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बदायूं में गंगा किनारे के 11 गांवों में घुसा बाढ़ का पानी, 14 हजार से अधिक लोग फंसे; तस्वीरें

Flood in Budaun: बदायूं जिले में गंगा का जलस्तर तीन दिनों से खतरे के निशान से ऊपर चल रहा है। बुधवार को यह खतरे के निशान से सात सेंटीमीटर ऊपर चला गया। नदी किनारे के गांवों में बाढ़ आ गई है। ग्रामीणों ने एहतियात के तौर पर ऊंचे स्थानों पर शरण लेना शुरू कर दिया है। जिला प्रशासन भी लगातार चौकियों के माध्यम से गांव और गंगा नदी पर नजर रखे हुए है।गंगा में आई बाढ़ का पानी बदायूं जिले के 11 गांवों में घुस गया। इससे 14 हजार से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। इसमें दातागंज तहसील के सात और सहसवान के चार गांव हैं। इन गांवों में तीन से चार फीट तक पानी भर गया है। घरों में रखी खाद्य सामग्री और कपड़े भीग गए हैं। लोग छतों पर जरूरत की सामग्री जुटाकर रह रहे हैं। मवेशियों को नजदीक के ऊंचे स्थान पर पहुंचा दिया है।

जिले में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। बुधवार को यह खतरे के निशान से सात सेंटीमीटर ऊपर चला गया। कछला में गंगा के खतरे का निशान 162.44 है। बुधवार को जलस्तर 162.51 मीटर पहुंच गया था। दातागंज के गांव कमलईयापुर, कदम नगला, दलपतनगला, रैपुरा, जसवंत नगला, प्रेमी नगला, जटा, ठकुरी नगला में दो से तीन फुट तक बाढ़ का पानी भर गया। इससे 10 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हैं। प्रशासन की ओर से आवाजाही के लिए सभी गांवों में स्टीमर लगाया गया है। गांव के पंचायत घरों और विद्यालयों में शिविर बनाए गए हैं, लेकिन अधिकतर लोग गांव में ही हैं। वह छतों पर रह रहे हैं।

गृहस्थी का सामान भीगा 

रैपुरा के गणेश कुमार ने बताया कि घर के अंदर पानी भरने से गेहूं, भूसा, कपड़ा सहित गृहस्थी का सामान भीग गया है। परिवार के सभी लोग छत पर रात गुजार रहे हैं। जसवंत नगला के सुधाकर ने बताया कि पानी भर जाने के कारण मोटरसाइकिल, बिस्तर और गृहस्थी का सामान डूब गया है। परिवार के लोग छत पर गुजारा कर रहे हैं। विधायक राजीव कुमार सिंह ने उसहैत के जाटी और जटा गांव का निरीक्षण कर ग्रामीणों का हाल जाना और उन्हें राहत सामग्री देने की निर्देश एसडीएम को दिए। हालांकि अभी गांव के अंदर पानी नहीं पहुंच पाया है। इस वजह से ग्रामीण अभी रुके हुए हैं।
प्रधान बोले, दो दिन बाद पहुंची सहायता राशि

रैपुरा के प्रधान राकेश कश्यप ने बताया कि गांव में दो दिन से पानी भरा हुआ है। इस वजह से लोग कहीं आवाजाही नहीं कर पा रहे हैं। जानवरों को गांव के बाहर ऊंची जगहों पर बांध दिया गया है। वहीं पर भूसा दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि दो दिन बाद प्रशासन की ओर से बुधवार को स्टीमर लगाकर ग्रामीणों को खाद्य सामग्री का वितरण किया गया। गांव के बलवीर, राजवीर, श्रीकृष्ण, श्रीराम, गजराम, देव सिंह, सीताराम, राजेश, मुकेश ने बताया कि खेतों में हरी सब्जी की फसल की थी। वह पानी में डूब गई है।

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