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China Turkey : चीन-तुर्की की बढ़ती करीबी पर निर्वासित ईस्ट तुर्किस्तान सरकार भड़की, उइगर मुद्दे पर सवाल

चीन-तुर्की की बढ़ती करीबी पर निर्वासित ईस्ट तुर्किस्तान सरकार का हमला, उइगर मुसलमानों को लेकर एर्दोगन पर साधा निशाना

नई दिल्ली: चीन और तुर्की के बीच लगातार मजबूत हो रहे रक्षा और सुरक्षा सहयोग को लेकर निर्वासित ईस्ट तुर्किस्तान सरकार (East Turkistan Government in Exile) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। सरकार ने आरोप लगाया कि तुर्की आर्थिक और रणनीतिक हितों के लिए चीन के साथ अपने संबंध मजबूत कर रहा है, जबकि उइगर, किर्गिज, कजाख और अन्य तुर्क मूल के मुसलमानों के मानवाधिकारों की अनदेखी की जा रही है। निर्वासित सरकार ने इसे तुर्क समुदाय के साथ “दशकों से जारी विश्वासघात” करार दिया है।

दरअसल, यह विवाद 16 जुलाई को तुर्की की उप विदेश मंत्री बेरिस एकिन्सी और चीन के उप विदेश मंत्री मियाओ देयू के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद सामने आया। इस बैठक में दोनों देशों ने सुरक्षा, कानून प्रवर्तन और आतंकवाद-रोधी सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई। इसके साथ ही तुर्की ने एक बार फिर चीन की ‘वन चाइना’ नीति के प्रति अपना समर्थन दोहराया।

सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर बनी सहमति

चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, दोनों देशों ने कानून प्रवर्तन, सीमा सुरक्षा, खुफिया सहयोग और अन्य सुरक्षा संबंधी क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने पर चर्चा की। तुर्की ने यह भी भरोसा दिलाया कि उसकी धरती का इस्तेमाल चीन की संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ किसी भी गतिविधि के लिए नहीं होने दिया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान ऐसे समय आया है जब चीन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिनजियांग (जिसे उइगर समुदाय पूर्वी तुर्किस्तान कहता है) से जुड़े मानवाधिकार आरोपों का लगातार सामना कर रहा है।

निर्वासित ईस्ट तुर्किस्तान सरकार ने लगाया विश्वासघात का आरोप

चीन-तुर्की वार्ता के बाद निर्वासित ईस्ट तुर्किस्तान सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक विस्तृत बयान जारी किया। इसमें कहा गया कि तुर्की अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को दरकिनार कर चीन के साथ रणनीतिक साझेदारी को प्राथमिकता दे रहा है।

बयान में दावा किया गया कि उइगर, किर्गिज, कजाख और अन्य तुर्क मूल के लोग पूर्वी तुर्किस्तान में दमन, निगरानी और सांस्कृतिक पहचान मिटाने जैसी नीतियों का सामना कर रहे हैं। निर्वासित सरकार का आरोप है कि तुर्की की मौजूदा नीति इन समुदायों के हितों के विपरीत है।

तुर्की से चीन के साथ सुरक्षा समझौता खत्म करने की मांग

निर्वासित सरकार ने यह भी बताया कि उसके विदेश एवं सुरक्षा मंत्री सालेह हुदयार ने हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान तुर्की के उप विदेश मंत्री लेवेंट गुमरुकु से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने तुर्की से अपील की कि वह पूर्वी तुर्किस्तान के लोगों की आवाज बने और चीन के साथ खुफिया तथा सुरक्षा सहयोग समाप्त करे।

निर्वासित सरकार का दावा है कि चीन और तुर्की के बीच सुरक्षा सहयोग वर्ष 1996 से जारी है और इसी सहयोग के कारण चीन के खिलाफ आवाज उठाने वाले उइगर कार्यकर्ताओं की निगरानी और गतिविधियों पर दबाव बढ़ा है।

‘पूर्वी तुर्किस्तान तुर्क लोगों की मातृभूमि’

अपने बयान में निर्वासित ईस्ट तुर्किस्तान सरकार ने कहा कि पूर्वी तुर्किस्तान तुर्क मूल के लोगों की ऐतिहासिक मातृभूमि है। सरकार का आरोप है कि 1940 के दशक के अंत में चीन ने इस क्षेत्र पर सैन्य कार्रवाई कर नियंत्रण स्थापित किया और तब से वहां स्थानीय लोगों के अधिकारों का लगातार हनन हो रहा है।

बयान में कहा गया, “यह केवल कूटनीति नहीं बल्कि अपराध में साझेदारी है।” सरकार का दावा है कि चीन के साथ तुर्की का सुरक्षा सहयोग पूर्वी तुर्किस्तान की स्वतंत्रता की मांग करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई को और मजबूत करता है।

उइगर मुद्दे पर पहले भी उठते रहे हैं सवाल

उइगर मुसलमानों के मानवाधिकारों को लेकर चीन लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय आलोचना का सामना करता रहा है। कई पश्चिमी देशों और मानवाधिकार संगठनों ने शिनजियांग क्षेत्र में हिरासत शिविरों, धार्मिक स्वतंत्रता पर प्रतिबंध और सांस्कृतिक पहचान को कमजोर करने जैसे आरोप लगाए हैं। हालांकि, चीन इन सभी आरोपों को खारिज करता रहा है और अपने कदमों को आतंकवाद एवं कट्टरपंथ से निपटने की नीति का हिस्सा बताता है।

चीन-तुर्की संबंधों का रणनीतिक महत्व

विश्लेषकों के अनुसार, हाल के वर्षों में चीन और तुर्की के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में सहयोग तेजी से बढ़ा है। ऐसे में दोनों देशों के रिश्तों का असर केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि मध्य एशिया, पश्चिम एशिया और वैश्विक भू-राजनीति पर भी पड़ सकता है। वहीं, निर्वासित ईस्ट तुर्किस्तान सरकार का कहना है कि यदि तुर्की चीन के साथ सुरक्षा सहयोग जारी रखता है तो इससे उइगर और अन्य तुर्क मूल के समुदायों की चिंताएं और गहरी हो सकती हैं।

हालांकि, चीन और तुर्की की सरकारों ने निर्वासित ईस्ट तुर्किस्तान सरकार के इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की है।

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