उरई शहर में बढ़ते ट्रैफ़िक जाम और अव्यवस्था से निपटने के लिए प्रशासन ने एक सराहनीय और नवाचारी कदम उठाया है। जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय के निर्देश पर शहर के प्रमुख चौराहों पर अब एनसीसी और एनएसएस कैडेट ट्रैफ़िक ड्यूटी संभाल रहे हैं। यह पहल न केवल ट्रैफ़िक नियंत्रण में मदद कर रही है, बल्कि युवाओं में अनुशासन, सामाजिक ज़िम्मेदारी और सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता भी बढ़ा रही है।

पिछले कुछ समय से उरई शहर में बढ़ते ट्रैफ़िक दबाव और अव्यवस्था प्रशासन के लिए चुनौती बन गए थे। बाज़ार, स्कूल टाइम और ऑफिस आवागमन के दौरान शहर के कई चौराहों — जैसे शहीद भगत सिंह चौराहा, रामनगर चौराहा, और कलेक्ट्रेट तिराहा — पर घंटों जाम की स्थिति बनी रहती थी। इसी समस्या के समाधान के लिए जिला प्रशासन ने युवाओं की भागीदारी से एक नया प्रयोग शुरू किया है।
जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय के आदेश पर एनसीसी (राष्ट्रीय कैडेट कोर) और एनएसएस (राष्ट्रीय सेवा योजना) के प्रशिक्षित कैडेटों को ट्रैफ़िक प्रबंधन की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है। गुरुवार को इस अभियान की शुरुआत शहीद भगत सिंह चौराहा से हुई।
ट्रैफ़िक ड्यूटी संभालने से पहले सभी कैडेटों को यातायात विभाग की ओर से विशेष प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में उन्हें सिखाया गया कि—
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कैसे ट्रैफ़िक सिग्नल के अनुरूप वाहन नियंत्रित किए जाते हैं,
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हेलमेट और सीट बेल्ट की अनिवार्यता का पालन कैसे सुनिश्चित किया जाए,
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पैदल यात्रियों को सुरक्षित रूप से सड़क पार कराने के लिए कौन से संकेत प्रयोग किए जाएं,
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ज़ेब्रा क्रॉसिंग और ट्रैफ़िक सर्कल के नियमों का पालन कैसे कराया जाए।
दो शिफ्टों में तैनात कैडेटों ने सुबह और शाम के व्यस्त समय में अपनी ड्यूटी निभाई। उन्होंने वाहन चालकों को ट्रैफ़िक नियमों के प्रति जागरूक किया, बिना हेलमेट या सीट बेल्ट के गाड़ी चला रहे लोगों को समझाया, और पैदल यात्रियों को सुरक्षित रूप से सड़क पार कराने में मदद की।
कैडेटों की मौजूदगी का असर पहले ही दिन से देखने को मिला। जिन चौराहों पर अक्सर अव्यवस्था बनी रहती थी, वहाँ ट्रैफ़िक का प्रवाह नियंत्रित और सुचारू दिखाई दिया। वाहन चालकों ने नियमों का पालन किया और पैदल यात्रियों ने भी राहत महसूस की।
स्थानीय व्यापारियों और राहगीरों ने प्रशासन की इस पहल की सराहना की। लोगों का कहना है कि यदि यह व्यवस्था नियमित रूप से लागू रही, तो उरई शहर को ट्रैफ़िक जाम से काफी राहत मिल सकती है।
एक स्थानीय निवासी ने कहा —
“पहले यहां रोज़ घंटों जाम लगता था, लेकिन आज कैडेटों की मौजूदगी से ट्रैफ़िक बिल्कुल व्यवस्थित रहा। यह व्यवस्था बनी रहे तो शहर में काफी सुधार होगा।”
जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने स्पष्ट किया कि यह पहल केवल एक दिन की नहीं है, बल्कि इसे नियमित रूप से जारी रखा जाएगा। आने वाले दिनों में शहर के अन्य प्रमुख चौराहों जैसे बस स्टैंड, स्टेशन रोड, और कलेक्ट्रेट क्षेत्र में भी एनसीसी और एनएसएस कैडेटों की तैनाती की जाएगी।
डीएम ने कहा —
“हम युवाओं की ऊर्जा और अनुशासन को समाजहित में जोड़ना चाहते हैं। यह पहल ट्रैफ़िक व्यवस्था सुधार के साथ-साथ युवाओं में जिम्मेदारी की भावना भी विकसित करेगी।”
इस दौरान अपर पुलिस अधीक्षक, नगर मजिस्ट्रेट, सीओ सिटी, एआरटीओ और यातायात विभाग के अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे और कैडेटों को मार्गदर्शन दिया। उन्होंने बताया कि यह मॉडल जिले के अन्य कस्बों में भी लागू किया जा सकता है।
एनसीसी और एनएसएस के प्रशिक्षित कैडेट न केवल अनुशासन और सेवा भावना के प्रतीक हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता भी रखते हैं। इस अभियान से युवाओं को यह सीख मिल रही है कि वे केवल शिक्षण संस्थानों तक सीमित न रहकर सामाजिक विकास में भी अपनी भूमिका निभाएं।
उरई शहर में ट्रैफ़िक व्यवस्था सुधार के लिए प्रशासन और युवाओं की यह संयुक्त पहल एक नई दिशा की शुरुआत है। यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो इसे पूरे जनपद में लागू किया जा सकता है।
ट्रैफ़िक नियंत्रण में युवाओं की भागीदारी न केवल व्यवस्था सुधार रही है, बल्कि शहर में “सुरक्षित यातायात – सबकी जिम्मेदारी” का संदेश भी दे रही है।
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