
वॉशिंगटन: चंद्रमा की सतह को लेकर वैज्ञानिकों को एक बड़ी और बेहद दुर्लभ खोज मिली है। NASA के Lunar Reconnaissance Orbiter (LRO) से मिले पुराने और नए चित्रों की तुलना के दौरान वैज्ञानिकों ने चंद्रमा पर हाल ही में बना एक विशाल इम्पैक्ट क्रेटर खोजा है। इस क्रेटर को ‘McGetchin Crater’ नाम दिया गया है।

NASA के मुताबिक यह क्रेटर करीब 728 फीट यानी लगभग 222 मीटर चौड़ा और करीब 141 फीट यानी 43 मीटर गहरा है। इसका आकार लगभग दो फुटबॉल मैदानों की लंबाई के बराबर है। वैज्ञानिकों के अनुसार इतनी बड़ी टक्कर चंद्रमा पर लगभग एक सदी या उससे भी अधिक समय में एक बार होने जैसी दुर्लभ घटना है।
अप्रैल से मई 2024 के बीच बना था क्रेटर
वैज्ञानिकों के मुताबिक McGetchin Crater 11 अप्रैल से 22 मई 2024 के बीच किसी समय बना। उस दौरान एक अंतरिक्षीय चट्टान, जो संभवतः किसी क्षुद्रग्रह या धूमकेतु का हिस्सा थी, चंद्रमा की सतह से टकराई।
NASA के अनुसार टक्कर मारने वाली वस्तु का आकार लगभग तीन से छह मंजिला इमारत जितना हो सकता है। इतनी बड़ी वस्तु की टक्कर ने चंद्रमा की सतह पर बड़ी मात्रा में मिट्टी और चट्टानी पदार्थ उछाल दिया।
NASA को कैसे मिली इस क्रेटर की जानकारी?
इस खोज का दिलचस्प पहलू यह है कि क्रेटर बनने के समय वैज्ञानिकों ने इसे सीधे नहीं देखा था। NASA के Lunar Reconnaissance Orbiter Camera (LROC) ने चंद्रमा की सतह की तस्वीरें लगातार एकत्र की थीं।
अक्टूबर 2025 में वैज्ञानिक रॉबर्ट वैगनर नियमित डेटा जांच के दौरान LRO की तस्वीरों का विश्लेषण कर रहे थे। उन्होंने चंद्रमा की पुरानी और नई तस्वीरों की तुलना करने के लिए कंप्यूटर सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया। इसी दौरान एक चमकीले क्षेत्र के आसपास गहरे रंग का असामान्य घेरा दिखाई दिया।
आगे की जांच में पता चला कि यह किसी सामान्य सतही बदलाव का परिणाम नहीं, बल्कि हाल ही में हुए बड़े इम्पैक्ट का निशान था।
McGetchin नाम क्यों दिया गया?
नए क्रेटर का नाम टॉम मैकगेटचिन (Tom McGetchin) के सम्मान में रखा गया है। वह एक प्रमुख अमेरिकी चंद्र वैज्ञानिक थे और Lunar and Planetary Institute से जुड़े रहे थे।
NASA के मुताबिक इस नाम के जरिए चंद्रमा और ग्रह विज्ञान के अध्ययन में उनके योगदान को सम्मानित किया गया है।
728 फीट चौड़ा और 141 फीट गहरा
McGetchin Crater का आकार वैज्ञानिकों के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है। इसकी चौड़ाई करीब 728 फीट और गहराई करीब 141 फीट मापी गई है।
NASA ने इसकी गहराई को समझाने के लिए तुलना की है कि इसमें लगभग तीन स्कूल बसों को एक के ऊपर एक खड़ा किया जाए तो वे इसकी गहराई के आसपास पहुंच सकती हैं।
यह नया क्रेटर पहले खोजे गए हालिया बड़े चंद्र क्रेटर से करीब तीन गुना बड़ा है और इसे आधुनिक समय में सौरमंडल में ज्ञात सबसे बड़ा नया इम्पैक्ट क्रेटर बताया गया है।
आसपास 4 मील तक दिखा असर
वैज्ञानिकों को केवल क्रेटर ही नहीं मिला, बल्कि इसके आसपास की सतह में भी बड़े बदलाव के संकेत मिले हैं।
