टॉप न्यूज़विदेश

Iran Coup : ईरान में मुज्तबा खामेनेई की रहस्यमयी अनुपस्थिति, तख्तापलट की साजिश के दावों से बढ़ी हलचल

तेहरान: ईरान की राजनीति एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में है। सऊदी अरब के समाचार चैनल अल-हदाथ की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान के सर्वोच्च नेता मुज्तबा खामेनेई फिलहाल देश में मौजूद नहीं हैं। रिपोर्ट में एक इजरायली सुरक्षा सूत्र के हवाले से यह भी कहा गया है कि ईरान के भीतर सत्ता को लेकर गंभीर अंदरूनी खींचतान चल रही है और कुछ धड़े कथित तौर पर “सॉफ्ट कूप” यानी बिना सैन्य हिंसा के सत्ता परिवर्तन की कोशिशों में लगे हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और ईरानी सरकार की ओर से भी इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

सार्वजनिक रूप से नहीं आए मुज्तबा खामेनेई

रिपोर्ट के अनुसार, मुज्तबा खामेनेई ने अपने पिता और पूर्व सर्वोच्च नेता के निधन के बाद सर्वोच्च नेतृत्व की जिम्मेदारी संभाली थी। लेकिन पदभार ग्रहण करने के बाद से वह सार्वजनिक मंचों पर दिखाई नहीं दिए हैं। अब तक उनके नाम से केवल लिखित संदेश ही जारी किए गए हैं। इसी वजह से उनकी मौजूदगी और गतिविधियों को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।

IRGC तैयार कर रहा है आधिकारिक संदेश?

अल-हदाथ की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मुज्तबा खामेनेई के नाम से जारी होने वाले आधिकारिक संदेश इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के नए प्रमुख अहमद वाहिदी और संगठन के अन्य वरिष्ठ अधिकारी तैयार कर रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान के सत्ता प्रतिष्ठान के भीतर मतभेद इतने गहरे हो चुके हैं कि उनका असर सुरक्षा तंत्र और राजनीतिक फैसलों पर भी दिखाई देने लगा है।

अमेरिका-ईरान समझौते के बाद बढ़ा विवाद

अमेरिका और ईरान के बीच हाल में हुए कथित 14-सूत्रीय राजनयिक समझौते को लेकर भी देश के भीतर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, कट्टरपंथी गुटों का आरोप है कि सरकार ने अमेरिका के साथ समझौता करके पूर्व नेतृत्व की नीतियों से समझौता किया है। उनका मानना है कि यह फैसला ईरान की पारंपरिक रणनीति और राष्ट्रीय हितों के खिलाफ है।

‘सॉफ्ट कूप’ की चर्चा क्यों?

अंतरराष्ट्रीय मीडिया में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के कट्टरपंथी धड़े वर्तमान प्रशासन पर “सॉफ्ट कूप” यानी राजनीतिक तरीके से सत्ता परिवर्तन की कोशिश करने का आरोप लगा रहे हैं। उनका दावा है कि सरकार धीरे-धीरे सत्ता के प्रमुख संस्थानों पर नियंत्रण मजबूत कर रही है और सर्वोच्च नेतृत्व की भूमिका को कमजोर किया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

शोधकर्ता ने क्या कहा?

अमेरिका स्थित ईरानी मामलों के विशेषज्ञ अराश अज़ीज़ी ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया से बातचीत में कहा कि मुज्तबा खामेनेई की लगातार अनुपस्थिति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। उनके अनुसार, यदि सर्वोच्च नेता सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आते हैं तो इससे सत्ता के वास्तविक नियंत्रण को लेकर भ्रम पैदा होता है। उन्होंने यह भी कहा कि कट्टरपंथी गुट संसद अध्यक्ष और मौजूदा प्रशासन के कुछ नेताओं पर मुज्तबा खामेनेई के खिलाफ राजनीतिक साजिश रचने के आरोप लगा रहे हैं।

सांसद ने भी जताई चिंता

ईरान के कट्टरपंथी सांसद महमूद नबावियन ने भी सोशल मीडिया पर तख्तापलट की आशंका जताते हुए सवाल उठाया कि क्या देश में सत्ता परिवर्तन की साजिश चल रही है। बाद में उन्होंने एक अन्य पोस्ट में कहा कि पूर्व सर्वोच्च नेता के सम्मान और उनके सिद्धांतों की रक्षा के लिए किसी भी कथित तख्तापलट का विरोध किया जाएगा।

आधिकारिक पुष्टि का इंतजार

इन सभी दावों के बावजूद अभी तक ईरानी सरकार, सर्वोच्च नेतृत्व कार्यालय या IRGC की ओर से किसी भी रिपोर्ट की पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में मुज्तबा खामेनेई की मौजूदगी, सत्ता संघर्ष और कथित तख्तापलट की साजिश से जुड़े दावों को फिलहाल स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं माना जा सकता। विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में अंतरराष्ट्रीय मीडिया में सामने आ रही रिपोर्टों को आधिकारिक पुष्टि मिलने तक सावधानी के साथ देखा जाना चाहिए।

क्या है मौजूदा स्थिति?

ईरान पहले से ही अमेरिका, इजरायल और पश्चिमी देशों के साथ बढ़ते तनाव का सामना कर रहा है। ऐसे समय में सत्ता के भीतर मतभेद और नेतृत्व को लेकर उठ रहे सवाल देश की राजनीतिक स्थिरता पर असर डाल सकते हैं। आने वाले दिनों में यदि ईरानी सरकार या सर्वोच्च नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी होता है, तो इससे इन दावों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर तेहरान की राजनीतिक गतिविधियों और वहां के सत्ता समीकरणों पर बनी हुई है।

Related Articles

Back to top button