
उत्तर प्रदेश में 16 अक्टूबर को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव में संख्या बल के आधार पर भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच मुकाबले की तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट है, लेकिन अतिरिक्त सीट को लेकर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ गई हैं। इसी बीच बीजेपी की सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के विधायकों को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
SBSP प्रमुख और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के दौरान कथित तौर पर अपनी पार्टी के कुछ विधायकों को लेकर चिंता जताई। रिपोर्टों के मुताबिक, राजभर ने कहा कि उनकी पार्टी के दो विधायक उनके नियंत्रण में नहीं हैं और वे राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं। हालांकि, यह बात अभी राजनीतिक दावे और संभावित क्रॉस वोटिंग के तौर पर सामने आई है; मतदान से पहले वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं होगी।
10 सीटों पर होना है राज्यसभा चुनाव
निर्वाचन आयोग ने उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान की तारीख तय की है। इन सीटों पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल नवंबर में समाप्त हो रहा है। विधानसभा में मौजूदा संख्या बल के आधार पर बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन की कई सीटों पर मजबूत स्थिति है, जबकि समाजवादी पार्टी भी अपनी निर्धारित सीटों के लिए पर्याप्त संख्या रखती है।
राज्यसभा चुनाव में एक उम्मीदवार को जीतने के लिए प्रथम वरीयता के 37 वोटों की जरूरत होती है। यही वजह है कि 10वीं सीट को लेकर विधायकों के समर्थन का गणित महत्वपूर्ण हो गया है। बीजेपी और एसपी दोनों ही अपने-अपने खेमे के विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश कर रहे हैं।
सपा तीसरी सीट के लिए जुटा रही संख्या
समाजवादी पार्टी ने राज्यसभा चुनाव के लिए रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी को उम्मीदवार बनाया है। पार्टी के पास मौजूदा विधानसभा संख्या के आधार पर दो सीटों के लिए पर्याप्त समर्थन है। इसके साथ ही अखिलेश यादव तीसरे उम्मीदवार के लिए भी संख्या जुटाने की कोशिश कर रहे हैं।
अखिलेश यादव ने भी संकेत दिया है कि पार्टी तीसरी सीट के लिए जरूरी संख्या जुटाने के बाद ही आगे बढ़ेगी। ऐसे में बीजेपी के सहयोगी दलों के विधायकों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
अब्बास अंसारी की अखिलेश से मुलाकात
इसी राजनीतिक घटनाक्रम के बीच SBSP विधायक अब्बास अंसारी ने 1 अक्टूबर को लखनऊ में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच करीब एक से डेढ़ घंटे तक बातचीत हुई। मुलाकात का आधिकारिक एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन यह बैठक ऐसे समय हुई जब सपा तीसरी राज्यसभा सीट के लिए समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है।
अब्बास अंसारी SBSP के छह विधायकों में शामिल हैं। उनकी अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद राज्यसभा चुनाव के संभावित समीकरणों को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं। हालांकि, केवल मुलाकात के आधार पर उनके मतदान के बारे में कोई अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
SBSP के छह विधायक, क्रॉस वोटिंग पर नजर
SBSP के पास उत्तर प्रदेश विधानसभा में छह विधायक हैं। इनमें ओम प्रकाश राजभर, बेड़ी राम, अब्बास अंसारी, दुधराम, हंसू राम और जगदीश नारायण शामिल हैं। मौजूदा घटनाक्रम में विशेष रूप से अब्बास अंसारी और जगदीश नारायण के नाम को लेकर राजनीतिक चर्चाएं चल रही हैं। वहीं राजभर ने हंसू राम के साथ बातचीत होने और उनके साथ होने की बात कही है।
राजभर का कहना है कि कुछ विधायकों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी दावा किया है कि पहले उनकी पार्टी के तीन विधायक सपा के संपर्क में थे, लेकिन एक विधायक से बातचीत हो चुकी है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि मतदान से पहले संभव नहीं है।
BJP और SP दोनों के लिए अहम चुनाव
उत्तर प्रदेश का यह राज्यसभा चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके नतीजे अगले विधानसभा चुनाव से पहले दोनों प्रमुख राजनीतिक खेमों की रणनीतिक स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं। बीजेपी अपने गठबंधन के विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश कर रही है, जबकि सपा अतिरिक्त समर्थन जुटाने के प्रयास में है।

फिलहाल सबसे ज्यादा नजर 10वीं सीट के लिए होने वाले संभावित मुकाबले और क्रॉस वोटिंग की आशंका पर है। 16 अक्टूबर को मतदान के बाद ही स्पष्ट होगा कि किस दल को कितने विधायकों का समर्थन मिलता है। उससे पहले SBSP विधायकों की गतिविधियां और बीजेपी-सपा के बीच जारी राजनीतिक संपर्क उत्तर प्रदेश की राज्यसभा चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बने रहेंगे।




