यरूशलेम: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने देश की रक्षा नीति को लेकर बड़ा संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि इजरायल को भविष्य में अमेरिकी सैन्य सहायता पर निर्भर रहने के बजाय अपनी स्वतंत्र रक्षा उत्पादन क्षमता विकसित करनी होगी। नेतन्याहू के अनुसार, बदलते सुरक्षा हालात और ईरान से बढ़ते खतरे को देखते हुए अब समय आ गया है कि इजरायल अपने हथियारों का निर्माण स्वयं करे और रक्षा क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बने।

अमेरिकी सैन्य निर्भरता कम करने पर जोर
वेस्ट बैंक के गुश एत्जियन में रिजर्व कॉम्बैट अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान नेतन्याहू ने कहा कि अमेरिका ने वर्षों तक इजरायल का महत्वपूर्ण सहयोग किया है और वह इसके लिए आभारी हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए इजरायल को अपनी रक्षा उत्पादन क्षमता मजबूत करनी होगी।
उन्होंने कहा, “मैं उस समर्थन की सराहना करता हूं जो हमें वर्षों से अमेरिका से मिला है, लेकिन अब हमें अपने स्वतंत्र हथियार-उत्पादन सिस्टम की आवश्यकता है। हमें अपने हथियार खुद बनाने होंगे।”
ईरान और उसके सहयोगियों से खतरे का दिया हवाला
नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल इस समय ईरान और उसके क्षेत्रीय प्रॉक्सी संगठनों से लगातार चुनौती का सामना कर रहा है। उनके मुताबिक, हाल के अभियानों में इजरायल ने इन समूहों पर कड़ा प्रहार किया है, लेकिन संघर्ष अभी समाप्त नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा कि आने वाले 30 वर्षों में इजरायल की सुरक्षा इस बात पर निर्भर करेगी कि देश अपनी सैन्य शक्ति, आधुनिक तकनीक और रक्षा उत्पादन क्षमता को कितना मजबूत बना पाता है। उन्होंने रक्षा क्षेत्र में नई तकनीकों को अपनाने और भविष्य के सैन्य नेतृत्व को तैयार करने पर भी जोर दिया।
अमेरिकी मदद में धीरे-धीरे बदलाव की रणनीति
नेतन्याहू के बयान से संकेत मिलता है कि इजरायल आने वाले वर्षों में अमेरिकी सैन्य सहायता पर अपनी निर्भरता धीरे-धीरे कम करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। हालांकि उन्होंने तत्काल किसी सहायता को समाप्त करने की बात नहीं कही, लेकिन दीर्घकालिक रणनीति के तहत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता देने का संदेश दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि इजरायल का उद्देश्य भविष्य में रक्षा सहयोग को केवल वित्तीय सहायता तक सीमित रखने के बजाय तकनीकी साझेदारी और संयुक्त रक्षा विकास की दिशा में ले जाना हो सकता है।
अमेरिका-ईरान वार्ता भी बनी चिंता का कारण
यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की चर्चाएं तेज हैं। इजरायल लंबे समय से ऐसे किसी भी समझौते को लेकर अपनी चिंता जताता रहा है। यरूशलेम को आशंका है कि यदि वाशिंगटन और तेहरान के बीच नया समझौता होता है तो इससे इजरायल की सैन्य कार्रवाई की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।
नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल को किसी भी बाहरी निर्भरता से मुक्त होकर अपनी सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाना होगा। उन्होंने कहा कि रक्षा तकनीक, हथियार निर्माण और प्रशिक्षित सैन्य नेतृत्व ही भविष्य में देश की रणनीतिक स्थिति तय करेंगे।
ट्रंप प्रशासन के बयान के बाद बढ़ी चर्चा
नेतन्याहू की यह टिप्पणी अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि पिछले कुछ महीनों में इजरायल की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल किए गए लगभग दो-तिहाई रक्षा हथियारों की आपूर्ति और वित्तीय सहायता अमेरिका ने उपलब्ध कराई थी।
इसी बीच, द टाइम्स ऑफ इजराइल की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और इजरायल के प्रतिनिधियों ने हाल ही में अगले 10 वर्षों के लिए नए सुरक्षा सहयोग ढांचे पर बातचीत शुरू की है। इस प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य पारंपरिक सैन्य सहायता मॉडल को धीरे-धीरे व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदलना है, जिसमें संयुक्त रक्षा विकास, तकनीकी सहयोग और उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर अधिक जोर दिया जाएगा।
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