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Iraq After US Exit : अमेरिकी सैनिकों की वापसी पर बगदाद में जश्न, आईएसआईएस का खतरा बढ़ा

अमेरिकी सैनिकों की विदाई के बाद बगदाद में जश्न, लेकिन ISIS और ईरान समर्थित गुटों का खतरा बढ़ा

अमेरिकी सेना की इराक से पूरी तरह वापसी के बाद बगदाद और नजफ समेत कई इलाकों में जश्न का माहौल देखने को मिला। इराकी सुरक्षा बलों ने सड़कों पर सैन्य परेड निकाली और बड़ी संख्या में लोगों ने अमेरिकी सैनिकों की विदाई को देश की संप्रभुता से जोड़कर देखा। अमेरिका ने 30 सितंबर 2026 को इराक से अपने अंतिम सैनिकों को भी वापस बुला लिया। इसके साथ ही इराक में आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट यानी ISIS के खिलाफ चल रहे अमेरिकी नेतृत्व वाले सैन्य मिशन का औपचारिक अंत हो गया।

हालांकि, अमेरिकी सैनिकों की वापसी के साथ इराक में एक नई सुरक्षा चुनौती को लेकर बहस भी तेज हो गई है। एक तरफ इसे इराक की संप्रभुता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ सुरक्षा विशेषज्ञों और कुछ इराकी अधिकारियों को आशंका है कि अमेरिकी सैन्य मौजूदगी खत्म होने के बाद पैदा होने वाला सुरक्षा खालीपन ईरान समर्थित हथियारबंद गुटों और ISIS के बचे हुए नेटवर्क को सक्रिय होने का मौका दे सकता है।

बगदाद की सड़कों पर दिखा जश्न

अमेरिकी सैनिकों की विदाई के बाद बगदाद में सुरक्षा बलों ने वाहनों के साथ परेड निकाली। नजफ में भी लोगों ने इस मौके पर कार्यक्रम आयोजित किए। इराक में इस दिन को संप्रभुता और विदेशी सैन्य मौजूदगी के अंत के प्रतीक के तौर पर देखा गया। कई जगहों पर झंडों और बैनरों के साथ लोग सड़कों पर नजर आए।

ईरान समर्थित सशस्त्र संगठनों ने भी अमेरिकी सैनिकों की वापसी का स्वागत किया। इन गुटों का लंबे समय से कहना रहा है कि इराक की जमीन पर किसी विदेशी सैन्य शक्ति की मौजूदगी नहीं होनी चाहिए। अमेरिकी सैनिकों की अंतिम टुकड़ी के जाने के बाद इन संगठनों के समर्थकों ने भी सार्वजनिक कार्यक्रम किए।

2003 से शुरू हुआ अमेरिकी सैन्य अध्याय

इराक में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी की शुरुआत 2003 में हुई थी, जब अमेरिका के नेतृत्व में सैन्य कार्रवाई के बाद सद्दाम हुसैन की सरकार गिराई गई। इसके बाद कई वर्षों तक इराक में हिंसा, विद्रोह और सांप्रदायिक संघर्ष जारी रहा। अमेरिका ने 2011 में अपने सैनिकों को वापस बुला लिया था, लेकिन 2014 में ISIS के तेजी से उभरने के बाद अमेरिकी नेतृत्व वाली गठबंधन सेना दोबारा इराक पहुंची।

ISIS ने उस दौर में इराक और सीरिया के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था। संगठन के खिलाफ इराकी सेना, कुर्द पेशमर्गा और अंतरराष्ट्रीय गठबंधन ने अभियान चलाया। इराक में ISIS का क्षेत्रीय नियंत्रण 2017 तक काफी हद तक खत्म कर दिया गया, लेकिन संगठन के कुछ सदस्य और स्लीपर सेल अब भी मौजूद बताए जाते हैं।

अब सबसे बड़ी चिंता ISIS की

अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इराकी सुरक्षा बल अकेले ISIS के बचे हुए नेटवर्क पर प्रभावी नियंत्रण बनाए रख पाएंगे। अमेरिकी सेना इराक को खुफिया जानकारी, निगरानी और आतंकवाद विरोधी अभियानों में सहयोग देती रही है। अब अमेरिकी सैन्य मिशन खत्म होने के बाद इराकी सरकार पर सुरक्षा की जिम्मेदारी और बढ़ गई है।

विशेषज्ञों की चिंता यह है कि ISIS भले ही पहले जैसी क्षेत्रीय ताकत नहीं रहा हो, लेकिन उसके स्लीपर सेल अब भी हमले करने की क्षमता रखते हैं। खासकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में संगठन की गतिविधियों को लेकर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। कुछ विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि अगर सुरक्षा व्यवस्था में कमजोरी आई तो ISIS अपने नेटवर्क को फिर से मजबूत करने की कोशिश कर सकता है।

ईरान समर्थित मिलिशिया भी बड़ी चुनौती

इराक के सामने दूसरी बड़ी चुनौती ईरान समर्थित हथियारबंद गुटों की है। अमेरिकी वापसी का इन संगठनों ने लंबे समय से समर्थन किया है। इराकी सरकार ने इन गुटों से हथियारों को राज्य के नियंत्रण में लाने की कोशिश की है, लेकिन कुछ प्रभावशाली समूहों ने निरस्त्रीकरण को लेकर विरोध या शर्तें रखी हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, हथियारबंद गुटों को लेकर सरकार की समयसीमा भी आगे बढ़ाई गई है।

इस स्थिति में इराक के सामने दोहरी चुनौती है—एक ओर ISIS के बचे हुए नेटवर्क पर नियंत्रण बनाए रखना और दूसरी ओर देश के भीतर सक्रिय शक्तिशाली हथियारबंद गुटों को सरकारी सुरक्षा व्यवस्था के दायरे में लाना।

अमेरिका की भूमिका पूरी तरह खत्म नहीं

हालांकि अमेरिकी सैनिक अब इराक में तैनात नहीं रहेंगे, लेकिन अमेरिका और इराक के सुरक्षा संबंध पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं। अमेरिकी पक्ष के मुताबिक भविष्य में इराक को प्रशिक्षण और खुफिया सहयोग जारी रह सकता है। यानी सैन्य मिशन खत्म होने के बावजूद दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग का एक नया चरण शुरू हो रहा है।

इस तरह अमेरिकी सैनिकों की विदाई इराक के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ है। बगदाद की सड़कों पर जहां इसे संप्रभुता और विदेशी सैन्य मौजूदगी के अंत के रूप में मनाया जा रहा है, वहीं सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल अभी भी कायम हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इराकी सुरक्षा बल ISIS के स्लीपर सेल और हथियारबंद गुटों से निपटते हुए देश में स्थिरता बनाए रख पाते हैं या नहीं।

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