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Terror Link : फ्लाईदुबई को-पायलट पर आतंकी कनेक्शन का शक, क्रैश साजिश की जांच

फ्लाईदुबई के को-पायलट पर गंभीर आरोप, कट्टरपंथी विचारों और विमान क्रैश की साजिश की जांच तेज

दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में हुई सनसनीखेज घटना की जांच अब को-पायलट हमाम अल-हम्मामी की पृष्ठभूमि तक पहुंच गई है। 30 सितंबर को उड़ान के दौरान को-पायलट ने भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर कथित तौर पर हमला किया था। इस दौरान विमान अचानक नीचे की ओर जाने लगा और एक बड़ा हादसा होते-होते बचा। यात्रियों और क्रू की मदद से स्थिति को संभाला गया और विमान को सऊदी अरब के तबुक एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतारा गया।

कौन है हमाम अल-हम्मामी?

जांच से जुड़े सूत्रों और कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में को-पायलट की पहचान हमाम अल-हम्मामी के रूप में की गई है। वह ओमान का नागरिक बताया जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, उसके अतीत को लेकर पहले भी सुरक्षा संबंधी चिंताएं सामने आई थीं। ओमान में उसे कथित कट्टरपंथी विचारों से जुड़े संदेह के कारण विमान उड़ाने से प्रतिबंधित किए जाने की बात सामने आई है। बाद में वह फ्लाईदुबई से जुड़ा और करीब आठ महीने पहले कंपनी में शामिल हुआ था।

अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि जिस व्यक्ति को पहले उड़ान से जुड़े सुरक्षा कारणों से प्रतिबंधित किया गया था, वह अंतरराष्ट्रीय यात्री विमान का को-पायलट कैसे बन गया। इस पूरे मामले में एयरलाइन की भर्ती और सुरक्षा जांच प्रक्रिया भी जांच के दायरे में है।

सोशल मीडिया और कट्टरपंथी सामग्री की भी जांच

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जांचकर्ताओं की नजर हमाम अल-हम्मामी की सोशल मीडिया गतिविधियों और उसके कथित डिजिटल रिकॉर्ड पर भी है। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि उसके ऑनलाइन अकाउंट्स पर चरमपंथी विचारधारा से जुड़ी तस्वीरें, वीडियो और अल-कायदा से संबंधित सामग्री दिखाई देती थी। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि और उनकी पूरी प्रामाणिकता अभी आधिकारिक जांच का विषय है।

इसके अलावा उसके सामान से इजराइल विरोधी और ‘फ्री फिलिस्तीन’ से संबंधित सामग्री मिलने की रिपोर्ट भी सामने आई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि ये सामग्री महज व्यक्तिगत राजनीतिक विचारों का हिस्सा थी या फिर विमान में हुई घटना से उसका कोई सीधा संबंध था।

क्या विमान को जानबूझकर क्रैश करने की कोशिश थी?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या को-पायलट का उद्देश्य विमान को इजराइल में गिराना था। कुछ रिपोर्टों में जांच से जुड़े सूत्रों के हवाले से ऐसा दावा किया गया है। हालांकि, संयुक्त अरब अमीरात की आधिकारिक जांच अभी इस बात की पड़ताल कर रही है कि घटना के पीछे आतंकवादी मकसद, पूर्व नियोजित साजिश या किसी अन्य कारण की भूमिका थी या नहीं। इसलिए फिलहाल इसे अंतिम रूप से आतंकी हमला कहना जल्दबाजी होगी।

कैसे बची 180 से ज्यादा लोगों की जान?

घटना के दौरान विमान करीब 14,000 से 16,000 फीट तक तेजी से नीचे गया। कैप्टन स्मित मच्छार घायल होने के बावजूद कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाब रहे। इसके बाद यात्रियों और क्रू सदस्यों ने को-पायलट को काबू करने में मदद की। विमान में मौजूद ऑफ-ड्यूटी पायलटों ने भी नियंत्रण संभालने में सहायता की और फ्लाइट को तबुक में सुरक्षित उतारा गया।

फ्लाईदुबई ने घटना की पूरी आधिकारिक जांच में सहयोग की बात कही है और तेल अवीव की उड़ानों को अस्थायी रूप से रोक दिया था। फिलहाल जांच का मुख्य फोकस हमाम अल-हम्मामी की पृष्ठभूमि, उसकी भर्ती प्रक्रिया, कथित कट्टरपंथी गतिविधियों और उड़ान के दौरान उसके व्यवहार के बीच संबंध स्थापित करने पर है।

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