संभल (उत्तर प्रदेश)। जनपद संभल के थाना हजरतनगर गढ़ी क्षेत्र के नगर पंचायत सिरसी और उसके आसपास के गांव मखदुमपुर तथा फूलसिंहा में करीब 160 बीघा सरकारी जमीन को लेकर लगभग चार दशकों से विवाद चला आ रहा है। यह मामला वर्षों से अदालत में विचाराधीन है, लेकिन इसके बावजूद समय-समय पर दोनों पक्षों के बीच तनाव और टकराव की स्थिति बनती रही है। हाल ही में एक बार फिर जमीन पर कब्जे को लेकर विवाद सामने आने से क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया है।
जानकारी के अनुसार यह विवाद नगर पंचायत सिरसी के निकट स्थित लगभग 160 बीघा सरकारी जमीन से जुड़ा है। बताया जाता है कि यह जमीन पहले कुछ लोगों के नाम पर थी, जो बाद में सीलिंग की प्रक्रिया में सरकार के खाते में चली गई। इसके बाद सरकार की ओर से इस जमीन के पट्टे गांव फूलसिंहा के कई दलित परिवारों को आवंटित कर दिए गए थे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्ष 1984 के आसपास से ही इस जमीन को लेकर विवाद शुरू हो गया था। आरोप है कि सिरसी निवासी शिया समुदाय के कुछ लोगों की जमीन मखदुमपुर के रखवे में दर्ज थी, जो सीलिंग में निकल गई और बाद में उसी जमीन के पट्टे फूलसिंहा के दलित परिवारों को दे दिए गए। इसी को लेकर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद चलता आ रहा है।
पहले भी हो चुका है खूनी संघर्ष
इस जमीन को लेकर पहले भी कई बार विवाद और झड़प की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक कई वर्ष पहले इसी जमीन के विवाद को लेकर मौके पर गोलीबारी की घटना भी हुई थी। उस दौरान हुए खूनी संघर्ष में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि करीब पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस घटना के बाद क्षेत्र में काफी समय तक तनाव का माहौल बना रहा था और प्रशासन को भी कड़ी मशक्कत करनी पड़ी थी।
14 तारीख को फिर बढ़ा विवाद
बताया जा रहा है कि 14 तारीख को एक बार फिर जमीन को लेकर विवाद की स्थिति बन गई। जानकारी के अनुसार गांव फूलसिंहा के कई दलित परिवार बिना किसी सरकारी अधिकारी की मौजूदगी के महिलाओं के साथ उस जमीन पर कब्जा करने पहुंच गए। इस दौरान दूसरी ओर से भी कुछ लोग मौके पर आ गए, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई और माहौल तनावपूर्ण हो गया।
स्थिति बिगड़ती देख किसी व्यक्ति ने डायल 112 पर फोन कर पुलिस को सूचना दे दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को समझाकर शांत कराया। पुलिस ने मौके पर मौजूद लोगों को वापस घर भेज दिया, जिससे तत्काल स्थिति नियंत्रण में आ गई।
कभी भी हो सकता है बड़ा विवाद
हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि जमीन का मामला अभी भी अदालत में लंबित है और दोनों पक्ष अपने-अपने दावे कर रहे हैं। ऐसे में बिना प्रशासनिक निगरानी के अगर कोई पक्ष जमीन पर कब्जा करने की कोशिश करता है तो कभी भी बड़ा विवाद खड़ा हो सकता है।
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यह मामला पिछले करीब 40 वर्षों से चला आ रहा है और कई बार गंभीर विवाद की स्थिति भी बन चुकी है। इसलिए जरूरी है कि संभल जिला प्रशासन इस मामले का संज्ञान लेते हुए मौके पर स्थिति स्पष्ट कराए और दोनों पक्षों के बीच स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाए।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि विवादित जमीन की स्थिति स्पष्ट की जाए और जब तक कोर्ट से अंतिम निर्णय नहीं आ जाता, तब तक वहां किसी भी तरह के कब्जे या निर्माण को रोका जाए। साथ ही संवेदनशील स्थिति को देखते हुए इलाके में प्रशासनिक निगरानी और पुलिस गश्त बढ़ाने की भी मांग की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया तो भविष्य में यह विवाद फिर से बड़ा रूप ले सकता है, जिससे क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हो सकती है। फिलहाल पुलिस ने दोनों पक्षों को शांति बनाए रखने की हिदायत दी है और मामले पर नजर बनाए रखने की बात कही है।
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