संभल के रजपुरा–देवरा भूरा मार्ग सड़क निर्माण विवाद: एक व्यापक रिपोर्ट
कुमरपाल यादव, संभल
रजपुरा–देवरा भूरा मार्ग पर लगभग ₹83,77,000 की लागत से 3.1 किलोमीटर सड़क निर्माण कार्य उत्तर प्रदेश पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (PWD) के तहत कराया जा रहा है। यह परियोजना ग्रामीणों और स्थानीय हितधारकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन हाल ही में वायरल हुए एक वीडियो ने निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में निर्माणाधीन सड़क के कुछ हिस्सों पर आलोचनात्मक संकेत मिल रहे हैं, जिसमें यह दावा किया जा रहा है कि सड़क की सतह पर रीत-रेग, बालू और रेत को मिलाकर अनियमित तरीके से डाला जा रहा है, जिससे सड़क की मजबूती और दीर्घायु पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।

ग्रामीणों का आरोप: सड़क की गुणवत्ता को लेकर गंभीर चिंता
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि:
सड़क की बेस परत में रेत-बालू/रेटा को मिलाया जा रहा है, जो सड़क को कमजोर और टिकाऊ नहीं होने दे रहा है।
यह मिश्रण तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं है, जिससे न केवल सड़क की मजबूती कम होगी बल्कि भविष्य में रख-रखाव की लागत भी बढ़ सकती है।
ग्रामीणों का तर्क है कि PWD द्वारा अनुबंध में शामिल सामग्री और गुणवत्ता मानकों का उल्लंघन हो रहा है।
एक ग्रामीण ने कहा,
“यह सड़क हमारे बच्चों की सुरक्षा का मार्ग है और जब हम देख रहे हैं कि कमजोर बुनियाद पर निर्माण हो रहा है तो हमें डर लग रहा है कि बारिश या भारी वाहनों के भार में यह सड़क जल्दी ही खराब हो जाएगी।”
ग्रामीणों ने वीडियो वायरल होने के बाद निर्माण स्थल पर मौजूद मजदूरों से भी पूछताछ की। मजदूरों ने स्वीकार किया कि “कुछ ट्रॉलियों में रेत मिली थी जो सड़क में डाली जा रही थी” और उन्होंने सुझाव दिया कि यह कार्य अनुचित रूप से किया जा रहा है।
ठेकेदार की प्रतिक्रिया: मिश्रण को लेकर सफाई
हमने मौके पर मौजूद ठेकेदार से भी बात की। उनका कहना है:
“सिर्फ दो-तीन ट्रॉली रेत साइट पर आई थी।
उस रेत को उन्होंने न तो सड़क की मुख्य बनावट में मिलाया था, बल्कि अस्थायी स्तर पर संतुलन बनाने के लिए उपयोग किया गया था।
आगे से ऐसे किसी प्रयोग की अनुमति नहीं दी जाएगी और गुणवत्ता मानकों का पूरी तरह से पालन किया जाएगा।”
ठेकेदार ने यह भी दावा किया कि वे पीडब्लूडी के दिशा-निर्देशों और तकनीकी मानकों के अनुरूप ही सामग्री का प्रयोग कर रहे हैं। उनके अनुसार, “अंतिम सतह परत और मजबूत संरचना के लिए सही सामग्री लागू की जाएगी, और अभी सिर्फ प्रारंभिक चरण हैं।”
तकनीकी चिंता: सड़क निर्माण में किन मानकों का उल्लंघन हो सकता है?
आमतौर पर, सड़क निर्माण में ग्रेडेड एग्रीगेट, बजरी, सीमेंट/बिटुमेन, और सघन जाँच-परख सामग्री का प्रयोग तय मानकों के तहत होता है।
स्थानीय लोगों और तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार:
अगर रेत और अनियमित मिश्रण सड़क की आधारभूत परत पर डाला जाता है तो यह गहरी संरचनात्मक कमजोरी का कारण बन सकता है।
बारिश, भारी वाहनों के दबाव या तापमान परिवर्तनों का सामना सड़क स्थिरता खो सकती है।
इसके कारण सड़क जल्द ही गड्ढों, दरारों और अव्यवस्थित ढांचे का शिकार हो सकती है।
इस तरह के निर्माण को अक्सर उचित गुणवत्ता नियंत्रण और सामग्री परीक्षण के बिना किया जाता है, तो यह स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार का संकेत भी दे सकता है—जो परियोजना की लागत, सामग्री आपूर्ति और निगरानी प्रक्रियाओं से जुड़ा होता है।
PWD और प्रशासन का उत्तर: अनदेखी या कार्रवाई की आवश्यकता?
