
नई दिल्ली: भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में एक बार फिर बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 31 जुलाई को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 10.51 अरब डॉलर बढ़कर 692.87 अरब डॉलर पहुंच गया। इससे पिछले सप्ताह भी विदेशी मुद्रा भंडार में 6.12 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई थी और यह 682.35 अरब डॉलर पर पहुंच गया था।

विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार दूसरे सप्ताह हुई इस तेज बढ़ोतरी को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। खास तौर पर विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों और देश के गोल्ड रिजर्व में हुई बढ़ोतरी ने कुल भंडार को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है।
विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में 8.75 अरब डॉलर का इजाफा
RBI के आंकड़ों के मुताबिक, 31 जुलाई को समाप्त सप्ताह के दौरान विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा रखने वाली विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां (Foreign Currency Assets) 8.75 अरब डॉलर बढ़कर 564.68 अरब डॉलर हो गईं।
विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड और जापानी येन जैसी प्रमुख विदेशी मुद्राओं में रखी गई परिसंपत्तियां भी शामिल होती हैं। डॉलर के संदर्भ में इन परिसंपत्तियों की गणना पर इन विदेशी मुद्राओं की विनिमय दरों में होने वाले उतार-चढ़ाव का भी असर पड़ता है।
विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में हुई यह बड़ी बढ़ोतरी कुल विदेशी मुद्रा भंडार में आए उछाल की प्रमुख वजहों में से एक रही।
गोल्ड रिजर्व की वैल्यू भी बढ़ी
भारत के स्वर्ण भंडार यानी गोल्ड रिजर्व की कीमत में भी इस सप्ताह अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई। RBI के मुताबिक, गोल्ड रिजर्व की वैल्यू 1.68 अरब डॉलर बढ़कर 104.74 अरब डॉलर हो गई।
सोने की कीमतों में बदलाव के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के मूल्य में होने वाले उतार-चढ़ाव का असर भारत के गोल्ड रिजर्व की डॉलर वैल्यू पर पड़ता है। ऐसे में गोल्ड रिजर्व की बढ़ती वैल्यू ने भी देश के कुल विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने में योगदान दिया।
SDR में भी हुई बढ़ोतरी
RBI के आंकड़ों के अनुसार, सप्ताह के दौरान स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDR) में भी मामूली बढ़ोतरी हुई। SDR का भंडार 4.8 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.67 अरब डॉलर हो गया।
SDR अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की ओर से बनाया गया एक अंतरराष्ट्रीय आरक्षित परिसंपत्ति साधन है। इसका इस्तेमाल सदस्य देशों के आधिकारिक विदेशी मुद्रा भंडार के हिस्से के तौर पर किया जाता है।
IMF में भारत का रिजर्व भी बढ़ा
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में भारत के आरक्षित भंडार में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है। RBI के आंकड़ों के मुताबिक, IMF में भारत का रिजर्व 2.8 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.78 अरब डॉलर हो गया।
इस तरह विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों, गोल्ड रिजर्व, SDR और IMF रिजर्व—सभी प्रमुख हिस्सों में बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसका सकारात्मक असर देश के कुल विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ा।
फरवरी में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा था विदेशी मुद्रा भंडार
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार इस साल फरवरी में अपने अब तक के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। 27 फरवरी को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 728.49 अरब डॉलर के लाइफटाइम हाई पर पहुंचा था।
इसके बाद पश्चिम एशिया में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव और रुपये पर बने दबाव के बीच विदेशी मुद्रा भंडार में कई सप्ताह तक गिरावट देखने को मिली। बाजार में रुपये की स्थिरता बनाए रखने के लिए RBI को जरूरत पड़ने पर डॉलर की बिक्री के जरिए हस्तक्षेप करना पड़ा था।
इस तरह के बाजार हस्तक्षेप का असर देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ सकता है, क्योंकि केंद्रीय बैंक रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए अपने विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल करता है।
पश्चिम एशिया के तनाव के बीच रुपये पर बढ़ा था दबाव
पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के बाद वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी थी। कच्चे तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय पूंजी प्रवाह को लेकर भी चिंताएं पैदा हुई थीं।
भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर विदेशी मुद्रा की मांग पर पड़ सकता है। इससे रुपये पर दबाव बढ़ने की स्थिति में RBI को बाजार में हस्तक्षेप करना पड़ सकता है।
इसी वजह से उस अवधि में देश के विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार कई सप्ताह तक कमी देखने को मिली थी। अब लगातार दो सप्ताह से विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी दर्ज होने से स्थिति में सुधार के संकेत मिल रहे हैं।
विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के लिए सरकार और RBI ने उठाए कदम
विदेशी मुद्रा की उपलब्धता बढ़ाने और देश में विदेशी पूंजी का प्रवाह मजबूत करने के लिए भारत सरकार और RBI ने पिछले महीने कई कदमों की घोषणा की थी। इनमें FCNR(B) यानी Foreign Currency Non-Resident (Bank) जमा से जुड़े उपाय भी शामिल थे।
इन उपायों का उद्देश्य भारत में विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ाना और बैंकिंग प्रणाली में डॉलर की उपलब्धता को मजबूत करना था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इन प्रयासों के जरिए अब तक करीब 32 अरब डॉलर प्राप्त हो चुके हैं।
क्या है विदेशी मुद्रा भंडार और क्यों है जरूरी?
किसी भी देश के लिए विदेशी मुद्रा भंडार बेहद महत्वपूर्ण आर्थिक सुरक्षा कवच होता है। इसमें विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां, सोना, SDR और IMF में आरक्षित भंडार जैसे विभिन्न घटक शामिल होते हैं।
भारत के लिए मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार कई मायनों में महत्वपूर्ण है। इससे देश को अंतरराष्ट्रीय भुगतान संबंधी जरूरतों को पूरा करने, आयात का भुगतान करने और वैश्विक आर्थिक संकट के समय वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलती है।
इसके अलावा, जब घरेलू मुद्रा पर अचानक दबाव बढ़ता है तो केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करने के लिए अपने रिजर्व का इस्तेमाल कर सकता है।
आगे क्या संकेत मिल रहे हैं?
विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार दूसरे सप्ताह हुई बड़ी बढ़ोतरी भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति के लिए सकारात्मक संकेत है। हालांकि, वैश्विक बाजारों में भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतें, डॉलर की मजबूती और पूंजी प्रवाह जैसे कई कारक आने वाले समय में विदेशी मुद्रा भंडार और रुपये की स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं।
फिलहाल 692.87 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार भारत को बाहरी आर्थिक झटकों से निपटने के लिए मजबूत स्थिति प्रदान करता है। हालांकि, यह अभी फरवरी में दर्ज 728.49 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर से नीचे है।




