नई दिल्ली: मध्य पूर्व में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। हाल के दिनों में संघर्षविराम (सीजफायर) की उम्मीदें जताई जा रही थीं, लेकिन ईरान द्वारा इजरायल पर किए गए ताजा मिसाइल हमलों ने पूरे क्षेत्र में तनाव को फिर बढ़ा दिया है। इस घटनाक्रम के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि हमले नहीं रोके गए तो सीजफायर की संभावित डील प्रभावित हो सकती है। वहीं इजरायल ने भी जवाबी कार्रवाई के संकेत दिए हैं, जिससे क्षेत्र में बड़े सैन्य टकराव की आशंका बढ़ गई है।

ईरान ने इजरायल पर दागीं कई मिसाइलें
रिपोर्ट्स के अनुसार, बीती रात ईरान की ओर से इजरायल पर कई मिसाइलें दागी गईं। इजरायली अधिकारियों का दावा है कि देर रात बड़ी संख्या में मिसाइलें उनके क्षेत्र की ओर भेजी गईं, जिनमें से कई इजरायल और वेस्ट बैंक के आसमान में देखी गईं। सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत अलर्ट जारी किया और एयर डिफेंस सिस्टम को सक्रिय कर दिया।
हालांकि शुरुआती जानकारी के अनुसार इन हमलों में बड़े पैमाने पर जनहानि की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस हमले ने पहले से तनावपूर्ण स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
ट्रंप ने दी सख्त चेतावनी
ईरान के ताजा हमलों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि यदि ईरान अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखता है तो संघर्षविराम की दिशा में चल रही कूटनीतिक प्रक्रिया बाधित हो सकती है।
ट्रंप का कहना है कि क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए सभी पक्षों को संयम बरतना होगा। लगातार मिसाइल हमले केवल तनाव बढ़ाएंगे और किसी भी संभावित समझौते को कमजोर करेंगे। उनके बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस मुद्दे पर नई चर्चा शुरू हो गई है।
इजरायल ने भी दिया जवाबी कार्रवाई का संकेत
ईरान के हमले के बाद इजरायल ने कहा है कि वह अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। इजरायली अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यदि इस तरह के हमले जारी रहे तो उनका देश जवाबी कार्रवाई करने के लिए तैयार है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई तेज होती है तो इसका असर पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है। इससे क्षेत्रीय संघर्ष और व्यापक हो सकता है।
हिजबुल्लाह पर हमलों के बाद बढ़ा तनाव
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने पहले ही चेतावनी दी थी कि यदि लेबनान में हिजबुल्लाह से जुड़े ठिकानों पर हमला किया गया तो वह प्रतिक्रिया देगा। रविवार को इजरायली सेना ने लेबनान की राजधानी बेरूत में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हवाई हमले किए।
इसके कुछ समय बाद ईरान की ओर से इजरायल पर मिसाइल हमले किए गए, जिन्हें कई विश्लेषक जवाबी कार्रवाई के रूप में देख रहे हैं। इस घटनाक्रम ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है।
सीजफायर लागू होने के बाद पहला बड़ा हमला
इजरायल का दावा है कि अप्रैल की शुरुआत में लागू हुए नाजुक संघर्षविराम के बाद यह ईरान की ओर से किया गया पहला बड़ा मिसाइल हमला है। यदि यह दावा सही है तो इससे सीजफायर की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।
संघर्षविराम का उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच बढ़ते तनाव को कम करना और आगे की बातचीत का रास्ता खोलना था, लेकिन ताजा घटनाओं ने इस प्रक्रिया को मुश्किल बना दिया है।
ईरान ने कार्रवाई को बताया जवाब
तेहरान की ओर से पहले ही कहा गया था कि यदि इजरायल लेबनान में सैन्य कार्रवाई करेगा तो उसका जवाब दिया जाएगा। ईरान का कहना है कि उसकी कार्रवाई क्षेत्रीय घटनाओं की प्रतिक्रिया है और वह अपने सहयोगी समूहों पर होने वाले हमलों को नजरअंदाज नहीं करेगा।
हालांकि आधिकारिक स्तर पर विस्तृत बयान का इंतजार है, लेकिन क्षेत्रीय राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह संघर्ष अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं रह गया है और इसमें कई क्षेत्रीय शक्तियां अप्रत्यक्ष रूप से शामिल हैं।
हिजबुल्लाह ने संघर्षविराम को किया खारिज
रिपोर्ट्स के अनुसार, लेबनान और इजरायल के बीच अमेरिका की मध्यस्थता में संघर्षविराम को लेकर बातचीत हुई थी। हालांकि हिजबुल्लाह ने इस समझौते को स्वीकार नहीं किया और इसे खारिज कर दिया।
यही कारण है कि क्षेत्र में तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाया और समय-समय पर सैन्य गतिविधियां जारी रहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक सभी प्रमुख पक्ष किसी समझौते पर सहमत नहीं होंगे, तब तक स्थायी शांति स्थापित करना चुनौतीपूर्ण रहेगा।
लेबनान में दो लोगों की मौत, कई घायल
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इजरायल द्वारा एक आवासीय इमारत पर किए गए हमले में दो लोगों की मौत हो गई जबकि लगभग 20 अन्य घायल हुए हैं। घायलों को स्थानीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया है और राहत एवं बचाव कार्य जारी है।
मानवीय संगठनों ने नागरिक क्षेत्रों में बढ़ती सैन्य गतिविधियों पर चिंता व्यक्त की है और सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का पालन करने की अपील की है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की बढ़ी चिंता
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को लेकर दुनिया के कई देशों की नजरें इस घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही कूटनीतिक समाधान नहीं निकला तो यह संघर्ष व्यापक क्षेत्रीय संकट का रूप ले सकता है। अमेरिका सहित कई देश लगातार शांति वार्ता और तनाव कम करने की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं।
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