
ब्रिटेन में स्कूल यूनिफॉर्म के यौन चित्रण के खिलाफ छात्राओं ने अभियान शुरू किया है। ऑनलाइन याचिका के जरिए पोर्नोग्राफिक सामग्री में स्कूल ड्रेस के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की जा रही है। छात्राओं का कहना है कि इस चलन से लड़कियों के सम्मान, सुरक्षा और रोजमर्रा के स्कूल जीवन पर असर पड़ सकता है।
लंदन: स्कूल यूनिफॉर्म विद्यार्थियों की पहचान और स्कूल से जुड़ाव का प्रतीक होती है। लेकिन जब इसी पोशाक को पोर्नोग्राफिक सामग्री में यौन आकर्षण के रूप में पेश किया जाता है, तो यह सामाजिक चिंता का विषय बन जाता है। ब्रिटेन में कुछ छात्राओं ने इसी मुद्दे को उठाते हुए स्कूल यूनिफॉर्म के अश्लील चित्रण के खिलाफ आवाज बुलंद की है। उनकी मांग है कि इस तरह की सामग्री पर रोक लगाने के लिए प्रभावी कानूनी कदम उठाए जाएं।
15 साल की छात्राओं ने क्यों शुरू किया अभियान?
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इंग्लैंड के ऑक्सफोर्डशायर के बिसेस्टर स्थित कूपर स्कूल की 15 वर्षीय छात्राएं आयलिन और मे ने इस मुद्दे पर अभियान शुरू किया। दोनों स्कूल के ‘लिटिल फेमिनिस्ट बुक क्लब’ से जुड़ी हैं। चर्चा के दौरान स्कूल यूनिफॉर्म के यौन चित्रण और उसकी बिक्री को लेकर सवाल उठा, जिसके बाद उन्होंने इस विषय पर सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाने का फैसला किया।
छात्राओं ने ऑनलाइन याचिका के माध्यम से मांग की कि पोर्नोग्राफिक सामग्री में स्कूल ड्रेस के इस्तेमाल को रोकने के लिए कानून बनाया जाए। उनका मानना है कि स्कूल यूनिफॉर्म बच्चों और किशोरों की सामान्य पोशाक है, इसलिए इसे यौन संदर्भों में पेश किए जाने के प्रभावों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
यूनिफॉर्म पहनने में असहज क्यों महसूस कर रही हैं लड़कियां?
इस अभियान का सबसे महत्वपूर्ण पहलू छात्राओं की व्यक्तिगत सुरक्षा और सहजता से जुड़ा है। उनका कहना है कि स्कूल यूनिफॉर्म का लगातार यौन चित्रण उन लड़कियों के लिए परेशानी पैदा कर सकता है, जिन्हें रोजाना यही कपड़े पहनकर स्कूल जाना होता है।
छात्राओं ने अपने अनुभवों और साथियों की चिंताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि कम उम्र में ही लड़कियों को अनचाहे ध्यान और अनुचित टिप्पणियों का सामना करना पड़ सकता है। मे ने भी यूनिफॉर्म पहनकर स्कूल के बाहर जाने में असहज महसूस करने की बात कही।
छात्राओं की चिंता है कि जब किसी सामान्य पोशाक को अश्लील संदर्भों में दिखाया जाता है, तो उससे जुड़ी सामाजिक धारणाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि, इस संबंध को समझने के लिए अलग-अलग परिस्थितियों और उपलब्ध आंकड़ों को ध्यान में रखना जरूरी है।
सर्वे में सामने आए थे अनचाहे व्यवहार के मामले
अभियान के समर्थन में प्लान इंटरनेशनल की 2018 की एक रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, 14 से 21 वर्ष की आयु के 1,004 प्रतिभागियों के सर्वे में 35 प्रतिशत ने स्कूल यूनिफॉर्म पहनने के दौरान अनचाहे यौन व्यवहार या ध्यान का अनुभव होने की बात कही थी।
रिपोर्ट में आठ प्रतिशत प्रतिभागियों ने बताया कि किसी अजनबी ने उनकी अनुमति के बिना उनकी तस्वीर या वीडियो बनाया था। इसमें स्कर्ट के नीचे से तस्वीर लेने जैसी घटनाएं भी शामिल थीं, जिन्हें अंग्रेजी में ‘अपस्कर्टिंग’ कहा जाता है।
ये आंकड़े छात्राओं की चिंताओं को समझने का एक संदर्भ देते हैं। हालांकि, यह 2018 का सर्वे है और इसे ब्रिटेन की मौजूदा स्थिति का ताजा आकलन नहीं माना जाना चाहिए।
क्या स्कूल यूनिफॉर्म पर लगेगा प्रतिबंध?
छात्राओं की मांग है कि ब्रिटिश सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करे और जरूरत पड़ने पर कानून में बदलाव करे। याचिका को हजारों लोगों का समर्थन मिलने की खबरों ने इस बहस को और चर्चा में ला दिया है। हालांकि, किसी याचिका पर हस्ताक्षर होना अपने आप में कानून बनने का संकेत नहीं है। इसके लिए सरकार और संसद की प्रक्रिया जरूरी होगी।
छात्राओं का तर्क है कि समस्या का समाधान लड़कियों के कपड़ों पर अतिरिक्त पाबंदियां लगाने में नहीं, बल्कि उनके प्रति सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करने में है। उनके अनुसार, स्कूल यूनिफॉर्म पहनने वाली छात्राओं को अपने कपड़ों की वजह से असहज या असुरक्षित महसूस नहीं करना चाहिए।
बच्चों की सुरक्षा और डिजिटल सामग्री पर बहस तेज
यह मामला केवल स्कूल ड्रेस तक सीमित नहीं है। इसके साथ बच्चों की गरिमा, ऑनलाइन सामग्री की जिम्मेदारी और महिलाओं के प्रति सामाजिक नजरिए जैसे व्यापक सवाल भी जुड़े हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सामग्री के प्रसार के दौर में यह बहस महत्वपूर्ण हो जाती है कि किस तरह की सामग्री को नियंत्रित किया जाना चाहिए और मौजूदा कानून ऐसे मामलों से निपटने के लिए कितने प्रभावी हैं।

ब्रिटेन की छात्राओं का यह अभियान अब इस सवाल को सामने ला रहा है कि स्कूल यूनिफॉर्म की पहचान और उसके सम्मान की रक्षा के लिए क्या नए कानूनी कदम जरूरी हैं। आने वाले समय में इस मांग पर सरकार और संबंधित संस्थाओं की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।




