
हैदराबाद: तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में पुलिस ने ड्रग तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जो कथित तौर पर इंडिया पोस्ट के स्पीड पोस्ट नेटवर्क और निजी कूरियर सेवाओं का इस्तेमाल कर देश के 21 राज्यों में गांजे की होम डिलीवरी करता था। आरोपी पार्सलों में गांजे को दवाइयों के रूप में घोषित कर भेजते थे, ताकि जांच एजेंसियों की नजर से बचा जा सके। पुलिस का दावा है कि यह संगठित गिरोह हर महीने लाखों रुपये का कारोबार कर रहा था।

पोस्ट ऑफिस से भेजे जा रहे पार्सल से खुला पूरा नेटवर्क
इस पूरे मामले की जांच हैदराबाद नारकोटिक्स एनफोर्समेंट विंग (H-NEW) ने की। जांच की शुरुआत उस समय हुई जब अधिकारियों ने झारखंड के इसरी बाजार पोस्ट ऑफिस से हैदराबाद के एक व्यक्ति के नाम भेजा गया संदिग्ध पार्सल जब्त किया। जांच में पार्सल के भीतर गांजा मिलने के बाद पुलिस ने इसकी गहन पड़ताल शुरू की।
इसके बाद फुसरो बाजार पोस्ट ऑफिस से भेजे गए एक अन्य पार्सल की जानकारी सामने आई। दोनों मामलों को जोड़कर जांच करने पर पुलिस को एक ऐसे संगठित ड्रग सिंडिकेट का पता चला, जो देशभर में पोस्टल और कूरियर नेटवर्क के जरिए नशीले पदार्थों की सप्लाई कर रहा था।
हर दिन 80 से 100 ऑर्डर, करोड़ों रुपये का सालाना कारोबार
पुलिस जांच के अनुसार, गिरोह प्रतिदिन 80 से 100 ग्राहकों के ऑर्डर पूरे करता था। रोजाना 8 से 10 स्पीड पोस्ट या कूरियर पार्सल भेजे जाते थे, जिनमें प्रत्येक पार्सल में 50 ग्राम से लेकर 250 ग्राम तक गांजा होता था।
इन पार्सलों की कीमत 1,500 रुपये से लेकर 8,000 रुपये तक होती थी। पुलिस का अनुमान है कि इस नेटवर्क की प्रतिदिन करीब एक लाख रुपये की कमाई होती थी। इस हिसाब से गिरोह का मासिक कारोबार 30 से 35 लाख रुपये और सालाना टर्नओवर लगभग 4 से 5 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका था।
एक आरोपी गिरफ्तार, चार मुख्य सदस्य फरार
पुलिस ने इस मामले में सत्यम मिश्रा को गिरफ्तार किया है। वहीं, उसके भाई शुभम मिश्रा उर्फ शुभम दादा, राहुल झा, सचिन मिश्रा और संतोष पंडित अभी भी फरार हैं। आरोपियों की तलाश के लिए कई स्थानों पर छापेमारी की जा रही है।
इसके अलावा हैदराबाद के दो कथित खरीदारों सुशांत व्यास और लड्डू को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने इनके कब्जे से करीब दो किलोग्राम गांजा बरामद किया है। मामले में गुडीमलकापुर और एसआर नगर पुलिस थानों में अलग-अलग केस दर्ज किए गए हैं।
ट्रेन और एयर कार्गो के जरिए पहुंचते थे पार्सल
जांच में सामने आया कि गिरोह केवल स्पीड पोस्ट तक सीमित नहीं था, बल्कि निजी कूरियर सेवाओं, रेलवे पार्सल और एयर कार्गो का भी इस्तेमाल करता था। हैदराबाद भेजे जाने वाले कई पार्सलों को हवाई मार्ग से भेजा जाता था।
आरोपी पार्सलों पर दवाइयों या सामान्य सामान का उल्लेख करते थे, जिससे स्क्रीनिंग के दौरान किसी प्रकार का संदेह न हो। पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने पार्सल जांच प्रणाली की कमजोरियों का फायदा उठाकर लंबे समय तक इस नेटवर्क को संचालित किया।
झारखंड से जुटाते थे गांजा, 21 राज्यों में होती थी सप्लाई
पुलिस के अनुसार, गिरोह झारखंड में स्थानीय स्तर पर उगाए गए गांजे के अलावा अन्य सप्लायर्स से भी माल खरीदता था। इसके बाद इसे तेलंगाना, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, दिल्ली समेत देश के लगभग 21 राज्यों में भेजा जाता था।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हैदराबाद पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि यह नेटवर्क काफी व्यवस्थित तरीके से काम कर रहा था और अलग-अलग राज्यों में इसका ग्राहक आधार तैयार हो चुका था।
नशे की लत से शुरू हुआ सफर, बना संगठित ड्रग नेटवर्क
पुलिस जांच में पता चला कि मुख्य आरोपी सत्यम मिश्रा आर्थिक तंगी के कारण इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी नहीं कर सका था। उसने पहले पेंटर और बाद में कमर्शियल ड्राइवर के रूप में काम किया। वर्ष 2018 में उसे गांजे की लत लग गई।
आरोप है कि बाद में उसने अपने भाई शुभम मिश्रा के साथ मिलकर ड्रग्स की तस्करी शुरू की और धीरे-धीरे कई अन्य लोगों को जोड़कर एक संगठित नेटवर्क खड़ा कर लिया।
सोशल मीडिया से लेते थे ऑर्डर, UPI से होती थी पेमेंट
पुलिस के मुताबिक, सत्यम और शुभम पैकेजिंग का काम संभालते थे, जबकि राहुल झा पार्सलों की बुकिंग और डिस्पैच की जिम्मेदारी निभाता था।
ग्राहकों से संपर्क व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए किया जाता था। ऑर्डर मिलने के बाद भुगतान UPI और विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से लिया जाता था।
‘मैंगो’, ‘स्टिक’ और ‘फ्लावर’ जैसे कोड वर्ड का इस्तेमाल
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ड्रग्स की अलग-अलग मात्रा के लिए ‘मैंगो’, ‘स्टिक’ और ‘फ्लावर’ जैसे कोड वर्ड इस्तेमाल करते थे। मुंबई में इस गिरोह के एक हजार से अधिक नियमित ग्राहक होने की जानकारी भी पुलिस को मिली है।
झारखंड से बड़ी खेप ट्रेन के जरिए लाई जाती थी, जिसे सचिन मिश्रा और संतोष पंडित के ठिकानों पर रखा जाता था। वहां से दोबारा छोटे-छोटे पैकेट बनाकर विभिन्न राज्यों में भेजा जाता था।
कई बैंक खातों के जरिए छिपाते थे लेनदेन
पुलिस के अनुसार, ड्रग्स की बिक्री से होने वाली कमाई को छिपाने के लिए आरोपी कई बैंक खातों और अलग-अलग UPI आईडी का इस्तेमाल करते थे। इनमें परिवार के सदस्यों, विशेष रूप से आरोपी की मां के बैंक खाते का भी उपयोग किया जाता था। इसके बाद रकम को सोना खरीदने और महंगी गाड़ियों में निवेश किया जाता था।
पुलिस ने बढ़ाई निगरानी
हैदराबाद पुलिस का कहना है कि इस कार्रवाई के बाद पोस्टल और कूरियर चैनलों की निगरानी और सख्त कर दी गई है। फरार आरोपियों की तलाश जारी है और जांच एजेंसियां इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही हैं। पुलिस का मानना है कि आगे की जांच में इस पूरे सिंडिकेट से जुड़े और भी अहम खुलासे हो सकते हैं।