NASA के LRO पर मौजूद Diviner उपकरण से किए गए अध्ययन में क्रेटर के आसपास करीब 4 मील चौड़ा ठंडा क्षेत्र पाया गया। वैज्ञानिकों के अनुसार इम्पैक्ट के कारण चंद्रमा की ऊपरी मिट्टी यानी regolith ढीली और कम घनी हो गई, जिससे वह रात में अपने आसपास के पुराने इलाके की तुलना में कम गर्मी बनाए रखती है।
लाखों टन मिट्टी और चट्टान उछली
इतनी बड़ी टक्कर के दौरान चंद्रमा की सतह से बड़ी मात्रा में धूल और चट्टानी पदार्थ बाहर निकला। यह सामग्री क्रेटर से काफी दूर तक फैल गई।
वैज्ञानिकों के मुताबिक इस इम्पैक्ट ने चंद्र सतह को 66 मील से ज्यादा क्षेत्र तक प्रभावित किया। इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिल रही है कि भविष्य में चंद्रमा पर होने वाले बड़े इम्पैक्ट आसपास के इलाके को किस तरह प्रभावित कर सकते हैं।
चंद्रमा पर हर साल बनते हैं छोटे क्रेटर
चंद्रमा पर उल्कापिंड और अन्य अंतरिक्षीय वस्तुओं की टक्कर लगातार होती रहती है। वहां पृथ्वी जैसा घना वातावरण नहीं है, इसलिए अंतरिक्ष से आने वाली चट्टानों को वायुमंडल में जलने या धीमा होने का मौका नहीं मिलता।
NASA के अनुसार LRO मिशन ने अब तक कम से कम 1,000 नए इम्पैक्ट क्रेटर की पहचान की है और सतह पर करीब 1 लाख अन्य बदलाव भी दर्ज किए हैं, जो अंतरिक्षीय वस्तुओं की टक्कर या उससे निकले मलबे से जुड़े हैं।
यह खोज भविष्य के Moon Base के लिए क्यों महत्वपूर्ण?
चंद्रमा पर भविष्य में इंसानों के लंबे समय तक रहने की योजनाएं बनाई जा रही हैं। ऐसे में वहां होने वाली अंतरिक्षीय टक्करों और उनसे निकलने वाले मलबे को समझना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।
वैज्ञानिक अब यह अध्ययन कर रहे हैं कि बड़े इम्पैक्ट से उछलने वाला मलबा कितनी दूर तक जा सकता है और भविष्य में चंद्रमा पर बनने वाले बेस या अन्य संरचनाओं को उससे किस तरह का खतरा हो सकता है।
McGetchin Crater का अध्ययन भविष्य के Moon Base और मानव मिशनों की सुरक्षा व्यवस्था तैयार करने में उपयोगी डेटा दे सकता है।
वैज्ञानिकों के लिए यह ‘एक सदी में एक बार’ वाली घटना क्यों?
चंद्रमा पर छोटे-छोटे इम्पैक्ट आम हैं, लेकिन McGetchin जैसा बड़ा क्रेटर बनाने वाली टक्कर बेहद दुर्लभ है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस स्तर की घटना लगभग 132 वर्षों में एक बार होने की संभावना हो सकती है।
इसी वजह से वैज्ञानिकों के लिए यह घटना एक दुर्लभ प्राकृतिक प्रयोग जैसी है। उन्हें पहली बार इतनी नई सतह और उसके आसपास हुए बदलावों को अपेक्षाकृत कम समय के अंतराल में देखने का मौका मिल रहा है।
निष्कर्ष
NASA के Lunar Reconnaissance Orbiter ने चंद्रमा पर हाल ही में बने विशाल McGetchin Crater की पहचान की है। करीब 728 फीट चौड़ा और 141 फीट गहरा यह क्रेटर अप्रैल से मई 2024 के बीच किसी अंतरिक्षीय चट्टान के चंद्रमा से टकराने के कारण बना था।
इस खोज की खासियत यह है कि वैज्ञानिकों ने पुराने और नए LRO चित्रों की तुलना करके चंद्रमा की सतह में आए इस बदलाव को पहचाना। इसके आसपास कई मील तक सतह के तापमान और संरचना में बदलाव मिले हैं। भविष्य में चंद्रमा पर मानव मिशनों और बेस की योजना बनाने में यह अध्ययन महत्वपूर्ण जानकारी दे सकता है।



