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Crude Oil Surge : कच्चे तेल की कीमतें तीन महीने के उच्चतम स्तर पर, 100 डॉलर के करीब पहुंचा भाव

100 डॉलर के करीब पहुंचा कच्चा तेल, पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से सप्लाई संकट की आशंका

पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य और भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक कच्चे तेल बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। बुधवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब डेढ़ प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इस उछाल के बाद ब्रेंट क्रूड का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल के बेहद करीब पहुंच गया है। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 94 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया। विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियों में तेल की आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंता कीमतों को आगे भी ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकती है।

तीन महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचा तेल

केडिया एडवाइजरी के निदेशक अजय केडिया के अनुसार, बुधवार को कच्चे तेल की कीमतें करीब तीन महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं। बाजार में तेजी की प्रमुख वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और तेल की वैश्विक आपूर्ति पर मंडराता खतरा माना जा रहा है।

बुधवार को डब्ल्यूटीआई क्रूड करीब 1.50 प्रतिशत मजबूत होकर 94.21 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। दूसरी ओर ब्रेंट क्रूड में भी लगभग 1.50 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और इसका भाव 99.30 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। ब्रेंट के 100 डॉलर के करीब पहुंचने से दुनिया भर के आयातक देशों की चिंता बढ़ गई है।

ईरान से जुड़े घटनाक्रम ने बढ़ाई बाजार की चिंता

तेल बाजार में अचानक आई तेजी के पीछे ईरान से जुड़े सैन्य घटनाक्रम को महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है। खासतौर पर खार्ग द्वीप के आसपास की गतिविधियों ने तेल कारोबारियों के बीच चिंता पैदा की है, क्योंकि यह क्षेत्र ईरान के तेल निर्यात के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

अमेरिकी कार्रवाई के बाद बाजार में यह आशंका मजबूत हुई है कि अगर तनाव लंबे समय तक जारी रहा तो कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय सप्लाई प्रभावित हो सकती है। ऐसे में तेल की कीमतों पर आगे भी दबाव बढ़ने की संभावना है।

ईरान के जवाबी कदम से बढ़ा तनाव

अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की ओर से भी जवाबी कार्रवाई की खबरों ने हालात को और गंभीर बना दिया है। ईरान ने जॉर्डन की दिशा में बैलिस्टिक मिसाइलें दागने के साथ-साथ कुवैत और बहरीन के बंदरगाहों के आसपास मौजूद जहाजों को लेकर चेतावनी जारी की है।

इसके अलावा ईरान समर्थित हूथी विद्रोहियों की ओर से दक्षिणी सऊदी अरब के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाए जाने की खबर भी सामने आई है। इसमें जाजान रिफाइनरी का नाम शामिल है, जिसकी प्रतिदिन करीब चार लाख बैरल की क्षमता बताई जाती है। ऊर्जा ढांचे पर हमले की आशंका ने बाजार में आपूर्ति संबंधी जोखिम को और बढ़ा दिया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर दुनिया की नजर

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का एक बड़ा कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में संभावित व्यवधान भी है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल व्यापार के लिए बेहद अहम है। यहां किसी भी तरह की रुकावट से तेल की आवाजाही प्रभावित हो सकती है और दुनिया के कई देशों को वैकल्पिक स्रोतों की ओर रुख करना पड़ सकता है।

चीन में तेल की मांग मजबूत रहने के कारण अफ्रीका, कनाडा और लैटिन अमेरिका से आने वाले कच्चे तेल के लिए प्रतिस्पर्धा भी बढ़ गई है। रिफाइनरियां होर्मुज मार्ग से जुड़ी अनिश्चितता को देखते हुए दूसरे स्रोतों से तेल खरीदने की कोशिश कर रही हैं।

भारतीय बाजार पर भी दिख रहा असर

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। बुधवार को घरेलू बाजार में लगातार तीसरे दिन गिरावट दर्ज की गई। बीएसई सेंसेक्स 361.36 अंक यानी 0.48 प्रतिशत गिरकर 75,216.22 के स्तर पर खुला। वहीं एनएसई निफ्टी 50 में 113.05 अंक यानी 0.48 प्रतिशत की गिरावट रही और यह 23,522.05 के स्तर पर खुला।

कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है तो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश पर इसका असर पड़ सकता है। इससे आयात बिल बढ़ने, महंगाई पर दबाव बनने और कंपनियों की लागत प्रभावित होने की चिंता बढ़ सकती है। आने वाले दिनों में बाजार की नजर पश्चिम एशिया के घटनाक्रम और वैश्विक तेल आपूर्ति की स्थिति पर बनी रहेगी।

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