कानपुर शहर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान बन चुके गंगा मेला का शुभारंभ इस वर्ष भी पूरे उत्साह और उल्लास के साथ किया गया। कानपुर नगर के जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने हटिया स्थित रज्जन बाबू पार्क में झंडारोहण कर गंगा मेला की विधिवत शुरुआत की। इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, समाजसेवियों और बड़ी संख्या में शहरवासियों की मौजूदगी रही।
गंगा मेला की शुरुआत होते ही पूरे इलाके में उत्सव जैसा माहौल बन गया। रंगों से सजे ठेलों के साथ निकली टोली ने शहर के विभिन्न मार्गों पर घूमते हुए लोगों पर रंगों की बौछार की और गंगा मेला की परंपरा को जीवंत कर दिया। लोग ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक गीतों के साथ जश्न मनाते नजर आए।
इस मौके पर जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने शहरवासियों को गंगा मेला की बधाई देते हुए कहा कि यह आयोजन कानपुर की सांस्कृतिक विरासत, भाईचारे और जिंदादिली का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि गंगा मेला केवल एक पर्व नहीं बल्कि कानपुर की पहचान है, जो वर्षों से शहर के लोगों को एक साथ जोड़ने का काम कर रहा है।
जिलाधिकारी ने कहा कि इस मेले का इतिहास देश के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा हुआ है। वर्ष 1942 में जब देश में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आंदोलन तेज था, उस समय अंग्रेजों ने होली खेलने पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बावजूद कानपुर के युवाओं ने अंग्रेजों के आदेश का विरोध करते हुए तिरंगा फहराया और खुलेआम रंग खेलकर अपनी आजादी की भावना का प्रदर्शन किया। उसी घटना की याद में गंगा मेला की परंपरा की शुरुआत हुई, जो आज तक पूरे उत्साह के साथ निभाई जा रही है।
कार्यक्रम के दौरान कई जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने एक-दूसरे को रंग लगाकर गंगा मेला की शुभकामनाएं दीं। पूरे कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के भी पुख्ता इंतजाम किए गए थे, ताकि मेला शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
गंगा मेला के अवसर पर शहर के अलग-अलग इलाकों में रंगों की टोली निकाली गई, जिसमें लोग रंगों के ठेले के साथ सड़कों पर निकलकर होली की मस्ती में डूबे नजर आए। शहर की गलियों और बाजारों में लोगों ने एक-दूसरे को रंग लगाकर इस परंपरा को आगे बढ़ाया।
प्रशासन की ओर से भी गंगा मेला को लेकर विशेष तैयारियां की गई थीं। साफ-सफाई, सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों को जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं।
गंगा मेला का मुख्य आकर्षण शाम को सरसैया घाट पर होने वाला कार्यक्रम रहता है, जहां प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों की मौजूदगी में विशेष आयोजन किए जाते हैं। यहां बड़ी संख्या में लोग एकत्र होकर गंगा मेला के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को याद करते हैं।
कानपुर के लोगों ने इस बार भी पूरे उत्साह के साथ गंगा होली का जश्न मनाया। शहर में जगह-जगह रंग और गुलाल उड़ते नजर आए और लोगों ने एक-दूसरे को बधाई देकर इस परंपरा को जीवित रखा।
गंगा मेला न केवल कानपुर की पहचान है बल्कि यह शहर की सामाजिक एकता और भाईचारे का भी प्रतीक बन चुका है। हर साल होली के बाद आयोजित होने वाला यह मेला लोगों को इतिहास से जोड़ने के साथ-साथ आपसी प्रेम और सद्भाव का संदेश भी देता है।
बाइट: जितेंद्र प्रताप सिंह, जिलाधिकारी कानपुर नगर
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