
दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की एक यात्री उड़ान में हुए गंभीर हमले के बाद ओमानी नागरिक को-पायलट की कथित सोशल मीडिया गतिविधियां जांच के केंद्र में आ गई हैं। इजरायली अधिकारियों के अनुसार, को-पायलट के सोशल मीडिया अकाउंट पर यहूदियों को मारने से जुड़ी बातें सामने आई हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन पोस्ट से उसके संभावित कट्टरपंथी प्रभाव और हमले के पीछे की विचारधारा को समझने में मदद मिल सकती है। हालांकि, जांच अभी जारी है और हमले के अंतिम मकसद पर आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
विमान में आखिर हुआ क्या था?
यह घटना 30 सितंबर 2026 को फ्लाईदुबई की दुबई-तेल अवीव उड़ान के दौरान हुई। विमान में 174 यात्री और आठ क्रू सदस्य सवार थे। उड़ान के दौरान ओमानी को-पायलट ने कथित तौर पर भारतीय कैप्टन स्मित मछार पर हमला किया। इसके बाद विमान अचानक नीचे जाने लगा और यात्रियों तथा क्रू सदस्यों ने हमलावर को काबू करने में भूमिका निभाई। विमान को बाद में सऊदी अरब के तबूक में आपात स्थिति में उतारा गया।
भारतीय कैप्टन स्मित मछार हमले में घायल हुए। रिपोर्टों के अनुसार, गंभीर चोटों के बावजूद उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाबी हासिल की, जिसके बाद यात्रियों और विमान में मौजूद अन्य पायलटों को अंदर पहुंचकर स्थिति संभालने का मौका मिला। बाद में दो ऑफ-ड्यूटी पायलटों ने भी विमान को नियंत्रित करने में मदद की।
सोशल मीडिया पोस्ट ने बढ़ाई जांच की दिशा
इजरायली अधिकारियों के अनुसार, संदिग्ध को-पायलट के सोशल मीडिया अकाउंट पर यहूदियों की हत्या से संबंधित टिप्पणियां मिली हैं। एक इजरायली अधिकारी ने The Times of Israel को बताया कि उसके अकाउंट से कथित तौर पर जिहादी विचारधारा से प्रभावित होने के संकेत मिले और वह यहूदियों को मारने की बात करता था।
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी कहा कि शुरुआती जांच में को-पायलट के कट्टरपंथी इस्लामी विचारधारा से प्रभावित होने के संकेत मिले हैं। हालांकि, उन्होंने साथ ही यह स्पष्ट किया कि घटना के मकसद के बारे में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही निकाला जा सकता है।
यहां यह अंतर महत्वपूर्ण है कि सोशल मीडिया पर कथित पोस्ट और अधिकारियों के शुरुआती आकलन जांच में सुराग हो सकते हैं, लेकिन इन्हें अपने आप में अंतिम रूप से स्थापित मकसद नहीं माना जा सकता। UAE समेत संबंधित एजेंसियां घटना के आतंकवादी मकसद और संभावित पूर्व नियोजन की भी जांच कर रही हैं।
को-पायलट ने कथित तौर पर खुद को मारने की बात भी कही
घटना से जुड़े अधिकारियों और यात्रियों के बयानों के अनुसार, हमले के बाद को-पायलट ने अमीराती क्रू सदस्यों से उसे मारने के लिए कहा था। इजरायली अधिकारियों ने इस आधार पर उसके व्यवहार को संभावित आत्मघाती इरादे से भी जोड़कर देखा है। हालांकि, यह भी जांच का विषय है कि उसका वास्तविक उद्देश्य क्या था और क्या वह विमान को जानबूझकर दुर्घटनाग्रस्त करने की कोशिश कर रहा था।
सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल
इस घटना के बाद विमानन सुरक्षा को लेकर कई सवाल सामने आए हैं। खास तौर पर यह जांच की जा रही है कि ओमान जैसे ऐसे देश के नागरिक को इजरायल जाने वाली उड़ान में को-पायलट के रूप में काम करने की अनुमति कैसे मिली, जबकि ओमान और इजरायल के बीच राजनयिक संबंध नहीं हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, इजरायल में ऐसे देशों के नागरिकों की उड़ानों से जुड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल पर भी अब समीक्षा की जा रही है।
दूसरा सवाल यह है कि कॉकपिट में मौजूद आपातकालीन उपकरण का इस्तेमाल हमले में कैसे हुआ। रिपोर्टों में कॉकपिट में मौजूद एक आपातकालीन कुल्हाड़ी के इस्तेमाल की संभावना का उल्लेख किया गया है, लेकिन इसकी भी जांच की जा रही है।
UAE में जारी है जांच
सऊदी अधिकारियों ने प्रारंभिक कार्रवाई के बाद को-पायलट और घायल कैप्टन को UAE भेज दिया है। UAE की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, वहां यह जांच शुरू की गई है कि घटना किसी आतंकवादी गतिविधि या आतंकवादी मकसद से जुड़ी थी या नहीं। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आरोपी ने अकेले कार्रवाई की या उसके पीछे कोई अन्य व्यक्ति या संगठन था।
घटना के बाद फ्लाईदुबई ने इजरायल आने-जाने वाली अपनी उड़ानें अस्थायी रूप से निलंबित कर दी हैं। इस हमले ने न केवल विमान में सवार यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि एयरलाइन स्टाफ की जांच, कॉकपिट सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय विमानन मार्गों पर सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा की जरूरत को भी सामने ला दिया है।

फिलहाल जांच का सबसे अहम हिस्सा को-पायलट की कथित सोशल मीडिया गतिविधियों, उसके व्यवहार, हमले की पूर्व योजना और संभावित विचारधारात्मक प्रभावों के बीच संबंध स्थापित करना है। जब तक जांच पूरी नहीं होती, उसके मकसद और संभावित आतंकी कनेक्शन को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।




