता है।

शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि बिजली की इस समस्या से विभागीय अधिकारियों को कई बार अवगत कराया गया है। लोगों ने सुरक्षित खंभे लगाने, जर्जर व्यवस्था को दुरुस्त कराने और विद्युत लाइनों का उचित निरीक्षण कराने की मांग की, लेकिन उनके मुताबिक समस्या का स्थायी समाधान अब तक नहीं हो सका है।

ग्रामीणों का आरोप है कि यदि समय रहते विद्युत व्यवस्था को सुरक्षित नहीं बनाया गया, तो किसी भी दिन बड़ी दुर्घटना हो सकती है। गांव के घरों और आवागमन वाले रास्तों के आसपास बिजली के तारों की स्थिति लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। ऐसे में बच्चों, बुजुर्गों और अन्य ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर विशेष चिंता जताई जा रही है।

ट्रांसफार्मर ब्लास्ट में बच्चे की मौत, फिर भी नहीं सुधरे हालात!

ग्रामीणों के मुताबिक, कुछ महीने पहले ट्रांसफार्मर ब्लास्ट की घटना में एक बच्चे की मौत हो चुकी है। इस दर्दनाक घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया था। इसके बाद लोगों को उम्मीद थी कि विद्युत विभाग गांव की व्यवस्था की समीक्षा करेगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाएगा।

लेकिन ग्रामीणों का दावा है कि भवानी टोला में अब भी बिजली की असुरक्षित व्यवस्था बनी हुई है। पहले हुई घटना की याद आज भी लोगों के मन में है और मौजूदा हालात उनकी चिंता बढ़ा रहे हैं। ग्रामीणों का सवाल है कि जब हादसे में एक बच्चे की जान जा चुकी है, तो फिर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीरता क्यों नहीं दिखाई जा रही है?

एसडीओ और जेई की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

इस मामले में रामकोला विद्युत विभाग के एसडीओ और जेई की कार्यप्रणाली को लेकर भी ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि बार-बार शिकायत किए जाने के बावजूद समस्या का प्रभावी समाधान नहीं किया गया। हालांकि, संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने पर ही विभाग की कार्रवाई और स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

ग्रामीणों ने उच्चाधिकारियों से लगाई गुहार

भवानी टोला के ग्रामीणों ने विद्युत विभाग के उच्चाधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनकी प्रमुख मांग है कि गांव में विद्युत व्यवस्था का स्थलीय निरीक्षण कराया जाए, बांस के सहारे लगी 440 वोल्ट की लाइन को निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप मजबूत खंभों पर स्थानांतरित किया जाए और 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन के आसपास सुरक्षा मानकों की जांच की जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि बिजली आज की बुनियादी जरूरत है, लेकिन इसकी आपूर्ति लोगों की जान जोखिम में डालकर नहीं होनी चाहिए। अब देखना यह होगा कि विभाग ग्रामीणों की शिकायतों पर कब तक कार्रवाई करता है और भवानी टोला को इस खतरे से राहत मिल पाती है या नहीं।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या विद्युत विभाग किसी संभावित हादसे से पहले जागेगा, या ग्रामीणों को सुरक्षित बिजली व्यवस्था के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा?

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