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Valmiki Scams : वाल्मीकि घोटाला क्या है? बी नागेंद्र का नाम कैसे आया, जानिए पूरा मामला

कर्नाटक के 89 करोड़ रुपये के वाल्मीकि घोटाले में बी नागेंद्र की भूमिका, जांच, आरोप और पूरे मामले की अहम जानकारी जानिए।

कर्नाटक में सामने आया करीब 89 करोड़ रुपये का वाल्मीकि निगम घोटाला एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में है। इस मामले में कर्नाटक के पूर्व मंत्री बी नागेंद्र का नाम प्रमुखता से सामने आया है। केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई और हालिया घटनाक्रम के बाद यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। 28 अगस्त 2026 को बी नागेंद्र ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। यह उनका दूसरी बार मंत्री पद छोड़ना है और दोनों बार उनके इस्तीफे का संबंध इसी मामले से जुड़ा रहा है।

क्या है वाल्मीकि निगम घोटाला?

यह मामला कर्नाटक महार्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम से जुड़ा है। यह निगम अनुसूचित जनजाति समुदाय के कल्याण और विकास से संबंधित योजनाओं के लिए सरकारी धन का इस्तेमाल करता है।

जांच एजेंसियों के अनुसार, वर्ष 2024 में निगम के खातों से लगभग 89.62-89.63 करोड़ रुपये कथित तौर पर फर्जी बैंक खातों और संदिग्ध लेनदेन के जरिए बाहर भेजे गए। प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, यह रकम आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में मौजूद कई फर्जी खातों में ट्रांसफर की गई और बाद में शेल कंपनियों तथा अन्य खातों के जरिए धन को इधर-उधर किया गया।

मामला तब सामने आया जब निगम के एक अधिकारी चंद्रशेखरन ने मई 2024 में आत्महत्या कर ली थी। उनके पीछे छोड़े गए नोट के बाद वित्तीय अनियमितताओं की जांच तेज हुई और पुलिस, सीबीआई तथा ईडी ने अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई शुरू की।

बी नागेंद्र का क्या है संबंध?

घोटाले के समय बी नागेंद्र कर्नाटक सरकार में अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री थे। ईडी ने अपनी जांच में नागेंद्र को मामले का प्रमुख आरोपी और कथित साजिशकर्ता बताया था। एजेंसी का आरोप है कि निगम के बैंक खाते को बेंगलुरु की एमजी रोड स्थित यूनियन बैंक शाखा में स्थानांतरित करने में नागेंद्र का प्रभाव था।

ईडी ने यह भी दावा किया कि कथित तौर पर निकाली गई रकम में से करीब 20.19 करोड़ रुपये का इस्तेमाल 2024 के लोकसभा चुनाव से जुड़े खर्चों और अन्य गतिविधियों में किया गया। हालांकि, ये जांच एजेंसियों के आरोप हैं और इन पर अदालत का अंतिम फैसला अभी नहीं आया है।

जून 2026 में सीबीआई ने मामले में चार्जशीट दाखिल की, जिसमें बी नागेंद्र समेत कुल 30 लोगों को आरोपी बनाया गया। सीबीआई के अनुसार, करीब 89.63 करोड़ रुपये फर्जी चेक और आरटीजीएस लेनदेन के माध्यम से लगभग 600 बैंक खातों तक पहुंचाए गए और बाद में नकदी, सोने-चांदी जैसी संपत्तियों तथा महंगी गाड़ियों में बदले गए।

फिर क्यों चर्चा में आए नागेंद्र?

बी नागेंद्र को 2024 में इस विवाद के बाद मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। बाद में उन्हें दोबारा मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। अगस्त 2026 में उनकी दोबारा मंत्री पद पर वापसी के बाद विपक्षी बीजेपी ने सरकार पर लगातार दबाव बनाया और उनके इस्तीफे की मांग की।

आखिरकार 28 अगस्त को नागेंद्र ने फिर मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इस घटनाक्रम ने कर्नाटक की राजनीति में वाल्मीकि निगम घोटाले को एक बार फिर बड़ा मुद्दा बना दिया है।

फिलहाल जांच एजेंसियां मामले में धन के पूरे नेटवर्क और कथित लाभार्थियों की भूमिका की जांच कर रही हैं। सीबीआई और ईडी की जांच में सामने आए आरोपों का अंतिम निष्कर्ष अदालत की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तय होगा।

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