
भारतीय डेविस कप टीम के कप्तान रोहित राजपाल ने अपने पद से हटने के संकेत दिए हैं। हालांकि उनका मौजूदा अनुबंध 31 दिसंबर 2026 तक है, लेकिन राजपाल का मानना है कि अब भारतीय टेनिस में नई पीढ़ी को नेतृत्व का अवसर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह किसी पद पर तभी तक बने रहना चाहते हैं, जब तक उन्हें लगता है कि वह उसमें अपना बेहतर योगदान दे सकते हैं। साथ ही उन्होंने अपने अनुभव का इस्तेमाल नए कप्तान को जिम्मेदारी सौंपने में करने की बात कही है।
2019 में मिली थी डेविस कप टीम की कमान
रोहित राजपाल ने साल 2019 में महेश भूपति के पद छोड़ने के बाद भारतीय डेविस कप टीम के नॉन-प्लेइंग कैप्टन की जिम्मेदारी संभाली थी। उनके नेतृत्व में भारत ने कई मुकाबलों में प्रभावशाली प्रदर्शन किया। राजपाल के कार्यकाल में भारतीय टीम ने 12 में से 6 मुकाबले जीते।
उनके कप्तानी कार्यकाल में डेनमार्क, स्विट्जरलैंड और नीदरलैंड्स जैसी मजबूत यूरोपीय टीमों के खिलाफ जीत भी भारत के खाते में आई। इन नतीजों ने भारत को डेविस कप की शीर्ष 16 टीमों में जगह बनाने में मदद की।
हालांकि, हालिया मुकाबले में भारतीय टीम को दक्षिण कोरिया के खिलाफ 1-3 से हार का सामना करना पड़ा। इस हार के बाद भारत डेविस कप के नॉकआउट दौर में जगह नहीं बना सका। इसके बाद टीम की रणनीति और भविष्य को लेकर भी चर्चा तेज हुई।
‘अब युवाओं को मौका देने का समय’
राजपाल ने अपने भविष्य को लेकर संकेत देते हुए कहा कि हर अच्छी चीज का एक अंत होता है। उनका मानना है कि लंबे समय तक एक ही व्यक्ति के हाथ में जिम्मेदारी रहने के बजाय नई पीढ़ी को नेतृत्व का अवसर दिया जाना चाहिए।
उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान हासिल किए अनुभव को नए कप्तान के साथ साझा करने की इच्छा भी जताई। राजपाल के मुताबिक, वह पिछले 4-5 वर्षों में हासिल किए गए अनुभव को नए नेतृत्व तक पहुंचाकर जिम्मेदारी के सुचारू हस्तांतरण में मदद कर सकते हैं।
युवा खिलाड़ियों पर राजपाल का फोकस
रोहित राजपाल के अनुसार, भारतीय टेनिस में युवा खिलाड़ियों को लगातार मौके देना बेहद जरूरी है। वह मानते हैं कि उनकी कप्तानी के दौरान टीम की मानसिकता में बदलाव आया और कई नए खिलाड़ियों को डेविस कप जैसे बड़े मंच का अनुभव हासिल करने का अवसर मिला।
उन्होंने युवा खिलाड़ी डीके सुरेश के प्रदर्शन की भी सराहना की। राजपाल के मुताबिक, दबाव की स्थिति में भी सुरेश ने आक्रामक रवैया दिखाया और अपने खेल से प्रभावित किया।
इसके अलावा मानस धामने और अर्नव पापरकर जैसे उभरते खिलाड़ियों को भी टीम के साथ जोड़ने पर जोर दिया गया। राजपाल का मानना है कि भारतीय टेनिस का भविष्य सिर्फ कुछ स्थापित खिलाड़ियों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। इसके लिए लगातार नए खिलाड़ियों की मजबूत श्रृंखला तैयार करनी होगी।
AITA में बदलाव की जरूरत बताई
रोहित राजपाल सिर्फ डेविस कप टीम के भविष्य को लेकर ही बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि उन्होंने ऑल इंडिया टेनिस एसोसिएशन यानी AITA के कामकाज में भी बदलाव की जरूरत बताई है। राजपाल खुद AITA अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं।
उनका कहना है कि खिलाड़ियों के विकास की जिम्मेदारी केवल निजी कोचों और परिवारों पर नहीं छोड़ी जानी चाहिए। देश में ऐसा व्यवस्थित ढांचा तैयार किया जाना चाहिए, जिसमें किसी खिलाड़ी को शुरुआती स्तर से लेकर पेशेवर टेनिस तक पहुंचने के लिए स्पष्ट रास्ता मिले।
देश में नेशनल और रीजनल सेंटर का सुझाव
राजपाल ने खिलाड़ियों के लिए बेहतर सुविधाओं का मॉडल भी सामने रखा है। उनका सुझाव है कि देश में एक बड़ा नेशनल ट्रेनिंग सेंटर बनाया जाए। इसके साथ ही अलग-अलग क्षेत्रों में चार रीजनल सेंटर विकसित किए जाएं।
इन केंद्रों पर खिलाड़ियों को ट्रेनिंग, फिजियोथेरेपिस्ट और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था हो। उन्होंने खिलाड़ियों के यात्रा खर्च को लेकर भी बेहतर समर्थन व्यवस्था की जरूरत बताई है।
राजपाल का मानना है कि यदि भारतीय टेनिस में प्रतिभाओं की पहचान शुरुआती स्तर पर की जाए और उन्हें लंबे समय तक व्यवस्थित प्रशिक्षण मिले, तो देश के पास भविष्य में डेविस कप के लिए खिलाड़ियों का बड़ा पूल तैयार हो सकता है।

फिलहाल रोहित राजपाल का अनुबंध 31 दिसंबर 2026 तक है। ऐसे में उनके अगले कदम पर भारतीय टेनिस जगत की नजर रहेगी। साथ ही AITA में बदलाव और युवा खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने को लेकर उनके विचार आने वाले समय में चर्चा का विषय बने रह सकते हैं।




