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Franca Viola Story : फ्रांका वियोला: आरोपी से शादी से इनकार कर बदला इतिहास

रेप करने वाले से शादी करने से किया इनकार, 17 साल की लड़की ने इटली की पुरानी परंपरा को दी चुनौती

Franca Viola Story: दिसंबर 1965 में इटली की 17 वर्षीय फ्रांका वियोला ने एक ऐसा फैसला लिया, जिसने महिलाओं के अधिकारों और सामाजिक प्रतिष्ठा से जुड़ी पुरानी सोच को चुनौती दी। अपहरण और यौन हिंसा का शिकार होने के बाद उन पर अपने ही पूर्व मंगेतर से शादी करने का दबाव था, लेकिन उन्होंने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। उनकी लड़ाई आगे चलकर इटली में महिलाओं के अधिकारों के इतिहास का अहम हिस्सा बनी।

क्या है पूरा मामला?

दिसंबर 1965 में इटली के सिसिली द्वीप पर स्थित आल्कामो कस्बे में फ्रांका वियोला के साथ एक गंभीर अपराध हुआ। उस समय उनकी उम्र महज 17 साल थी। उनके पूर्व मंगेतर फिलिप्पो मेलोदिया ने कथित तौर पर अपने साथियों की मदद से उनका अपहरण कर लिया। फ्रांका को कई दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया और उनके साथ यौन हिंसा की गई।

इस घटना के बाद फ्रांका के सामने एक ऐसा विकल्प रखा गया, जो उस दौर की सामाजिक सोच को दर्शाता था। उनसे अपेक्षा की गई कि वह अपने साथ अपराध करने वाले व्यक्ति से शादी कर लें, ताकि परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा बचाई जा सके।

अपराधी से शादी करने का दबाव क्यों था?

1960 के दशक में इटली के कानून और सामाजिक परंपराओं में महिलाओं की प्रतिष्ठा को परिवार की इज्जत से जोड़कर देखा जाता था। उस समय इटली की दंड संहिता के अनुच्छेद 544 में तथाकथित ‘मैरिटो रिपारातोरे’ यानी प्रतिष्ठा बहाल करने वाले विवाह का प्रावधान था।

इस व्यवस्था के तहत कुछ यौन अपराधों से जुड़े मामलों में पीड़िता और आरोपी की शादी हो जाने पर अपराध के कानूनी परिणाम समाप्त हो सकते थे। इस प्रावधान की आलोचना इसलिए होती थी, क्योंकि इसमें पीड़िता के अधिकारों और मानसिक स्थिति से ज्यादा सामाजिक प्रतिष्ठा को प्राथमिकता दी जाती थी।

हालांकि, फ्रांका वियोला ने इस व्यवस्था के सामने झुकने से इनकार कर दिया।

परिवार ने दिया साथ, अदालत में पहुंचा मामला

फ्रांका के पिता ने भी अपनी बेटी के फैसले का समर्थन किया। परिवार ने आरोपी के साथ उनकी शादी कराने के बजाय न्याय के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने का रास्ता चुना।

यह निर्णय आसान नहीं था। परिवार को धमकियों और सामाजिक दबाव का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद फ्रांका ने अपना फैसला नहीं बदला। मामला अदालत पहुंचा और 1966 में फिलिप्पो मेलोदिया को दोषी ठहराया गया।

इस घटना ने इटली में महिलाओं की सहमति, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और यौन अपराधों से जुड़े कानूनों पर बहस को तेज किया।

1981 में खत्म हुआ विवादित कानून

फ्रांका वियोला के साहस ने सामाजिक सोच को चुनौती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हालांकि, उनके मामले के तुरंत बाद कानून नहीं बदला। इटली ने 1981 में दंड संहिता के अनुच्छेद 544 को समाप्त किया। इस तरह तथाकथित प्रतिष्ठा बहाल करने वाले विवाह की कानूनी व्यवस्था खत्म हो गई।

आज भी प्रासंगिक है फ्रांका की कहानी

फ्रांका वियोला की कहानी केवल एक महिला के साहस की कहानी नहीं है, बल्कि उस सामाजिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाती है, जिसमें अपराध का बोझ पीड़िता पर डाल दिया जाता है।

किसी महिला के साथ हिंसा होने पर उसकी प्रतिष्ठा, भविष्य और परिवार की इज्जत को लेकर सवाल उठाए जाते हैं, जबकि जिम्मेदारी अपराध करने वाले व्यक्ति की होनी चाहिए।

फ्रांका ने शादी से इनकार करके यह स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति को अपनी इच्छा के विरुद्ध रिश्ता स्वीकार करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

फ्रांका वियोला का संघर्ष आज भी याद दिलाता है कि सामाजिक प्रतिष्ठा से ऊपर व्यक्ति की गरिमा, सहमति और न्याय का अधिकार है।

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