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Wild Bear Culling : जापान में भालुओं का बढ़ता आतंक, सरकार ने 14 हजार से ज्यादा भालुओं को मारा

जापान में इंसानों और भालुओं के बीच बढ़ता टकराव अब गंभीर राष्ट्रीय संकट का रूप ले चुका है। जंगलों से निकलकर भालू शहरों, गांवों, घरों और खेतों तक पहुंच रहे हैं। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि जापान में वित्तीय वर्ष 2025 यानी अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के दौरान 14,720 भालुओं को पकड़ा गया, जिनमें करीब 14,600 से ज्यादा को मार दिया गया। यह जापान में भालुओं के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।

13 लोगों की मौत, 238 घायल

जापान के पर्यावरण मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2025 में भालुओं के हमले के 216 मामले सामने आए। इन घटनाओं में 238 लोग घायल हुए, जबकि 13 लोगों की मौत हो गई। दोनों आंकड़े रिकॉर्ड स्तर पर हैं। इसी दौरान भालुओं के आबादी वाले इलाकों में दिखाई देने की घटनाएं भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं। जापान में एशियाई ब्लैक बियर के 50,776 sightings दर्ज किए गए, जो पिछले वित्तीय वर्ष के 20,513 मामलों से करीब ढाई गुना ज्यादा हैं। 

घरों और रेलवे स्टेशनों तक पहुंच रहे भालू

भोजन की तलाश में भालू अब सिर्फ जंगलों तक सीमित नहीं हैं। कई इलाकों में वे घरों, बगीचों, खेतों, सड़कों और व्यावसायिक क्षेत्रों में घुस रहे हैं। उत्तरी जापान के अकिता और इवाते जैसे क्षेत्रों में स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर रही। वित्तीय वर्ष 2025 में अकिता में अकेले 13,592 भालू sightings दर्ज की गईं, जबकि इवाते में यह संख्या 9,739 रही। 

जंगलों में खाना कम हुआ तो बस्तियों की ओर आए

विशेषज्ञों के मुताबिक इस संकट के पीछे कई कारण हैं। जंगलों में भालुओं का प्रमुख भोजन माने जाने वाले बलूत (Acorns) और अन्य फलों की पैदावार कमजोर रही। बदलते मौसम और पर्यावरणीय परिस्थितियों ने भी प्राकृतिक भोजन की उपलब्धता को प्रभावित किया है। नतीजा यह हुआ कि भूखे भालू जंगलों से निकलकर इंसानी बस्तियों की ओर आने लगे। 

इसके साथ ही जापान के ग्रामीण इलाकों में आबादी तेजी से घट रही है। युवा शहरों की ओर जा रहे हैं, जिससे कई गांव और खेती वाले क्षेत्र खाली हो रहे हैं। ऐसे इलाकों में उगने वाले फल और अन्य खाद्य स्रोत भालुओं को आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं।

शिकारी कम हुए, सरकार ने नियम बदले

जापान में एक और बड़ी समस्या प्रशिक्षित शिकारियों की कमी है। सरकार अब नए शिकारियों को तैयार करने और मौजूदा शिकारियों की क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रही है। 

सितंबर 2025 से जापान ने आबादी वाले इलाकों में खतरनाक भालुओं के खिलाफ Emergency Shooting की व्यवस्था भी शुरू की। इसके तहत स्थानीय प्रशासन तत्काल खतरा पैदा करने वाले भालुओं को गोली मारने की कार्रवाई कर सकता है। दिसंबर 2025 तक ऐसे 54 आपातकालीन Culling मामले दर्ज किए गए थे। 

अकिता में सेना की मदद

अकिता जैसे प्रभावित इलाकों में हालात इतने गंभीर हुए कि Self-Defense Forces की मदद भी ली गई। सैनिकों का काम भालुओं को पकड़ने के लिए लगाए गए पिंजरों की व्यवस्था और उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में सहायता करना रहा; भालुओं को गोली मारने का काम सैनिकों न

क्या सिर्फ भालुओं को मारना समाधान है?

बड़े पैमाने पर Culling के बावजूद विशेषज्ञों और संरक्षणवादियों के बीच बहस जारी है। उनका कहना है कि समस्या का स्थायी समाधान केवल भालुओं को मारना नहीं है। जंगलों में भोजन की उपलब्धता, गांवों की खाली होती आबादी, कचरा प्रबंधन और इंसानी बस्तियों की सुरक्षा पर भी काम करना होगा।

जापान के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इंसानों की सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की है। रिकॉर्ड हमलों ने सरकार को सख्त कदम उठाने पर मजबूर किया है, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले वर्षों में वैज्ञानिक और दीर्घकालिक Bear Management Policy ही इस संकट को नियंत्रित करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी। 

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