इस मामले में PWD अधिकारियों पर भी सवाल उठ रहे हैं:
क्या विभागीय निरीक्षण नियमित रूप से हो रहा है?
क्या सामग्री की गुणवत्ता की जाँच, प्रमाणिक परीक्षण, और सैंपल परीक्षण किए गए हैं?
क्या निर्माण साइट पर गुणवत्ता निरीक्षक (QA/QC) इंजीनियर मौजूद हैं?
अगर नियमों का उल्लंघन हो रहा है तो क्या विभाग ने ठेकेदार के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की है?
स्थानीय प्रशासन और विकास खंड के अधिकारी अब तक इस विवाद पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन ग्रामीणों ने कहा कि वे जल्द ही उच्च अधिकारियों को शिकायत पत्र सौंपेंगे।
अगर प्रशासन समय रहते कदम नहीं उठाता है, तो यह परियोजना न केवल संसाधनों की बर्बादी का जोखिम है, बल्कि जनहित से जुड़ी गंभीर चिंता का विषय भी बन सकती है।
सड़क की महत्वता: क्यों यह मार्ग महत्वपूर्ण है?
इस सड़क परियोजना का महत्व सिर्फ ₹83.77 लाख की लागत से कहीं अधिक है:
✔ यह मार्ग गाँवों को मुख्य बाजार, स्वास्थ्य केंद्र, स्कूल और परिवहन नेटवर्क से जोड़ता है।
✔ कृषि उत्पादों, दैनिक आवागमन, आपातकालीन सेवाओं और व्यापार के लिए यह सड़क जीवन-धारा की तरह है।
✔ अगर सड़क जल्दी ही टूट जाती है, तो स्थानीय लोगों के रोज़मर्रा के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क की गुणवत्ता घटिया रहेगी, तो उन्हें राज्य सरकार के अन्य कार्यक्रमों पर भरोसा करना कठिन लगता है, और भविष्य में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से जवाबदेही की मांग तेज होगी।
क्या आगे क्या होगा? संभावित कदम
इस मुद्दे के प्रकाश में आने के बाद, संभावित कदम हो सकते हैं:
PWD और प्रशासन द्वारा औपचारिक जांच
निर्माण सामग्री की गुणवत्ता का स्वतंत्र परीक्षण
वीडियो और ग्रामीणों की शिकायतों का सत्यापन
अगर नियमों का उल्लंघन पाया गया तो ठेकेदार के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई
स्थानीय जनता के साथ बैठक और समस्या समझना
इसके अलावा, अगर आवश्यक हुआ तो मीडिया और जनहित याचिका के माध्यम से भी मामले को उठाया जा सकता है।
निष्कर्ष
संभल के रजपुरा–देवरा भूरा मार्ग पर ₹83.77 लाख की सड़क परियोजना सिर्फ एक सामान्य निर्माण कार्य नहीं है—यह स्थानीय समुदाय की सुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही, परियोजना गुणवत्ता, और सरकारी संसाधनों के उपयोग से जुड़ा एक बड़ा सवाल बन चुका है।
ग्रामीणों के तेज़ आरोप, वायरल वीडियो, ठेकेदार का जवाब, और अनुपस्थित जवाबदेही ऐसी परिस्थितियाँ हैं जिनसे यह स्पष्ट होता है कि:
निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर संदेह है।
समय रहते जांच और सुधार की आवश्यकता है।
स्थानीय प्रशासन को पारदर्शिता के साथ जवाब देना चाहिए।
अब देखना होगा कि PWD, स्थानीय अधिकारियों और पंचायत स्तर पर वास्तविक समाधान क्या पेश किया जाता है—क्या यह सड़क वास्तव में मजबूती, गुणवत्ता और जनता की भलाई के अनुरूप बनेगी, या फिर यह दोबारा विवाद का विषय बन जाएगी।
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