
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार महिला सशक्तिकरण और कन्या सम्मान की परंपरा को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए लगातार प्रयासरत है। इसी क्रम में चैत्र नवरात्र की पावन नवमी के अवसर पर सिद्धार्थनगर जिले में एक अनूठी पहल देखने को मिली, जहां प्रशासनिक अमला न केवल सक्रिय रहा, बल्कि परंपरा और संवेदनशीलता का जीवंत उदाहरण भी प्रस्तुत किया गया।
सिद्धार्थनगर: परंपरा और प्रशासन का अनोखा संगम
चैत्र नवरात्र की नवमी तिथि पर पूरे जिले में आस्था और श्रद्धा का माहौल देखने को मिला। इस अवसर पर जिले के सभी आंगनवाड़ी केंद्रों को विशेष रूप से सजाया गया था। रंगोली, फूलों की सजावट और भक्ति गीतों के बीच नन्हीं कन्याओं का स्वागत किया गया। वातावरण पूरी तरह उत्सवमय और भक्तिमय था।
इस खास मौके पर जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन स्वयं आंगनवाड़ी केंद्र पहुंचे और उन्होंने कन्या पूजन कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी निभाई। उन्होंने नन्हीं कन्याओं के पैर धोकर उन्हें सम्मानित किया, माथे पर तिलक लगाया और चुनरी ओढ़ाकर उन्हें देवी स्वरूप मानकर पूजा की। यह दृश्य न केवल भावनात्मक था, बल्कि समाज को एक मजबूत संदेश देने वाला भी था।
औपचारिकता नहीं, भावनात्मक जुड़ाव का प्रदर्शन
जिलाधिकारी ने इस कार्यक्रम को केवल एक सरकारी औपचारिकता तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्होंने पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ इसमें भाग लिया। उन्होंने अपने हाथों से कन्याओं को प्रसाद वितरित किया और उनके साथ संवाद भी किया। इस दौरान बच्चों के चेहरे पर खुशी और उत्साह साफ झलक रहा था।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने आंगनवाड़ी केंद्रों की व्यवस्थाओं का भी बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने बच्चों को दिए जा रहे पोषण आहार, साफ-सफाई की स्थिति और अन्य सुविधाओं की जानकारी ली। संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए ताकि केंद्रों की गुणवत्ता में और सुधार हो सके।
सरकार की मंशा: हर घर तक पहुंचे सम्मान का संदेश
योगी सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से समाज में महिला सम्मान और समानता का संदेश पहुंचे। कन्या पूजन केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि बेटियों के प्रति सम्मान और उनके महत्व को स्वीकार करने का प्रतीक है।
इस आयोजन के जरिए प्रशासन ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि बेटियां केवल परिवार ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की भी धरोहर हैं। उनके सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए हर स्तर पर प्रयास जरूरी हैं।
जनभागीदारी से सफल हुआ आयोजन
इस कार्यक्रम में स्थानीय लोगों की भी भागीदारी देखने को मिली। अभिभावकों ने अपने बच्चों के साथ केंद्रों पर पहुंचकर इस आयोजन में हिस्सा लिया। लोगों ने प्रशासन की इस पहल की सराहना की और इसे समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक मजबूत कदम बताया।
निष्कर्ष
सिद्धार्थनगर में आयोजित यह कन्या पूजन कार्यक्रम न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि महिला सशक्तिकरण के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम भी बना। जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन की सक्रिय भागीदारी ने इस आयोजन को खास बना दिया और यह साबित किया कि जब प्रशासन संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़ता है, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन की लहर अवश्य आती है।




