Iran Nuclear : ईरान के परमाणु स्थलों का निरीक्षण होकर रहेगा, बोले आईएईए प्रमुख ग्रॉसी

टोक्यो: अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के महानिदेशक राफेल मारियानो ग्रॉसी ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बड़ा बयान देते हुए स्पष्ट किया है कि एजेंसी के निरीक्षक ईरान के परमाणु स्थलों का निरीक्षण अवश्य करेंगे। उन्होंने कहा कि यह निरीक्षण अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम समझौते का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसे टाला नहीं जा सकता। ग्रॉसी ने जोर देकर कहा कि IAEA की जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों तक ही सीमित रहे।

परमाणु स्थलों तक पहुंच जरूरी

टोक्यो में मीडिया से बातचीत के दौरान ग्रॉसी ने कहा कि किसी भी परमाणु समझौते को प्रभावी बनाने के लिए निरीक्षकों को संबंधित परमाणु केंद्रों तक पहुंच मिलना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि एजेंसी का काम परमाणु गतिविधियों की निगरानी और सत्यापन करना है, जिसके लिए मौके पर जाकर निरीक्षण करना अनिवार्य है।

‘निरीक्षण होकर रहेगा’

ग्रॉसी ने कहा, “मैं राजनीतिक बयानों को समझ सकता हूं, लेकिन दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने जिस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, उसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि परमाणु सामग्री और परमाणु स्थलों की निगरानी IAEA करेगा। इसके लिए हमें वहां जाकर निरीक्षण करना होगा। यह एक दिन बाद हो, एक सप्ताह बाद हो या 10 दिन बाद, लेकिन यह होकर रहेगा।”

ईरान के यूरेनियम भंडार पर दुनिया की नजर

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के पास इतना अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम मौजूद है, जिससे लगभग 10 परमाणु बम बनाए जा सकते हैं। हालांकि, ईरान लगातार यह दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। ईरान दुनिया का एकमात्र ऐसा देश माना जाता है, जिसने परमाणु हथियार कार्यक्रम से इनकार करते हुए भी यूरेनियम को 60 प्रतिशत तक संवर्धित किया है, जो हथियार-ग्रेड स्तर के बेहद करीब है।

अमेरिका और ईरान के बयानों में विरोधाभास

IAEA प्रमुख का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और ईरान परमाणु स्थलों के निरीक्षण को लेकर अलग-अलग दावे कर रहे हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने निरीक्षण की संभावना जताई है, जबकि ईरान ने फिलहाल परमाणु केंद्रों तक निरीक्षकों की पहुंच से इनकार किया है।

ईरान ने निरीक्षण पर रखी शर्त

ईरान के एक वरिष्ठ राजनयिक ने IAEA प्रमुख की टिप्पणी को खारिज करते हुए कहा कि परमाणु स्थलों का निरीक्षण केवल अंतिम समझौता होने के बाद ही संभव होगा। वहीं, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने भी स्पष्ट किया कि जिन परमाणु स्थलों को पिछले वर्ष अमेरिका ने निशाना बनाया था, वहां फिलहाल IAEA निरीक्षकों के दौरे की कोई योजना नहीं है।

समझौते की सफलता के लिए अहम है निरीक्षण

विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम समझौते की सफलता काफी हद तक IAEA के निरीक्षण पर निर्भर करेगी। समझौते के तहत ईरान को अपने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार का स्तर कम करना होगा, जिसकी पुष्टि केवल अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण के जरिए ही संभव है।

बढ़ सकती है कूटनीतिक हलचल

राफेल ग्रॉसी के ताजा बयान के बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर कूटनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है। अब दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि ईरान IAEA निरीक्षकों को अपने परमाणु स्थलों तक पहुंच देने के लिए कब और किन शर्तों पर सहमत होता है।

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