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Varanasi Flood : वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ा, मणिकर्णिका की गलियों में नाव चली, अस्सी तक पहुंचा पानी

लगातार बढ़ते गंगा जलस्तर से वाराणसी में बिगड़े हालात, मणिकर्णिका की गलियों में नाव चलने लगी और पुराने अस्सी घाट के रास्तों तक पहुंचा बाढ़ का पानी

वाराणसी। काशी में गंगा का जलस्तर एक बार फिर तेजी से बढ़ने लगा है। लगातार बढ़ते पानी ने अब घाटों के साथ-साथ आसपास की संकरी गलियों और रास्तों को भी अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है। हालात ऐसे हो गए हैं कि मणिकर्णिका घाट की गलियों में जहां आम दिनों में लोगों की आवाजाही रहती है, वहां अब नाव चलती दिखाई दे रही है। पुराने अस्सी घाट की ओर जाने वाले रास्तों और गलियों में भी बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है।

24 घंटे में करीब एक मीटर बढ़ा गंगा का जलस्तर

केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के मुताबिक वाराणसी में गंगा का जलस्तर लगातार ऊपर जा रहा है। सोमवार को जलस्तर 69.44 मीटर दर्ज किया गया। पिछले 24 घंटे में इसमें करीब 0.94 मीटर की बढ़ोतरी हुई है। पानी करीब पांच सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। चेतावनी बिंदु 70.26 मीटर और खतरे का निशान 71.26 मीटर निर्धारित है। ऐसे में प्रशासन और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है।

मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट की गलियों में पानी

गंगा का पानी अब मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट से जुड़ी गलियों तक पहुंच चुका है। मणिकर्णिका की संकरी गलियों में नाव चलने की तस्वीरें सामने आई हैं। घाटों के बीच सामान्य आवागमन भी प्रभावित हुआ है। इससे स्थानीय लोगों के साथ अंतिम संस्कार के लिए पहुंचने वाले परिवारों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इससे पहले जलस्तर बढ़ने पर मणिकर्णिका घाट का बड़ा हिस्सा पानी में डूब चुका था और अंतिम संस्कार की व्यवस्था ऊंची जगहों तथा छतों तक स्थानांतरित करनी पड़ी थी।

पुराने अस्सी घाट के रास्तों तक पहुंचा पानी

बाढ़ का असर अस्सी घाट क्षेत्र में भी दिखाई दे रहा है। पुराने अस्सी घाट की ओर जाने वाले रास्तों और आसपास की गलियों में पानी भरने लगा है। सुबह-ए-बनारस का मंच भी दोबारा पानी की चपेट में आ गया है। अगर जलस्तर इसी गति से बढ़ता रहा तो आने वाले समय में पानी अस्सी घाट से जुड़ी सड़कों तक और आगे बढ़ सकता है।

नाव संचालन पर रोक, केवल जरूरी गतिविधियां जारी

गंगा में बढ़ते जलस्तर को देखते हुए सुरक्षा कारणों से सामान्य नाव संचालन पर रोक जारी है। छोटी से लेकर बड़ी नावों के संचालन पर प्रतिबंध लगाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार फिलहाल क्रूज का संचालन जारी है। प्रशासन की ओर से लोगों को गंगा के किनारे और बाढ़ प्रभावित रास्तों पर अनावश्यक रूप से जाने से बचने की सलाह दी जा रही है।

कानपुर बैराज से छोड़ा गया भारी पानी बढ़ा सकता है मुश्किल

बाढ़ की स्थिति को और गंभीर बनाने वाली एक वजह ऊपरी इलाकों से आने वाला पानी भी है। रिपोर्ट के अनुसार कानपुर बैराज से रविवार को गंगा में करीब 3.43 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इस पानी को वाराणसी तक पहुंचने में समय लगेगा। इसके बाद गंगा के जलस्तर में और वृद्धि होने की आशंका जताई जा रही है।

घाटों के साथ ग्रामीण इलाकों में भी बढ़ी चिंता

गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर केवल शहर के घाटों तक सीमित नहीं है। नदी के आसपास के निचले इलाकों, खेतों और जल निकासी वाले क्षेत्रों में भी पानी भरने का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है। लगातार पानी बढ़ने की स्थिति में निचले इलाकों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर सकता है।

काशी में गंगा के बढ़ते जलस्तर ने एक बार फिर बाढ़ की चुनौती सामने ला दी है। घाटों से लेकर गलियों तक पानी पहुंचने के बाद स्थानीय प्रशासन की निगरानी बढ़ गई है। आने वाले दिनों में जलस्तर किस दिशा में जाता है, इसी पर वाराणसी में बाढ़ की स्थिति की गंभीरता निर्भर करेगी।

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